close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: भूल गए कलेक्टर पापा अपनी बेटियों को, नहीं आई एक साल से याद...

यह कहानी प्रदेश में 33 जिला कलक्टर की ओर से गोद ली गई बेटियों की है.

राजस्थान: भूल गए कलेक्टर पापा अपनी बेटियों को, नहीं आई एक साल से याद...
आपणी योजना में गोद ली गई जयपुर की अमिता टांक.

जयपुर: लगता है जिले के 'कलेक्टर पापा' अपनी गोद ली गई बेटियों को पूरी तरह भूल गए हैं. गोद लेने के बाद पिछले 365 दिनों से इन बेटियों की अपने पापा से मुलाकात नहीं हो पाई.

माना जा रहा है कि व्यस्त कामकाजी जीवन के कारण गोद लेने के बावजूद अपनी बेटियों से मिलने का समय नहीं निकाल पा रहे हैं. यह कहानी प्रदेश में 33 जिला कलक्टर की ओर से गोद ली गई बेटियों की है.

आपणी योजना में ली गईं थीं गोद
आपको बता दें कि वसुंधरा राजे की पिछली सरकार के कार्यकाल में 'आपणी बेटी' योजना के तहत बेटियों को गोद लेने वाले प्रदेश के कई कलक्टरों का इन दिनों अपनी बेटियों के साथ प्यार नहीं बांट पा रहे है. इसके पीछे बड़ी वजह पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव के साथ प्रदेश में सत्ता परिवर्तन है. 

नहीं हो सकी 'पापा' से मुलाकात
प्रदेश के सभी जिलों में जिला कलक्टरों ने बेटियों को गोद लिया था. लेकिन अभी भी इन बेटियों से ज्यादातर जिला कलक्टर पापा नहीं मिल पा रहे है.

15 साल की इस लड़की को लिया गया था गोद
जयपुर के कलेक्टर ने 15 वर्षीय अमिता टांक गोद लिया था. आठ साल पहले अमिता से उसके माता-पिता का साया छिन गया. इस दौरान उसकी बुआ ने उसकी पढ़ाई लिखाई के अलावा परवरिश का जिम्मा निभाया. 2016 में आपणी बेटी योजना के तहत तत्कालीन जयपुर जिला कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने अमिता टांक को गोद लिया. जिसके बाद उसका गांधी नगर स्थित सरकारी स्कूल में नामांकन करवाने के बाद बैंक में खाता खुलवा पैसे जमा करवाए गए. इसके अलावा गांधीनगर स्थित छात्रावास में रहने की व्यवस्था की गई. जिला कलक्टर अपनी गोद ली हुई बेटी से छात्रावास में मिलने पहुंचे और उसके डॉक्टर बनने के सपने की हमेशा हौंसला अफजाई करते रहे.

सत्ता बदलते बदली इन लड़कियों की परिस्थितियां
विधानसभा चुनाव हुए उसके बाद लोकसभा चुनाव और सत्ता परिवर्तन के साथ सरकारी मशीनरी में फेरबदल हुआ. नए हाकिम बदले तो परिस्थितयां बदली और गोद ली गई बेटियों को अधिकारियों पूरी तरह भूल गए.

अब नहीं रहा सरकार का ध्यान
बेटियों का कहना है कि जिस उम्मीद से हमें उस समय सरकार ने गोद लिया था इस तरह की सहायता अब मिल नहीं रही है. जयपुर में भी इन बेटियों से प्रशासनिक अधिकारियों को मिले हुए एक साल से ज्यादा का समय बीत चुका है. इतना ही नहीं जयपुर कलक्टर जगरूप सिंह यादव तो पदभार संभालने के बाद 10 माह से आज तक खैर खबर ही नहीं लेने पहुंचे हैं.

अमिता को है नए कलेक्टर से मिलने का इंतजार
अमिता टांक का कहना है नए कलक्टर पापा से वो मिलना जरूर चाहती हैं लेकिन वो मिलने नहीं आ रहे हैं. स्कूल की छुट्टियां शुरू हो गई है. दीपावली नजदीक है और बच्चों को नए कपडों और पटाखों का इंतजार है. साथ में अमिता की आंखे उसके पापा को देखने को तरस रही हैं.

विभाग और सरकार को नहीं है कोई सुध
जिला कलक्टरों की ओर से गोद ली हुई बेटियों को लेकर नई सरकार बनने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग व सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने कोई आदेश जारी नहीं किए है. इस कारण प्रदेश के ज्यादातर जिलों के जिला कलेक्टर भी कोई उत्साह नहीं दिखा रहे हैं.