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अजमेर: नारी के अपमान के खिलाफ हैं ये संत, चला रहे हैं बेटियों को बचाने की मुहिम

इस मानसिकता से बाहर निकालने के लिए नसीराबाद के पास विख्यात मसानिया भैरव धाम कालका मंदिर के मुख्य उपासक ने बेटी बचाओ की मुहिम चला रखी है.

अजमेर: नारी के अपमान के खिलाफ हैं ये संत, चला रहे हैं बेटियों को बचाने की मुहिम
मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ में मुख्य उपासक चंपालाल महाराज.

मनवीर सिंह चुड़ावत, नसीराबाद (अजमेर): नारी को भले ही आम लोग लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा के रूप में पुकारते और पूजा करते हो. नवरात्रों में विशेष रूप से कन्या पूजन किया जाता हो. वहीं, दूसरी तरफ आज भी अधिकांश व्यक्ति नारी को अभिशाप मानते हुए पुत्र की तुलना में गौण दृष्टि से देखते हुए अभिशाप के रूप मे देखा जाता है. इस मानसिकता से बाहर निकालने के लिए नसीराबाद के पास विख्यात मसानिया भैरव धाम कालका मंदिर के मुख्य उपासक ने बेटी बचाओ की मुहिम चला रखी है.

नसीराबाद (Nasirabad) के पास विख्यात मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ में मुख्य उपासक चंपालाल महाराज के सानिध्य में नवरात्रा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है. इस मौके पर राजस्थान(Rajasthan)सहित अन्य प्रदेशों के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. धार्मिक स्थलों में नसीराबाद के निकट यह ऐसा अनूठा मंदिर है जहां पर किसी भी रूप में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दान चंदा भेंट स्वीकार नहीं किया जाता है. इतना ही नहीं बल्कि यहां पर फूल माला अगरबत्ती प्रसाद आदि भी स्वीकार नहीं है. इस विशाल मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था स्वयं मुख्य उपासक चंपालाल महाराज वहन करते हैं. सभी श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग, पेयजल, चाय और भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था की जाती है. 

भ्रूण हत्या को बताते हैं अभिशाप
मुख्य उपासक चंपालाल महाराज का सवाल है कि सभी को मां बहन पत्नी चाहिए तो बेटी क्यों नहीं चाहिए. बेटियां स्वयं अपना भाग्य लिखवा कर लाती है. यह किसी पर बोझ नहीं होती बल्कि परिवार की सेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहती है. भ्रूण हत्या आप ही नहीं बल्कि अभिशाप भी है.

भक्त से नहीं लेता है कोई भी दान
उन्होंने कहा कि भगवान लेता नहीं बल्कि देता है. मंदिर में चंदा फूलमाला अगरबत्ती प्रसाद आदि चढ़ाने के बजाय श्रद्धालु खाली आकर भगवान से मांगें तो भगवान निसंदेह श्रद्धालु की मनोकामना पूरी करते हैं. वास्तविकता में वही सच्चा मसाणिया भैरव धाम है जहां पर किसी भी प्रकार का कोई भी चढ़ावा स्वीकार नहीं किया जाए. क्योंकि किसी भी कफन में जेब नहीं होती. 

नहीं नजर आता कोई भी भिखारी
गौरतलब है कि इस विख्यात मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ पर विशेष धार्मिक आयोजन और मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमडने के बावजूद पूरे क्षेत्र में एक भी भीख मांगने वाला भिखारी नजर नहीं आता है. जबकि अधिकांश धार्मिक स्थलों के बाहर भीख मांगने वालों की कतार लगी रहती है. धार्मिक स्थलों पर सेवाएं देने वाले व्यक्ति भी विशेष रुप से अरदास कराने और कतार में नहीं लगने का विशेष सुविधा शुल्क वसूलते हैं. 

श्रद्धालुओं को समाजसेवा के लिए किया जा रहा प्रोत्साहित
उल्लेखनीय है कि इस धाम पर श्रद्धालुओं के सैलाब को देखते हुए आमजन से संबंधित विभिन्न योजनाओं को भी प्रोत्साहित किया जाता है. दूरदराज से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस धाम पर नशा मुक्ति, भ्रूण हत्या नहीं करने, जल स्वावलंबन, रक्तदान, स्वच्छता, पॉलिथीन मुक्त देश निर्माण करने का संकल्प ले चुके हैं. नवरात्रा के मौके पर प्रज्वलित अखंड ज्योत के दर्शन करने तथा मनोकामना पूर्ण स्तंभ की परिक्रमा लगाने के लिए श्रद्धालुओं का दिन भर तांता लगा हुआ है. इस मौके पर जिला प्रशासन, पुलिस और भैरव भक्त मंडल द्वारा माकूल व्यवस्था की हुई है.

सामाजिक सरोकारों के लिए करता है काम
तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने भी इस धाम पर देश में अमन चैन की दुआ मांगते हुए व्यवस्थाओं का अवलोकन किया था और हर्ष व्यक्त किया कि यह ऐसा धार्मिक स्थल है जहां पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी चढ़ावा स्वीकार नहीं है. नसीराबाद के पास विख्यात मसानिया भैरव धाम की दास्तान यहीं तक सीमित नहीं है. इस धाम पर सर्व धर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया गया. धनाढ्य लोगों के विवाह सम्मेलन की तर्ज पर आकर्षक सजावट की गई और सामूहिक विवाह सम्मेलन में वर वधु से बिना एक रुपैया लिए हजारों लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई और घरेलू सामान पलंग अलमारी बर्तन कपड़े जेवर आदि भेंट किए गए.

मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ के मुख्य उपासक चंपालाल महाराज ने बताया कि जब वह 13 साल की उम्र के थे तभी से मसाणिया भैरव की उपासना करते हैं और उस वक्त प्रण लिया गया था कि किसी भी श्रद्धालु सेकिसी भी रूप में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुछ भी भेंट स्वीकार नहीं की जाएगी. स्वयं की हैसियत के अनुसार हर संभव श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी. श्रद्धालुओं के लिए इस धाम पर आस्था को देखते हुए लाखों लोगों का आगमन होता है. जिन्हें कुरीतियों से दूर रहने के बारे में भी जागृत करने का प्रयास किया जाता है. 

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि इंसान के पास जो कुछ है. वह भगवान का दिया हुआ है. इसलिए उसी को वापस देना सैद्धांतिक रूप से गलत है. भगवान लेता नहीं बल्कि देता है. सामाजिक सरोकार रक्तदान, जल स्वावलंबन, नशा मुक्ति, वृक्षारोपण सहित भ्रूण हत्या रोकने और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की मुहिम चलाकर इस मुहिम मे शामिल होकर मानवता का दायित्व अदा करें.

अजमेर भागीरथ चौधरी ने श्रद्धालुओं के सैलाब को संबोधित करते हुए बताया कि यह ऐसा अनूठा धार्मिक स्थल है. जहां पर किसी भी रूप में कोई भी चढ़ावा स्वीकार नहीं किया जाता है और ना ही इस क्षेत्र में कोई भीख मांगने वाला भिखारी नजर आता है. मुख्य उपासक चंपालाल महाराज के विभिन्न सरकारी योजनाओं मे सहयोग की भी सराहना की. इस धाम पर बेटियों को विशेष रूप से प्रोत्साहन दिया जाता है.