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व्यक्ति या बिरादरी नहीं, कार्यकर्ताओं के दम पर मिली जिम्मेदारी: सतीश पूनिया

 सतीश पूनिया(Satish Poonia) ने विजयादशमी पर प्रदेशाध्यक्ष का कार्यभार औपचारिक रूप से संभाल लिया.

व्यक्ति या बिरादरी नहीं, कार्यकर्ताओं के दम पर मिली जिम्मेदारी: सतीश पूनिया
जयपुर में कार्यक्रम के दौरान सतीश पूनिया.

ज़यपुर: साल 2019 में राजस्थान बीजेपी (Rajasthan BJP)को 19 वां प्रदेशाध्यक्ष मिल गया है. सतीश पूनिया(Satish Poonia)ने विजयादशमी पर प्रदेशाध्यक्ष का कार्यभार औपचारिक रूप से संभाल लिया. इस दौरान बीजेपी कार्यालय के बाहर भव्य पंडाल में बड़े मंच पर पार्टी के प्रमुख नेता दिखे. तो प्रदेशभर से आए कार्यकर्ताओं ने भी अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया. 

पूनिया ने भी पदभार संभालने के साथ ही एक बार फिर मंच से ही राजस्थान (Rajasthan)को कांग्रेस मुक्त करने का संकल्प दोहराया. अपने भाषण में पूनिया ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पुरोधाओं को याद किया. लेकिन मंच से एक बार भी पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे(Vasundhra Raje)का नाम नहीं लिया. 

बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए 14 सितंबर को सतीश पूनिया के नाम का ऐलान हुआ तो इसे कार्यकर्ताओं का सम्मान बताया गया. अब प्रदेश बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने भी केंद्र के इस फ़ैसले के प्रति अपना सम्मान दिखाने के लिए जयपुर की तरफ़ कूच किया. मौका था सतीश पूनिया के कार्यभार ग्रहण समारोह का. 

पूनिया ने राजस्थान बीजेपी के 19 वें प्रदेशाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया. सुबह मोतीडूंगरी गणेश मन्दिर में धोग लगाने के बाद पूनिया आरएसएस के स्थापना दिवस पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए तो कार्यभार ग्रहण संभालने से पहले उन्होंने कन्या पूजन किया तो भगवान को भी प्रणाम किया. 

कामकाज संभालने से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और चुनाव अधिकारियों को संबोधित करते हुए पूनिया ने सबको साथ लेकर चलने की बात कही. उन्होंने साफ कहा कि आज तक उनकी तरफ़ से किसी का बुरा नहीं हुआ और आगे भी ऐसा ही होगा. 

पूनिया के कार्यभार संभालने के मौके पर कार्यकर्ताओं के साथ ही जनप्रतिनिधियों में भी उन्हें बधाई देने को लेकर उत्साह दिखा. दोपहर में ठीक बारह बजकर पांच मिनट पर पूनिया ने कुर्सी संभाली तो राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उपनेता राजेन्द्र राठौड़, पूर्व अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा, अशोक परनामी, अरुण चतुर्वेदी और संगठन के वी सतीश के साथ ही चन्द्रशेखर भी मौजूद रहे. 

कार्यभार संभालने के बाद पूनिया कार्यालय के बाहर बने पंडाल में पहुंचे. यहां कार्यकर्ताओं को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि पूनिया के नेतृत्व में बीजेपी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. 

कार्यक्रम में आए लोगों को सम्बोधित करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यालय के बाहर इस तरह का आयोजन या तो 8 जनवरी 2008 को देखा था या फिर आज ही देखा है. कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से उत्साहित ओम माथुर ने कहा कि अगर सभी कार्यकर्ता ठान लें तो राजस्थान में कांग्रेस सरकार की हालत तो वे नवम्बर में ही खराब कर सकते हैं. 

कार्यक्रम में आए लोगों को सम्बोधित करने के लिए सतीश पूनिया उठे तो समर्थकों ने पूनिया के नारे लगाए. .पूनिया ने अपने भाषण में पीएम नरेन्द्र मोदी के साथ ही श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पण्डित दीनदयाल उपाध्याय, अटलबिहारी वाजपेयी, भैंरोसिंह शेखावत, सुन्दर सिंह भण्डारी, भंवरलाल शर्मा, जावड़ेकर, कटारिया, मेघवाल और मंच पर बैठे नेताओं के साथ ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का ज़िक्र तो किया. लेकिन अपने भाषण के दौरान नये प्रदेशाध्यक्ष ने एक बार भी बीजेपी की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का नाम तक नहीं लिया. हालांकि वसुंधरा राजे ने पूनिया को बधाई पत्र ज़रूर भेजा था. लेकिन वह पत्र भी महामंत्री भजनलाल शर्मा ने ही पढ़ा.

पूनिया ने कहा कि उन्हें जो ज़िम्मेदारी मिली है. वह किसी व्यक्ति या बिरादरी की मेहरबानी से नहीं. बल्कि कार्यकर्ताओं के दम पर मिली है. बीजेपी को सदस्यों के लिहाज से करोड़पति पार्टी बताते हुए पूनिया ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बुरी तरह कमज़ोर हो चुकी है. 

पूनिया ने कहा कि आम तौर पर सरकारों के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी तीन या पांच साल बाद होती है. लेकिन यहां तो दस महीने में ही सरकार से लोग उकताने लगे हैं. 

शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हुए कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं की भावनाओं को अपने दिल के करीब बताने वाले पूनिया खुद भावुक दिखे तो अपनी बात से उन्होंने कार्यकर्ताओं को भी भावुक कर दिया. 

पूनिया ने कहा कि पार्टी और कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को वे कभी कम नहीं होने देंगे. पूनिया ने कहा कि वे कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए अपने प्राण भी त्याग दें तो वह भी कम है.