close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

झुंझुनूं: बकरी चराने गई छात्रा की कुएं में गिरने से मौत, शव निकालने का हो रहा प्रयास

झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखंड के करमाड़ी गांव में बकरी चराने गई छात्रा की पैर फिसलकर कुएं में गिरने से मौत हो गई. 

झुंझुनूं: बकरी चराने गई छात्रा की कुएं में गिरने से मौत, शव निकालने का हो रहा प्रयास
16 घंटे बीत जाने के बाद भी शव को कुएं से बाहर नहीं निकाला जा सका.

झुंझुनूं: झुंझुनूं जिले(Jhunjhunu) के खेतड़ी(Khetdi) उपखंड के करमाड़ी गांव में बकरी चराने गई छात्रा की पैर फिसलकर कुएं में गिरने से मौत हो गई. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी शव को कुएं से बाहर निकालने में जुटे हुए है. लेकिन कुएं में पानी अधिक होने के कारण शव निकालने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

मिल रही जानकारी के अनुसार, 16 घंटे बीत जाने के बाद भी शव को कुएं से बाहर नहीं निकाला जा सका. यहां एसडीएम शिवपाल जाट, तहसीलदार कृष्ण कुमार यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों के सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन(Rescue Operation) जारी है. 

जानकारी के अनुसार, करमाड़ी निवासी छात्रा संगीता पुत्री मदनलाल (18) शाम करीब पांच बजे बकरी चराने के लिए अपने खेत में गई थी. वह बकरियों को छोड़कर खेत में बने कुएं पर जाकर बैठ गई. इस दौरान उसका पैर फिसल जाने के कारण वह कुएं में गिर गई. घटना के बाद उसके साथ गई बच्ची ने इसकी जानकारी परिजनों को दी. जिसके बाद ग्रामीण समते परिजन मौके पर पहुंचे. इसके बाद ग्रामीणों ने लड़की को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया. जानकारी मिलने के बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर पहुंचे.

पिता का 10 साल पहले हो चुका है निधन
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष निरंजन लाल सैनी ने बताया कि छात्रा संगीता के पिता मदनलाल का करीब दस वर्ष पूर्व निधन हो गया था. परिवारिक स्थिति कमजोर होने के कारण बकरी पालन का कार्य कर अपना काम चलाते है. मृतक छात्रा संगीता तीन बहनों में सबसे छोटी थी, उसकी एक बहन मेडिकल की तैयारी कर रही तथा एक बहन एमएससी की पढ़ाई कर रही है. 

मृतका ने तीरंदाजी में जीता था स्वर्ण पदक
ग्रामीणों के अनुसार छात्रा संगीता पढ़ाई में काफी होशियार थी. वो पपुरना के शहीद भगवान सिंह राजकीय स्कूल में 12 वीं कक्षा में अध्ययनरत थी. मृतका ने 7 दिन पहले ही आबूरोड में आयोजित राज्य तीरंदाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था. आर्थिक स्थिति कमजोर होने से वह बकरी पालन और ऐसे ही दूसरे कामों में परिवार की मदद करती थी.