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राजस्थान: मानसरोवर औद्योगिक क्षेत्र के लिए चुनौती बनी चोरी और पेयजल समस्या

मानसरोवर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि साफ सफाई, वेंडर फ्री जोन, अवैध पॉर्किंग पर सख्ती, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी सहित हरित क्षेत्र यहां की खासियत है.

राजस्थान: मानसरोवर औद्योगिक क्षेत्र के लिए चुनौती बनी चोरी और पेयजल समस्या
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: मानसरोवर औद्योगिक क्षेत्र की पहचान जयपुर रग्स ने भी बनाई है. हजारों महिलाओं को उनके घर में कारपेट बनाने की सुविधा देकर सामाजिक-औद्योगिक मिलाप का बेहतर उदाहरण पेश किया गिया है. इस पहल से राजस्थान की परम्परागत कला को संजोने और संवारने का काम भी हुआ है. 

जयपुर रग्स के चेयरमैन एनके चौधरी का कहना हैं कि वर्षों पहले हुई छोटी शुरूआत मानसरोवर औद्योगिक क्षेत्र से निकल कर पूरे विश्व में फैल चुकी है. अब कारपेट बनाने का फार्मुला सीखने ही सैंकड़ों विदेशी निर्माता राजस्थान आते हैं. उद्यमी अभय गुप्ता का कहना है कि सुविधाओं के बावजूद कुछ खामियां बरकरार हैं. क्षेत्र में पेयजल, दुपहिया वाहनों की चोरी चुनौती बनी हुई हैं. 

औद्योगिक इकाइयों से संग्रहित किया गया कचरा डिस्पोजल करने की जगह नहीं हैं. नगर निगम औद्योगिक क्षेत्र बताते हुए कचरा नहीं उठाता, जिससे से बड़ी परेशानी हैं. वहीं उद्यमियों को हाल ही में बिजली बिल में जोड़े गए फ्यल सरचॉर्ज से आर्थिक भार पड़ा हैं, अरबन डेवलपमेंट टैक्स के नोटिस आने से भी कारोबारी परेशान है.

मानसरोवर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि साफ सफाई, वेंडर फ्री जोन, अवैध पॉर्किंग पर सख्ती, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी सहित हरित क्षेत्र यहां की खासियत है. महिला कामगारों के यह सबसे सुरक्षित औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है. 47 देशों में यहां निर्मित उत्पाद सप्लाई होते हैं, दो ग्रीन लैंड भी यहां विकसित किए गए हैं लेकिन प्रिटिंग और डाईंग के लिए जगह नहीं हैं. ऐसे में गारमेंट इकाइयों की लागत बढ़ जाती हैं. उद्यमी विक्रम सिंह शेखावत का कहना हैं कि  प्रिटिंग और डाइंग के लिए अन्य राज्यों और जिलों में जाना पड़ता हैं. इससे प्रतिस्पर्द्वी बाजार में लंबे समय तक काम करने में परेशानी आती हैं.

मानसरोवर औद्योगिक क्षेत्र में पेयजल के लिए ठोस प्लान रीको की फाइलों तक भी नहीं पहुंची हैं. वर्तमान में ग्राउंड वॉटर सप्लाई किया जा रहा हैं, लेकिन भूमिजल के लगातार नीचे जाने से अब उद्यमियों के सामने परेशानी खड़ी होने लगी हैं. वहीं कचरा निस्तारण को लेकर भी नगर निगम से रीको संवाद करने की स्थिति में नहीं हैं. इसके बावजूद उद्यमियों को उम्मीद हैं औद्योगिक उत्पादन और निर्माण क्षेत्र की प्रगति के लिए रीको और सरकार इस बारे में सकारात्मक पहल रख समाधान की कोशिश करेंगी.