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राजस्थान: निकाय चुनाव में BJP-RLP के बीच गठबंधन की बात को पूनिया ने किया खारिज

स्थानीय निकाय में गठबंधन नहीं करने की बात कहने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पंचायती राज के चुनाव को लेकर अभी कुछ भी नहीं बोलना चाहते हैं. 

राजस्थान: निकाय चुनाव में BJP-RLP के बीच गठबंधन की बात को पूनिया ने किया खारिज
फाइल फोटो

जयपुर: पहले लोकसभा चुनाव और उसके बाद विधानसभा उपचुनाव में 'हम साथ-साथ हैं' का राग अलापने वाले बीजेपी और आरएलपी के रास्ते अब अलग-अलग होते दिखाई दे रहे हैं. निकाय चुनाव में गठबंधन की बातों को खारिज किया जा रहा है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में उनकी पार्टी का बड़ा जनाधार है, लिहाजा अभी निकाय चुनाव में गठबंधन की कोई दरकार उन्हें नहीं लगती.

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी के संयोजक हनुमान बेनीवाल को खुद इस बात का इल्म भी नहीं होगा कि आरएलपी के पहले स्थापना दिवस के दिन उन्हें इस तरह का गिफ्ट मिलेगा लेकिन कड़वा या मीठा जैसा भी हो, यह हकीकत है और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने साफ कर दिया है कि निकाय चुनाव में बीजेपी अब आरएलपी या किसी दूसरी पार्टी से गठबंधन नहीं करने जा रही है. पूनिया ने साफ कहा कि शहरी क्षेत्रों में उनकी पार्टी का मजबूत आधार है और ऐसी सूरत में गठबंधन की कोई जरूरत अभी नहीं दिखाई देती है.

पूनिया ने गठबंधन की बात को खारिज कर दिया है. तो क्या इसे यूं समझा जाए कि जहां जरूरत हो वहां तो गठबंधन कर लो और जहां पार्टी को खुद का मजबूत जनाधार दिखे वहां अपने सहयोगियों को अकेला छोड़ दो? लेकिन इस सवाल पर सतीश पूनिया कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दम पर 303 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया, लेकिन फिर भी पार्टी ने अपने सहयोगी दलों को सरकार में शामिल किया है. उपचुनाव और विधानसभा चुनाव में भी उनको सीटों के बंटवारे में साथ रखा. पूनिया ने कहा कि बीजेपी गठबंधन धर्म को मानती है और पार्टी को उसे निभाना भी आता है.

स्थानीय निकाय में गठबंधन नहीं करने की बात कहने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया पंचायती राज के चुनाव को लेकर अभी कुछ भी नहीं बोलना चाहते हैं. वह कहते हैं कि जब पंचायती राज के चुनाव आएंगे तब गठबंधन की जरूरत है या नहीं यह उसी वक्त तय होगा.

अब इसे समय की नजाकत कहें, मौकापरस्ती माने या राजनीति की रवायत लेकिन सच तो यही है कि निकाय चुनाव में बीजेपी और आरएलपी का गठबंधन नहीं हो रहा लेकिन सवाल तो यह खड़ा होता है कि क्या वाकई एक करोड़ से ज्यादा सदस्यों का दावा करने वाली बीजेपी को राजस्थान में राजनीतिक सहयोगी के रूप में किसी दूसरी पार्टी की जरूरत वाकई में है या सिर्फ हनुमान बेनीवाल और आरएलपी के कार्यकर्ताओं के कंधे पर रखकर ही बीजेपी ने बंदूक चलाई