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राजस्थान: 2015-16 से लगातार घाटे में है RTDC, सरकार नहीं ले रही एक्शन

आरटीडीसी यूनियन द्वारा पिछले 10 महीने पहले यूनिटों को लाभ में लाने के लिए सुझाव दिए थे लेकिन आरटीडीसी मेंजमेंट के पास समय नहीं होने बहाना करके ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

राजस्थान: 2015-16 से लगातार घाटे में है RTDC, सरकार नहीं ले रही एक्शन
फाइल फोटो

दामोदर प्रसाद, जयपुर: राजस्थान पर्यटन विकास निगम कभी घाटे का यूनिट ही नहीं रहा है लेकिन सही मायने में आरटीडीसी को घाटे में लाया गया है. आरटीडीसी को घाटे से उबारने के लिए 500 कर्मचारियों को रेवो डेपुटेशन पर भेजने का काम किया गया. वर्ष 2015—16 में आरटीडीसी 15 से 16 करोड़ घाटे में आ गया था लेकिन उसके बाद भी आरटीडीसी 15 से 16 करोड़ रू घाटे में चल रहा है. सरकार ने आरटीडीसी के आय-व्यय के स्रोतो को बंद कर दिया है. जिसके कारण आारटीडीसी की यूनिटों में होटलों के हालात खराब होते चले गए. जिसके चलते आज कर्मचारियों को भी समय पर वेतन नहीं मिल रहा है.

आरटीडीसी की प्रदेशभर में दो ही यूनिट है जो की अच्छा रेवन्यू विभाग को दे रही है. एक नाहरगढ़ किले पर स्थित पडाव यूनिट, दूसरी जोधपुर की घूमर यूनिट जो कि सबसे ज्यादा रेवन्यू आरटीडीसी को हर साल दे रही है. जिसमें जयपुर की नाहरगढ किले में स्थित पडाव यूनिट के प्रभारी भगतसिंह गुर्जर को 15 अगस्त पर राज्य स्तरीय पुरस्कार से मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया था.

आरटीडीसी को घाटे में दिखाकर बंद करने का काम किया जा रहा है. जो कर्मचारी यूनियन कभी नहीं होने देगा.
आरटीडीसी की बहरोड यूनिट जो लगातार लाभ में चल रही थी. जिसको फ्लाई ओवर बनने के नाम पर बंद कर दिया गया. फ्लाई ओवर को बने भी 15 साल हो गए लेकिन आरटीडीसी ने बहरोड यूनिट को चालू नहीं किया. आज बंद यूनिट जर्जर हो रही है. यूनिट में रखा सामान बेकार होता जा रहा है.

आरटीडीसी को इसकी कोई फ्रिक नहीं है. जो विभाग को लाभ देने वाली यूनिट को चलाकर बंद कर घाटे में आरटीडीसी को लाया जा रहा है. घाटे का मूल कारण बहरोड यूनिट पर रोडवेज बसों को बंद कर देना माना जा रहा है. नाइट का मिडवे बंद कर दिया गया. ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जांच नहीं होगी. दोषियों को सजा नहीं मिलेगी तब तक आरटीडीसी की यूनिट मुनाफे में कैसे आ पाएगी.

आरटीडीसी यूनियन द्वारा पिछले 10 महीने पहले यूनिटों को लाभ में लाने के लिए सुझाव दिए थे लेकिन आरटीडीसी मेंजमेंट के पास समय नहीं होने बहाना करके ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इन सुझावों की मुख्य सचिव डीबी गुप्ता और पर्यटन चेयरमैन श्रेया गुहा ने भी सराहना की है. यदि आरटीडीसी मेंजमेंट कर्मचारी यूनियन के सुझावों पर ध्यान देकर चर्चा करे तो यह प्रदेश का पहल विभाग होगा जो अच्छे सरकार को अच्छा रेवन्यू देने वाला होगा. पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह को भी कर्मचारी यूनियन ने सुझाव दिए थे. जिस पर एक कमेटी बनाई गई थी. उस कमेटी ने आज तक उन सुझावों पर कोई चर्चा नहीं की. कर्मचारी यूनियन राज्य सरकार से मांग करता है की आरटीडीसी को बंद करने के षडयंत्र के चलते जो नुकसान दिया जा रहा है उन अधिकारियों के जांच कर सजा दी जाए ताकि आरटीडीसी को लाभ में चलाने का काम किया जा सके.

आरटीडीसी की 15 यूनिट कुछ अंशों के लाभ में चल रही हैं जिनमें दो यूनिट सबसे ज्यादा रेवन्यू आरटीडीसी को दे रही हैं. जयपुर की नाहरगढ किले में पडाव यूनिट, जोधपुर की घूमर यूनिट का सबसे ज्यादा रेवन्यू आ रहा है. आरटीडीसी विभाग की अनदेखी के चलते प्रदेशभर में करीब 45 यूनिटें बंद पडी हुई हैं. जिनमें रखा लाखों करोडों का सामान धूल फांक रहा है.

राज्य सरकार से आरटीडीसी कर्मचारी यूनियन ने चुनाव से पहले सरकार से कहा था की आरटीडीसी की बहरोड और खासा कोठी के संदर्भ में कहा था यदि इनकों चालू कर दिया तो विभाग को एक अच्छा रेवन्यू मिल सकता है. अच्छा स्टाफ लगाकर एक बड़े रेवन्यू विभाग प्राप्त कर सकता है. इसकी हिमाकत कर्मचारी यूनियन करता है. यदि इनको फिर से चालू कर दिया जाए.