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राजस्थान: स्टूडेंट्स को नहीं मिल पाएगा साइकिल योजना का लाभ, छटी बार निरस्त हुआ टेंडर

इसके अलावा कंपनियों के साथ साथ रिटेलर भी इस निविदा प्रकिया में भाग ले सकता था लेकिन हर बार की तरह इस बार सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग योजना शुरू करने में फेल हो गया. 

राजस्थान: स्टूडेंट्स को नहीं मिल पाएगा साइकिल योजना का लाभ, छटी बार निरस्त हुआ टेंडर
अब विभाग सातवी बार टेंडर निकालने की तैयारी कर रहा है.

जयपुर: राजस्थान में एक बार फिर से सियासी साइकिल ने अपना रंग दिखा दिया है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्धारा बांटी जाने वाली साइकिल का टैंडर फिर निरस्त हो गया है. एक बार फिर विभाग के सभी दावे फेल हो गए जबकि छात्रावासों में रहने वाले स्टूडेंट्स को ये साइकिल तीन साल पहले बंटनी थी. ऐसे में अब तो 734 छात्रावासों में पढ़ने वाले हजारों स्टूडेंट्स योजना का बिना लाभ लिए ही बाहर हो गए हैं.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्धारा छटी बार टैंडर निरस्त हुआ है जबकि इस बार तो नियमों में भी परिवर्तन किया गया था लेकिन इसके बावजूद भी साइकिल के टैंडर के लिए किसी भी कंपनी ने आवेदन ही नहीं किया. अबकी बार तो कंपनी की टर्नओवर की शर्त 5 करोड़ से घटाकर 60 लाख किया गया था. इसके अलावा कंपनियों के साथ साथ रिटेलर भी इस निविदा प्रकिया में भाग ले सकता था लेकिन हर बार की तरह इस बार सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग योजना शुरू करने में फेल हो गया. छात्रावासों में रहने वाले 10 हजार चयनित छात्र छात्राओं को साइकिल वितरण का लक्ष्य रखा गया है.

छात्रावासों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए दो किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर पढ़ने वाले छात्रों को साइकिल वितरण करने की योजना पिछली बीजेपी सरकार में शुरू की गई थी. पिछली सरकार में 4 और इस सरकार में 2 बार टेंडर निकाले गए. अब विभाग सातवी बार टेंडर निकालने की तैयारी कर रहा है. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल का कहना है कि "विभाग द्धारा लगातार कोशिश की जा रही है. अफसरों द्वारा नियमों में परिवर्तन कर फिर से टेंडर निकालेंगे. विभाग ही यहीं मंशा है कि स्टूडेंट्स को अच्छी क्वालिटी की साइकिल मिल सके. छात्र छात्राओं को रैंजर काले रंग की साईकिल बांटी जाएगी."

एक तरफ शिक्षा विभाग में छात्राओं को साइकिल बांटने का काम शुरू हो गया है, तो दूसरी तरफ सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग में रहने वाले स्टूडेंट्स को अभी तक साइकिल की राह देख रहे है. स्टूडेंट्स का कहना है कि "स्कूल ज्यादा दूर होने की वजह से समय की बर्बादी होती है. यदि साइकिल होती तो समय की बचत हो पाती. जिससे पढाई का समय और अधिक मिल पाता. पिछली सरकार में शिक्षा विभाग की तरफ से भगवा रंग साईकिले बांटी थी लेकिन कांग्रेस सत्ता में आई तो साइकिल का रंग फिर से बदल गया."

तीन साल पहले बीजेपी सरकार में सरकारी छात्रावासों में रहने वाले छात्र छात्राओं को निशुल्क साइकिल बांटने की घोषणा की थी. उसके बाद प्रदेश की सत्ता बदल गई और साइकिल सियासत का शिकार हो गई. वहीं, सत्ता बदलने के बाद भी छात्र छात्राओं को अब तक साइकिले बंट ही नहीं पाई. अब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग जानकारों से जानने की कोशिश कर रहा है कि कैसे साइकिल के टैंडर का टोटा पूरा हो पाएगा. कैसे कंपनियां साइकिल के लिए आवेदन करेगी.