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राजस्थान: बदलते युग में भी कायम है ये सदियों पुरानी कला, पेड़ों पर चढ़ कर सुनाते हैं वीर गाथाएं

बुंदेले हरबोले पेड़ के ऊपर चढ़कर भगवान के भजन और कथा के साथ ही झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की गाथा को गाते हैं.

राजस्थान: बदलते युग में भी कायम है ये सदियों पुरानी कला, पेड़ों पर चढ़ कर सुनाते हैं वीर गाथाएं

राम मेहता, बारां: जिले में कम्प्यूटर, मोबाइल के दौर में आज भी लोक कला जिंदा है. रोजी रोटी के लिए यहां के कलाकर अपनी इस कला को जिंदा रखे हुए हैं. हर बोलों की कहानी के नाम से जाने वाली लोक कला आज के आधुनिक युग में भी अपनी पहचान बनाए हुए है और लोगों के दिल में अपने लिए खास जगह भी बनाए हुए है. 

इस कला में कलाकार पेड़ पर चढ़ कर ऊंची आवाज में भूले बिसरे गीत सुनाते हैं और अगर आप किसी को देखेंगे तो आपको अचंभा जरूर होगा लेकिन कई गांवों में आज भी यह परंपरा जारी है. आज भी हाड़ौती क्षेत्र में कई स्थानों पर यदा, कदा बुंदेले हरबोले नजर आ जाते हैं. कई दशकों पूर्व तो यह बुंदेले हरबोले करीब हर गांव में दिखाई देते थे लेकिन समय के साथ साथ इनकी गाथा सुनने वाले भी अब बहुत कम लोग ही मिलते हैं.

बुंदेले हरबोले पेड़ के ऊपर चढ़कर भगवान के भजन और कथा के साथ ही झांसी की महारानी लक्ष्मीबाई के शौर्य की गाथा को गाते हैं. वर्षों से चली आ रही बुन्देले हरबोलो कि यह गाथा आज भी जीवंत है. इसके पीछे उनका मकसद अपना परिवार का पालन पोषण का भी होता है. 

मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से आए मंगल सिंह बुंदेला इन दिनों बारां जिले के गांवों में पेड़ पर चढ़कर भजन गाते नजर आते हैं. बुंदेले को जब तक कोई दक्षिणा या बक्शीश नहीं मिल जाती तब तक वो पेड़ पर ही बैठ कर भजन या झांसी की महाराणी की कथा सुनाते ही रहते हैं. वह तभी पेड़ से उतरते हैं जब उन्हें कोई नीचे उतारने वाला बक्शीश देने वाला मिल जाता है.