close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान: महिलाओं को नहीं मिल रहीं स्वास्थ सुविधा, 2 प्रसुताओं को एलॉट हुआ 1 बेड

महात्मा गांधी राजकीय जिला चिकित्सालय के एमसीएच यूनिट में अभी 50 बैड हैं. रोजाना 25 से 30 डिलीवरी केस होने पर एक बेड पर अधिकांश तौर परदो-दो प्रसूताएं नजर आती हैं.

राजस्थान: महिलाओं को नहीं मिल रहीं स्वास्थ सुविधा, 2 प्रसुताओं को एलॉट हुआ 1 बेड

मनीष शर्मा, हनुमानगढ़: नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए भले ही राज्य सरकार कितने ही दावे करे या प्रयास करे मगर हनुमानगढ़ में ये दावे विफल साबित हो रहे हैं. जहां एक ओर राज्य के मुख्यमंत्री ने पिछले कार्यकाल में मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा और जांच योजना देकर प्रदेश वासियों को सौगात दी थी. 

वहीं इस बार भी स्वास्थ्य विभाग कुछ और बेहतर करने के लिए लगातार प्रयासरत नजर आ रहा है लेकिन हनुमानगढ़ के जिला चिकित्सालय के प्रसूता वार्ड के हालातों पर अगर नजर डालें तो मंजर बड़ा शर्मिंदगी भरा नजर आता है. सामान्य प्रसूता वार्ड में एक बेड पर दो-दो प्रसूताएं और साथ ही दो नवजात इलाज करवाने को मजबूर हैं. पिछली राज्य सरकार ने जिला चिकित्सालय में बढ़ते प्रसव को देखते हुए इस यूनिट को 50 से बढ़ाकर 100 बेड में क्रमोन्नत कर दिया था. जिसकी बदौलत साढ़े सात करोड़ की लागत से बनी नई इमारत बनकर तैयार है लेकिन चिकित्सको-नर्सिंग स्टाफ और कुछ तकनीकी खामियों के चलते हो रही लगातार देरी का खामियाजा यहां इलाज के लिए आने वाली प्रसूताओं और नवजात बच्चों को भुगतना पड़ रहा है.

महात्मा गांधी राजकीय जिला चिकित्सालय के एमसीएच यूनिट में अभी 50 बैड हैं. रोजाना 25 से 30 डिलीवरी केस होने पर एक बेड पर अधिकांश तौर परदो-दो प्रसूताएं नजर आती हैं. 50 बेड की एमसीएच यूनिट में 32 बोड प्रसूताओं के लिए होते हैं लेकिन अस्पताल ने क्षमता से अधिक बेड लगा रखे हैं इसलिए यूनिट पर अतिरिक्त दबाव रहता है. राज्य सरकार की ओर से गत वर्ष यूनिट को क्रमोन्नत कर सौ बेड की मंजूरी दे दी थी लेकिन यूनिट में जगह कम होने के कारण रोगियों के लिए बेड नहीं बढ़ाए जा सके. ऐसे में साढ़े सात करोड़ रुपए की लागत से यूनिट भवन का विस्तार तो कर दिया गया मगर आवश्यक स्टाफ की अभी भी दरकार है. एमसीएच में कम से कम 6 चिकित्सकों की आवश्यकता है लेकिन पिछले माह एक चिकित्सक के स्थानान्तरण के बाद अब सिर्फ एक ही चिकित्सक सेवाएं दे रही है जो कि नाकाफी है.

अस्पताल में एमसीएच यूनिट विस्तार के तहत निर्मित बिल्डिंग अस्पताल प्रशासन को हैंडओवर हो गई है लेकिन जिला अस्पताल में महज एक गायनोकॉलोजिस्ट है जबकि गाइडलाइन के हिसाब से 6 होने चाहिए. वहीं नर्सिंग स्टाफ के भी 30 से अधिक पद रिक्त हैं. ऐसे में सीमित स्टाफ के बावजूद इस बिल्डिंग में शिफ्टिंग कर काम शुरू करना अस्पताल प्रशासन के समक्ष बड़ी चुनौती है. हालांकि, पीएमओ का कहना है कि जल्द ही शिफ्टिंग का काम शुरू किया जाएगा.