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राजस्थान: युवाओं ने बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर, ऐसे संवार रहे छात्रों का भविष्य

पहले जहां स्कूल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा था. ऊबड़ खाबड़ खेल मैदान, खंडर स्कूल की बिल्डिंग, बारिश के दिनों में बच्चों के लिए प्रार्थना स्थल की भी जगह नहीं थी. 

राजस्थान: युवाओं ने बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर, ऐसे संवार रहे छात्रों का भविष्य

अमित यादव, दूदू: लोरड़ी गांव के युवाओं की सकारात्मक सोच ने राजकीय माध्यमिक विद्यालय की तस्वीर बदल दी है. युवाओं के आगे आने के बाद विद्यालय की स्थिति बदली-बदली नजर आने लगी है. सरकारी एवं गैर सरकारी सेवाओं में कार्यरत 24 से अधिक युवाओं ने सत्र 2017-18 में विद्यालय में घटते नामांकन एवं बिगड़ती व्यवस्था को सुधारने के लिए वाट्सएप सोशल ग्रुप का समूह बना कर तैयार किया. लोरड़ी विद्यालय विकास समिति के नाम से सोशल समूह बना कर धन संग्रहण करना शुरू किया गया. इसके बाद युवाओं ने लाखों रुपए की राशि एकत्र की.

पहले जहां स्कूल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा था. ऊबड़ खाबड़ खेल मैदान, खंडर स्कूल की बिल्डिंग, बारिश के दिनों में बच्चों के लिए प्रार्थना स्थल की भी जगह नहीं थी. लेकिन युवाओं की सोच ने इस सभी स्थितियों को बदलकर रख दिया है. युवाओं ने आपने निजी खर्चे पर प्रार्थना स्थल के लिए पक्के फर्श का निर्माण करवाया और आज बच्चों को कीचड़ से निजात मिल गया है. अगर स्कूल के रंगरोगन की बात की जाए तो स्कूल आज दूर से खिलखिलाती नजर आता है. स्कूल में चारों तरफ हेज लगाया गया है जो कि स्कूल की खूबसूरती पर चार चांद लगाता है. 

स्कूल की प्राचार्य ममता चौधरी ने भी जी मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए विद्यायल विकास समिति की तारीफ की. उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्कूल में हेडमास्टर समेत 5 टीचरों की कमी है लेकिन विकास समिति की तरफ से अपने निजी खर्चे पर 4 टीचरों की व्यवस्था कर रखी है. स्कूल के रिजल्ट से लेकर स्कूल के सौंदर्यीकरण में समिति की पूरी भागीदारी रही है.

गांव के युवाओं ने इतना कुछ कर दिया लेकिन अभी भी स्कूल में चार दिवारी और स्कूल की मरमत की आस है. क्योंकि युवाओं ने कहा कि इसमें खर्चा ज्यादा आता है लेकिन फिर भी हम उच्च अधिकारियों से मिलकर इसके लिए बजट लेकर आएंगे. साथ ही युवाओं ने कहा कि हमारे पास लाखों का फंड इकठ्ठा हो गया है. हम जल्द ही स्कूल में कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड ओर सीसीटीवी लगाएंगे. शिक्षा की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगया जा सकता है कि दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे की हद राइटिंग कितनी अच्छी है.

निजी स्कूलों की तर्ज पर बच्चों को आई कार्ड, टाई बेल्ट मुक्त में अंग्रेजी शिक्षा दिलाई जा रही है. साथ ही बच्चों के खेल के लिए खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई है ताकि बच्चों का पढ़ाई के साथ साथ सर्वागीण विकास भी हो सके. यहां तक की गांव के सरकारी कर्मचारियों के बच्चें भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ रहे हैं.