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राजस्थान: बेरोजगारी के लिए गहलोत सरकार कोटा सिस्टम में कर सकती है बड़ा बदलाव

राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं की अगर बात की जाए तो सामान्य श्रेणी में बाहरी राज्यों का कोटा 50 फीसदी निर्धारित है. 

राजस्थान: बेरोजगारी के लिए गहलोत सरकार कोटा सिस्टम में कर सकती है बड़ा बदलाव
रोजगार की आस लगाए बैठे बेरोजगारों के हौसले अब टूटने लगे हैं.

जयपुर: राजस्थान में पिछले 5 सालों से बेरोजगारी लगातार बढ़ती ही जा रही है. विभाग चाहे कोई सा भी हो सैंकड़ों बेरोजगार रोजगार को लेकर सरकार की ओर आस लगाए बैठे हैं. राजस्थान में बेरोजगारी बढ़ने के पीछे के बहुत से कारण माने जा रहे हैं, लेकिन बाहरी राज्यों के विद्यार्थियों को कोटा निर्धारित नहीं होना भी राजस्थान की बेरोजगारी बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जा सकता है. देश के अगर 21 राज्यों की बात की जाए तो वहीं राजस्थान का कोटा शून्य हैं. वहीं आधा दर्जन राज्यों में ये कोटा महज 5 से 10 फीसदी तक ही निर्धारित है. ऐसे में बेरोजगार युवक राजस्थान में भी बाहरी राज्यों का कोटा निर्धारण की कई बार मांग उठा रहे हैं.

उतराखण्ड, आंद्रप्रदेश, असम, सिक्कीम, पंजाब, हरियाणा, वेस्ट बंगाल, ओडिसा, तमिलनाडू, झारखण्ड, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक,गोवा, तिरुपुरा, तेलंगाना, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, मध्यप्रदेश और बिहार की बात की जाए तो इन राज्यों की किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में राजस्थान का कोई बेरोजगार आवेदन नहीं कर सकता है. इसके पीछे का कारण है इन राज्यों में बाहरी राज्यों का कोटा निर्धारित होना. वहीं छत्तीसगढ़ में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में से 33 फीसदी हिस्सा प्रदेश के सामान्य ज्ञान से जुड़ा होता है. साथ ही हरियाणा में स्थानीय निवासी होने पर 10 नम्बर का वेटेज मिलता है. लेकिन राजस्थान में लम्बे समय से मांग होने के बाद भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है.

राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं की अगर बात की जाए तो सामान्य श्रेणी में बाहरी राज्यों का कोटा 50 फीसदी निर्धारित है. इसके साथ ही स्थानीय निवासी या फिर भाषा योग्यता का भी कोई नियम निर्धारित नहीं है. जबकि प्रदेश के करीब दो दर्जन ऐसे राज्य हैं जहां पर स्थानीय निवासी, भाषा और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर भी नियम निर्धारित कर रखे हैं.

करीब एक दर्जन राज्यों ने जहां एक ओर भाषा, शैक्षणिक योग्यता और स्थानीय निवासी होने को आधार बनाया है. वहीं एक दर्जन ऐसे राज्य हैं जहां पर भाषा के साथ ही स्थानीय बेरोजगार होने पर कई नियम लागू किए गए हैं. इसके साथ ही अगर बात की जाए मध्यप्रदेश में जहां मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कोटा निर्धारित करने की घोषणा की. लेकिन राजस्थान में अभी तक ना को इसको लेकर कोई विचार किया गया है और ना ही किसी प्रकार के नियमों पर चर्चा की जा रही है. 

राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ अध्यक्ष उपेन यादव का कहना है कि 'बाहरी राज्यों का कोटा निर्धारण को लेकर पिछले 3 सालों से संघर्ष किया जा रहा है. पहले जहां पूर्वी बीजेपी सरकार से इस संबंध में वार्ता की थी तो वहीं एक साल से वर्तमान कांग्रेस सरकार के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है'.

पिछले दिनों राजस्थान की दो बड़ी भर्तियों की अगर बात की जाए तो विद्युत विभाग ने वर्ष 2018 में 108 पदों पर जेईएन भर्ती निकाली थी. जब इन भर्तियों को पूरा कर नियुक्ति दी गई तो सामने आया की इन 108 पदों में से 81 पदों पर बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई है. वहीं पीटीआई की दूसरी भर्ती की बात की जाए तो करीब 23 हजार आवेदनों में से 8 हजार 682 अभ्यर्थी आवेदक ऐसे हैं जो बाहरी राज्यों से हैं.

रोजगार की आस लगाए बैठे बेरोजगारों के हौंसले भी अब टूटने लगे हैं. शिक्षक भर्ती तैयार कर रहे प्रशांत चौधरी का कहना है कि 'घरवालों के लाखों रुपये खर्च कर रोजगार की तैयारी की जा रही है. लेकिन हर भर्ती में सामने आता है की बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी बाजी मार लेते हैं. ऐसे में सरकार को या तो बाहरी राज्यों का कोटा निर्धारित करे या फिर ऐसा कोई नियम लाए जिससे राजस्थान के बेरोजगारों को लाभ मिल सके.

दूसरी ओर सरकार की अगर बात की जाए तो सरकार कोई सी भी हो बेरोजगारों को सिर्फ आश्वासन ही मिलता है. बाहरी राज्यों के कोटे को लेकर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि 'सत्ता में आने से पहले बेरोजगारों ने इस समस्या से अवगत करवाया था. इसको लेकर सरकार की ओर से कदम भी उठाए जा रहे हैं. इसके साथ ही बाहरी राज्यों ने जो कोटा निर्धारित कर रखा है. उसका भी अध्ययन किया जा रहा है. इसके साथ ही राजस्थान के स्थानीय बेरोजगारों के लिए जो भी उनके हित में होगा वो कदम उठाए जाएंगे.