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राजस्थान में नहीं थमा बाल विवाह का सिलसिला, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ टॉप पर

Seminar on Child Marriage in Rajasthan: राजधानी जयपुर में एक सेमिनार के दौरान बाल विवाह के मुद्दे पर चर्चा हुई.

राजस्थान में नहीं थमा बाल विवाह का सिलसिला, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ टॉप पर
वक्ताओं ने इसे स्कूली पाठ्यक्रम में भी जोड़ने की जरूरत बताई.

जयपुर: राजधानी जयपुर(Jaipur) के पंचायतीराज संस्थान(Panchayati Raj Institute) के कार्यालय में बाल विवाह(Child Marriage), किशोरी गर्भावस्था(Teen Pregnency) और पोक्सो एक्ट(Pocso Act) पर एक दिवसीय सेमिनार(Seminar)का आयोजन हुआ. 

सेमिनार में बोलते हुए राजस्थान हाईकोर्ट(Rajasthan High Court) के जस्टिस संदीप मेहता(Justice Sandeep Mehta)ने कहा कि बाल विवाह(Child Marriage) के आंकड़ों में कमीं आई है, लेकिन अभी भी इसे जड़ से मिटाने के लिए व्यापक रूप से जनजागरूकता (Public Awarness) की आवश्यकता है. 

बाड़मेर की रूमा देवी का दिया उदाहरण
इसके साथ ही उन्होंने बाड़मेर(Barmer) की रूमा देवी(Ruma Devi)का उदाहरण देते हुए कहा है कि रूमा देवी ने दूरदराज गांव की महिलाओं को शिक्षित(Educated) करके उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया. उसी तरह अभी भी कई महिलाएं हैं जो सुदूर बच्चों और महिलाओं के लिए काम कर रही है. ऐसी महिलाओं को जोड़कर गांवों में जनजागरूकता अभियान चलाया जाए. जिससे समाज में बाल विवाह के प्रति जागरूकता आए. 

 

जागरूकता के लिए यह भी जरूरी
इसके साथ ही उन्होंने स्कूली पाठ्यक्रम में भी इसे जोड़ने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में जागरूकता आएगी. 

बच्चियां प्रकृति का अनमोल तोहफा
कार्यक्रम के दौरान बाल संरक्षण आयोग (Child Protection Commission) अध्यक्ष संगीता बेनीवाल (Sangita Beniwal) ने कहा कि बच्चियां ईश्वर का अनमोल तोहफा है. इसे हमें संभालकर रखना चाहिए. 

राजस्थान बने बाल मित्र राज्य
उन्होंने कहा कि राजस्थान (Rajasthan)को बाल मित्र राज्य बनाया जाएगा. इसके लिए अभियान चलाकर बाल मित्र गांव बनाने की शुरूआत की जाएगी. जिसमें शिक्षित बच्चों को जोड़ा जाएगा. 

बेनीवाल ने कहा कि बाल विवाह को खत्म करने के लिए सरकार कृतसंकल्पित है. हम बाल विवाह जैसी कुरीति को मिटाने के लिए एनजीओ(NGO), जनप्रतिनिधियों(Public Representative), समाजसेवियों(Social Worker)का साथ लेकर पंचायत, गांव तक जनजागरूकता अभियान चलाएंगे. 

सेमिनार के दौरान यंग लाइव्स(Young Lives) की कार्यकारी निदेशक रेणु सिंह ने बाल विवाह की जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान में 15-19 आयु वर्ग में 16.2 प्रतिशत बाल विवाह हुए हैं. जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 18.7 और शहरी क्षेत्रों में 7.6 प्रतिशत बाल विवाह दर्ज किए गए हैं. सबसे ज्यादा बाल विवाह भीलवाड़ा(Bhilwara)में 36.4, चित्तौड़गढ़(Chittorgarh)33.1, राजसमंद(Rajsamand) में 26 प्रतिशत हुए हैं. सिंह ने कहा कि सरकार को ऐसे जिलों में जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है. 

सेमिनार में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (National Child Protection Commission) सदस्य यशवंत जैन, बाल संरक्षण आयोग सदस्य सचिव निष्काम दिवाकर सहित अन्य मौजूद रहे.