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राजसमंद: अन्नकूट लूट परंपरा को बंद करने के ऐलान के बाद मचा बवाल, शहर का माहौल गरमाया

मंदिर वालो का मानना है कि अन्नकूट लूटने वाले आदिवासी समाज के लोग अन्नकूट लूटने के बाद महाप्रसादी को सड़क नाली में डाल देते हैं, जिससे मंदिर की आस्था को ठेस पहुंच रही है.

राजसमंद: अन्नकूट लूट परंपरा को बंद करने के ऐलान के बाद मचा बवाल, शहर का माहौल गरमाया

राजसमंद: कांकरोली वैष्णव सम्प्रदाय की तृतीय पीठ द्वारिकाधीश मंदिर में अन्नकूट लूट की परंपरा को अगले वर्ष से बंद कर देने के ऐलान के बाद शहर में माहौल गरमा गया है. शहरवासी द्वारिकाधीश मंदिर जाकर मंदिर अधिकारी और सेवादारों से इस विषय में तक़रार कर रहे हैं. 

मंदिर प्रशासन की ओर से अन्नकूट लूट महोत्सव को अचानक बंद करने के लिये गए आदेश को पुनः वापस लेने की मांग की जा रही है. लोगों का कहना है कि 300 साल से चली आ रही अन्नकूट लूट की परम्परा हमारे लिए आस्था का सवाल हैं. इस परंपरा को एकाएक मंदिर पीठाधीश्वर के आदेश से बंद कर देना न्यायोचित नहीं है.

मंदिर वालो का मानना है कि अन्नकूट लूटने वाले आदिवासी समाज के लोग अन्नकूट लूटने के बाद महाप्रसादी को सड़क नाली में डाल देते हैं, जिससे मंदिर की आस्था को ठेस पहुंच रही है. हम लूटने वाले समाज की हर बात स्वीकार करते हैं, लेकिन वो ठाकुरजी के प्रसाद का अनादर करते हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंदिर वालो ने अगली दीपावली पर अन्नकूट लूटने की परम्परा को बंद करने का फैसला किया है. 

वहीं अन्नकूट लूटने वाले आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि अन्नकूट में ठाकुरजी के आगे लगाए गए 56 भोग को हमे लूटने नहीं दिया जाता, जबकि सिर्फ चावल ही हमको दिया जाता है. अन्नकूट लूटने का हक हमारा है, जो हमे मिलना चाहिए.