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रीतम शर्मा बनीं शेखावटी की सबसे छोटी कथावाचिका, बचपन से है ठाकुर जी से खास लगाव

वो तीन दिन के 'नानी बाई रो मायरो' की कथा सुना रही हैं. जिसमें ठाकुरजी के चमत्कारों और उनके संदेश का वर्णन वो अपने शब्दों में और सुरीली राजस्थानी भाषा में करती हैं. 

रीतम शर्मा बनीं शेखावटी की सबसे छोटी कथावाचिका, बचपन से है ठाकुर जी से खास लगाव
रीतम ने अजाड़ी कलां, नूआं और गुढ़ागौडज़ी में भी कथा का आयोजन किया है.

झुंझुनूं/ संदीप केड़िया: छोटी थी, तो घर में ठाकुरजी की सेवा करती थी. माता-पिता के साथ आरती करने से लेकर पूजा करने तक हर काम में साथ रहती थी. अब उसे ठाकुरजी इतने प्यारे लगने लगे की उनकी महिमा को बताने के लिए निकल पड़ी है 20 साल की रीतम शर्मा. झुंझुनूं की रहने वाली रीतम शर्मा शेखावाटी की पहली और सबसे छोटी कथावाचिका बन गई हैं. 

वो तीन दिन के 'नानी बाई रो मायरो' की कथा सुना रही हैं. जिसमें ठाकुरजी के चमत्कारों और उनके संदेश का वर्णन वो अपने शब्दों में और सुरीली राजस्थानी भाषा में करती हैं. फिलहाल उनकी कथा झुंझुनूं मुख्यालय पर चल रही है. जी न्यूज से बातचीत करते हुए रीतम शर्मा ने बताया कि छोटी उम्र से ही ठाकुरजी अच्छे लगते हैं इसलिए अब नानी बाई रो मायरो की कथा कह रही हैं. 

उन्होंने बताया कि युवा वर्ग अब मोबाइल के कारण हर चीज से दूर होता जा रहा है. वो चाहती हैं कि युवा वर्ग आध्यात्म के साथ जुड़ें. इसलिए वो महिलाओं के साथ-साथ युवाओं को कथा से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं. इससे पहले रीतम ने अजाड़ी कलां, नूआं और गुढ़ागौडज़ी में भी कथा का आयोजन किया. 

रामलीला मैदान में चल रही है कथा
झुंझुनूं में भारतीय कला मंदिर एवं दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में चूणा चौक स्थित रामलीला मैदान में तीन दिवसीय नारी बाई रो मायरो कथा का आयोजन किया जा रहा है. इस कथा में राजस्थानी भाषा में जानी मानी कथावाचक सुश्री रीतम शर्मा ने मायरो की कथा सुना रही हैं. 

कथा के दूसरे दिन रीतम ने कहा कि संत की प्रवृत्ति हमेशा कल्याणकारी होती है लेकिन सच्चा संत वही होता है जो जन कल्याण में लगा रहता है. साथ ही उन्होंने श्रद्धालु महिलाओं को गरीबों की सेवा करने का आह्वान किया. इस दौरान सजीव झांकी और सुमधुर संगीत मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे. 

स्कूल-कॉलेज में भी रही टॉपर, पर भक्ति नहीं छोड़ी
अक्सर पढ़ाई के चक्कर में युवा हर काम को छोड़ देते हैं लेकिन रीतम ने कभी भी पढ़ाई के साथ-साथ ठाकुरजी की भक्ति को नहीं छोड़ा. फिलहाल वो एमए प्रीवियस की छात्रा हैं लेकिन इससे पहले उन्होंने जब सीनियर सैकंडरी और बीए की परीक्षा पास की तो वो भी फस्ट डिवीजन से पास किया.