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पुलिस कस्टडी में हुई RTI एक्टिविस्ट की मौत मामले में थानाधिकारी समेत 10 के खिलाफ मामला दर्ज

इधर पुलिस ने युवक की मौत के बाद रोज नामचे में मृतक के शरीर पर पूर्व में ही गंभीर चोटें होने की बात कही. जिसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए.

पुलिस कस्टडी में हुई RTI एक्टिविस्ट की मौत मामले में थानाधिकारी समेत 10 के खिलाफ मामला दर्ज
फाइल फोटो

भूपेश आचार्य, बाड़मेर: बाड़मेर जिले के पचपदरा थाने में हिरासत में एक युवक की मौत का मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं अब पुलिस अधिकारी भी मामले को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं. पूरे घटनाक्रम के बाद एसपी शरद चौधरी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पचपदरा थानाधिकारी सरोज चौधरी को निलंबित कर दिया. वहीं पूरे थाने के स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया है. साथ ही पुलिस ने मृतक जगदीश की मां वरजू देवी की रिपोर्ट के आधार पर थानाधिकारी समेत 10 के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है.

दरसअल, बीते शनिवार को सराणा गांव में जमीन विवाद के बाद पचपदरा पुलिस ने शांति भंग के आरोप में तीन युवकों को हिरासत में लिया था. रात भर लॉकअप में रखने के बाद रविवार सुबह सभी आरोपियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना था. इस दौरान आरोपी जगदीश गोलिया की तबीयत अचानक बिगड़ गई. पुलिस का कहना है कि तबीयत बिगड़ने पर जगदीश को नाहटा अस्पताल ले जाया गया. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इधर पुलिस ने युवक की मौत के बाद रोज नामचे में मृतक के शरीर पर पूर्व में ही गंभीर चोटें होने की बात कही. जिसके बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए. साथ ही दोषी पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग करते हुए थाने के बाहर शव रख कर प्रदर्शन किया था. माहौल गर्माता देख शहर एसपी ने मोर्चा संभाला. जिसके बाद शव का अंतिम संस्कार करन के लिए परिजन राजी हुए.

आपको बता दें कि बीते शनिवार को मारपीट की घटना के बाद पचपदरा पुलिस ने शाम को पचपदरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में युवक की मेडिकल जांच करवाई थी. रात को जगदीश गोलिया की तबीयत खराब होने लगी, लेकिन पुलिस ने कोई सुध नहीं ली. वहीं अगले दिन पुलिस उसे अस्पताल ले जाने की बजाय जमानत पर पेश करने के लिए लेकर गई. जहां कराहते युवक को देख तहसीलदार ने तुरंत उपचार करवाने के लिए भेजा. लेकिन जब तक उसे अस्पताल पहुंचाया जाता तब तक उसकी मौत हो गई थी.

गौरतलब है कि एक तरफ तो सरकार मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून बना रही है. वहीं प्रदेश की कानून व्यवस्था खुद कटघरे में खड़ी है. प्रदेश में बढ़ते क्राइम ग्राफ और पुलिस थानों में आरोपियों की हो रही मौत के मामलों ने लोगों में सुरक्षा की भावना को कमजोर कर दिया है.

-- पूजा शर्मा, न्यूज डेस्क