close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जोधपुर: कंप्यूटर के जमाने में भी जमकर बिक रहा है पारंपरिक बही खाता

महालक्ष्मी का पर्व दीपावली(Deepawali) नजदीक आने के साथ ही बाजारों में रौनक छाई हुई है. जहां विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों(Electronic Applinaces) को खरीदने के लिए बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी है.

जोधपुर: कंप्यूटर के जमाने में भी जमकर बिक रहा है पारंपरिक बही खाता
जोधपुर में बिक्री के तैयार पारंपरिक बही खाता.

अरुण हर्ष, जोधपुर: महालक्ष्मी का पर्व दीपावली(Deepawali) नजदीक आने के साथ ही बाजारों में रौनक छाई हुई है. जहां विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों(Electronic Applinaces) को खरीदने के लिए बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी है. इसके अलावा दुकानदार वर्षों से पारंपरिक बही खातों में हिसाब रहने वाले भी नई बहिया डालने की तैयारी कर रहे है. ऐसे व्यापारियों के लिए बही खाते बनाने वाले दीपावली से 1 महीने पहले ही इस कार्य में लग जाते हैं. 

जानिए दीपावली में क्या है परंपरा
पुरानी परंपरा है कि दीपावली के दिन बही खातों की पूजा की जाती है और उसमे सारा लेन देन लिखा जाता है और यह बहिया सालों साल से बदली जा रही है. 

सौ बकिया और 1 लिखिया...
मारवाड़ी में एक कहावत होती है सौ बकिया और 1 लिखिया, यानी कि मुंह से कहने से कुछ नहीं होता है जो बही में लिखा होता है वही सच्चा होता है. इसलिए हिसाब किताब के लिए बहियों का उपयोग आज भी बदस्तूर जारी है.

आधुनिकता के दौर में भी...
एक और आधुनिकता के इस दौर में जहां कंप्यूटर के द्वारा बड़ी से बड़ी फाइलें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर कर सकते हैं. वहीं, कंप्यूटर और मोबाइल में वायरस आने से फाइल करप्ट होने का अंदेशा रहता है और कई बार हैकर कंप्यूटर मोबाइल और खातों को हैक कर लेते हैं. 

बड़े उद्योगपति आज भी निभा रहे हैं परंपरा
लेकिन हाथों से लिखी गई बही को कोई चुरा नहीं सकता और यही कारण है कि आज भी देशभर में बड़े से बड़े उद्योगपति कंप्यूटर के साथ-साथ बही खातों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसके कारण बही खातों को बनाने वाले कारीगरों को और व्यापारियों को रोजगार भी मिल रहा है और व्यापारियों का हिसाब किताब भी सुरक्षित माना जाता है.