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गांधी जयंती पर सत्यनारायण ने चूरू में शुरू की शराबबंदी की मुहिम, कई साल पहले लिया था संकल्प

चूरू जिले के सरदारशहर निवासी सत्यनारायण झांझरिया महात्मा गांधी के शराबबंदी के सपने को सच करने के लिए लगातार कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं. 

गांधी जयंती पर सत्यनारायण ने चूरू में शुरू की शराबबंदी की मुहिम, कई साल पहले लिया था संकल्प
प्रतीकात्मक तस्वीर

नरेन्द्र राठौड़, सरदारशहर: पूरा देश आज महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है.  देशभर में जगह-जगह अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से महात्मा गांधी को याद किया जा रहा है. महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के साथ साथ शराब के खिलाफ भी बड़ी लड़ाई लड़ी थी. इसी के तहत महात्मा गांधी ने करीब सौ साल पहले चंपारण में किसानों पर अत्याचार को लेकर अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया था. 

साथ ही शराबबंदी के खिलाफ भी मुहिम छेड़ी थी. महात्मा गांधी का मानना था कि शराब आत्मा और शरीर दोनों का नाश करती है लेकिन महात्मा गांधी का शराबबंदी को लेकर सपना आज भी सपना ही है. बिहार और गुजरात से राज्य ने जरूर महात्मा गांधी के सपने को साकार करने के लिए अपने राज्य में शराबबंदी की है. वहीं राजस्थान में अब तक 4 ग्राम पंचायतों में शराबबंदी हो चुकी है.

चूरू जिले के सरदारशहर निवासी सत्यनारायण झांझरिया महात्मा गांधी के शराबबंदी के सपने को सच करने के लिए लगातार कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं. इसी के तहत झांझरिया ने जून 2016 में आबकारी अधिकारी को पत्र लिखकर अपने गांव फोगां  मे बिक्री होने वाली शराब की जानकारी मांगी तो बताया गया कि फोगां में एक वर्ष में 55 लाख रुपये की शराब बेची जाती है. तो तुरन्त आबकारी विभाग को गांव से ठेका बन्द करने की अपील की और लगभग 3 वर्ष के कठोर प्रयत्नों के बाद पूरे गांव को शराबबंदी के लिए तैयार किया और SDM सरदारशहर की देख रेख मे चुनाव करवाया गया जिस मे 64% वोट पोल हए जिस में 94% वोट ठेका बन्द करवाने के पक्ष में पड़े और अंतोग्तवा गांव से हमेशा हमेशा के लिए ठेका बन्द हो गया. इस समय सरदारशहर तहसील की 7 पंचायते बन्धनाऊ, शिमला, ढाणी पांचेर, जयसंगसर, रिबिया, खंडवा और रोलासर अभी प्रक्रिया अधीन है.

सत्यनारायण झांझरिया महात्मा गांधी के शराबबंदी आंदोलन से इतने प्रभावित हुए कि 19 वर्ष BSF मे सेक्शन कमांडर तथा 8 वर्ष गृह मंत्रालय भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर सर्विस करने के बाद स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति लेकर शराबबंदी के आंदोलन में  जुड़ गए. झांझरिया ने अपने गांव फॉगां को सबसे पहले शराब मुक्त करवाया. झांझरिया महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर पूरे चूरू जिले की 170 ग्राम पंचायतों को खत लिखकर उनकी ग्राम पंचायत में होने वाली शराब की खपत और पैसे का आय-व्यय का ब्यौरा देखकर अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में शराबबंदी करने के लिए आगे आने का आह्वान किया है. 

सत्यनारायण झांझरिया ने कहां कि महात्मा गांधी का मानना था कि शराब के चलते महिलाओं पर अत्याचार बढ़ते हैं. साथ ही परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर होती है. शराब एक अभिशाप है. इसे बंद होना चाहिए. उन्होंने शराब के अनेकों दुष्परिणाम बताएं और एक लंबी लड़ाई शराबबंदी के लिए लड़ी. इसके लिए महात्मा गांधी को चंपारण ने महात्मा नाम दिया. 

आज पूरा विश्व महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है. महात्मा गांधी के सत्य अहिंसा के सिद्धांत का पूरे विश्व में लोहा माना. शराबबंदी के आंदोलन को साकार करने का समय आ गया है. इसलिए महात्मा गांधी के सपने को साकार करने के लिए हम ने पहले अपने गांव से शराब बंदी करवाई और अब चूरु जिले कि हम तमाम ग्राम पंचायतों में शराब बंदी के लिए लड़ाई लड़ेंगे और फिर राजस्थान में शराबबंदी करवाएंगे तभी जाकर हम महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे.