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पंचायत चुनाव पर ममता सरकार को 'सुप्रीम झटका', हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने काफी अहम फैसला दिया है

पंचायत चुनाव पर ममता सरकार को 'सुप्रीम झटका', हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव न होने वाली सीटों पर नतीजों का ऐलान न किया जाए

महेश गुप्ता, नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने काफी अहम फैसला दिया है. ताजा जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा है कि चुनाव न होने वाली सीटों पर नतीजों का ऐलान न किया जाए. आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की. आयोग ने अपनी याचिका में कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे प्रत्याशियों द्वारा ऑनलाइन दाखिल किए गए नामांकन पत्रों को स्वीकार करने को कहा गया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया.

3 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
जी हां, यह मामला पंचायत चुनाव में ईमेल से भेजे नामांकन को स्वीकृति देने का है. ई-नामांकन पर कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षकारों को नोटिस भी जारी किया है. मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी. आपको बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में ईमेल से भेजे नामांकन को स्वीकृति दी थी. कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

इन सीटों पर नहीं घोषित होंगे नतीजे
आपको बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव अपने तय तारीख 14 मई को होगा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन सीटों पर निर्विरोध उम्मीदवार हैं वहां के नतीजे फिलहाल घोषित नहीं होंगे. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी की टीएमसी को ही लगेगा क्योंकि उसके ऐसे कई उम्मीदवार हैं.

निर्विरोध जीते थे टीएमसी उम्मीदवार
आपको बता दें कि तृणमूल कांग्रेस ने बीरभूम जिला परिषद की 42 में से 41 सीटों पर जीत हासिल कर ली है. पंचायत चुनाव से पहले ही टीएमसी ने बीरभूम पंचायत समिति की भी 19 में से 14 सीटों को निर्विरोध जीत लिया है. इसी तरह मुर्शिदाबाद के किंडी में भी टीएमसी ने 30 में से 29 और भरतपुर-2 में सभी 21 पंचायत समितियों पर जीत हासिल कर ली है. बुर्वान में भी सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार सभी 37 पंचायत समितियों की सीटों पर निर्विरोध विजेता घोषित कर दिए गए हैं.

विपक्ष बोला था- उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोका
टीएमसी की इस एकतरफा जीत से विपक्ष का खासा नाराज है. उन्होंने पार्टी पर चुनावों में धांधली का आरोप लगाने के साथ ही दूसरे पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ने देने की बात कही. बीजेपी और सीपएम नेताओं का कहना था कि उनके उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोका गया. सीपीएम विधायक सुजन चक्रवर्ती ने यहां तक कह दिया था कि ये जीत टीएमसी ने इन सीटों को जीता नहीं बल्कि गलत तरीके से कब्जा कर लिया है. हालांकि टीएमसी ने इस बात को गलत ठहराया था और कहा था कि विपक्षी दलों के पास कोई जनाधार ही नहीं है इस वजह से वे एक उम्मीदवार तक नहीं खोज पाए.