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उदयपुर के वैज्ञानिकों ने किया कमाल, इजाद की मक्का और मुंगफली की चार नई किस्म

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दस साल की कड़ी मेहनत के बाद मक्का और मुंगफली की चार हाईब्रीड किस्मों को विकसित किया है. जिनका उपयोग कर के किसान अपने उत्पादन को बढ़ा सकते है.

उदयपुर के वैज्ञानिकों ने किया कमाल, इजाद की मक्का और मुंगफली की चार नई किस्म
वैज्ञानिकों ने मक्का की तीन और मूंगफली की एक नई किस्म का आविष्कार किया है.

अविनाश जगनावत/उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अथक प्रयास से मक्का और मुंगफली की चार नई किस्मों को इजाद किया है. जिससे किसान अपने खेतों से अब दस प्रतिशत से चार गुना तक अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेगें.

केन्द्र और राज्य सरकार किसानों के जिवन स्तर का उचा उठाने और उनकी आमदनी को दुगना करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. लेकिन जब तक किसानों को नवीनतम तकनीक की जानकारी नहीं होगी तब तक सरकार अपने मकसद में पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकती है. इसी को लेकर उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक बडी सफलता प्राप्त की है.

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दस साल की कड़ी मेहनत के बाद मक्का और मुंगफली की चार हाईब्रीड किस्मों को विकसित किया है. जिनका उपयोग कर के किसान अपने उत्पादन को बढ़ा सकते है. विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक अभय कुमार मेहता ने बताया कि वैज्ञानिकों ने मक्का की तीन और मूंगफली की एक नई किस्म का आविष्कार किया है. जिसमें प्रताप राज संकर मक्का 1095 रबी, प्रताप क्यूपीएम 5, प्रताप राज संकर मक्का 1095 और प्रताप मुंगफली 3 को शामिल किया गया. 

वैज्ञानिकों की ओर से विकसित की गई इन चारों नई किस्मों में किडे लगने की बहुत कम संभावनाएं है. वहीं, पूर्व में विकसित की गई किस्मों की कमियों को भी दूर करने में वैज्ञानिक सफल रहे है. जिससे अब किसानों को अपने खेत से अधिक पैदावार लेने में सफलता मिलेगी,

विश्वविद्यालय अनुसंधान निदेशालय के निदेशक मेहता की माने तो नई विकसित की गइ्र किस्मों से सामान्य स्थिति में किसान करीब दस प्रतिशत अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकेगें. साथ ही, संभाग के गर्म इलाकों में रबी के मौसम में मक्का की फसल की पैदावार को चान गुना तक बढ़ाया जा सकेगा. जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलने की संभावना है. उन्होने कहा कि रिसर्च में मिले बेहतर परिणामों के बाद चारों किस्मों को राज्य सरकार से अनुशंसा के लिए भेज दिया गया है. प्रदेश सरकार से अनुमति मिलने पर यह किस्में किसानों को उपलब्ध करा दी जाएगी.

बहरहाल, उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की ओर से किया गया यहा प्रयास बेहद सराहनीय है. जिससे किसानों को आमदनी बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही सरकारों को भी अपना लक्ष्य प्राप्त करने की सफलता मिलेगी. साथ ही किसानों के जीवन स्तर भी उंचा उठ पाएगा. ऐसे में अब जरूरत है कि देश के वैज्ञानिक और भी इस तरह की किस्मों को विकसित करें जिससे किसानों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाया जा सके.