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राज्यों के लिए महंगी हुई केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों की सुरक्षा, जानिए कैसे?

राज्यों को मिलने वाली केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों(Central Armed Security Forces) की सुरक्षा महंगी हो गई है. दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बलों और रेपिड एक्शन फोर्स (Rapid Action Force) के डिप्लॉयमेंट की विकास शुल्क दर तय कर दी है. मंत्रालय ने अगले पांच साल तक के लिए दस प्रतिशत बढोत्तरी के साथ शुल्क तय किया है. बढ़ा हुआ शुल्क इसी महीने से लागू होगा. इस संबंध में राजस्थान (Rajasthan)सहित सभी राज्यों के मुख्य सचिवों(Chief Secretary) को पत्र लिखा जा चुका है.

राज्यों के लिए महंगी हुई केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों की सुरक्षा, जानिए कैसे?
इस संबंध में राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा गया है. (फाइल फोटो)

विष्णु शर्मा, जयपुर: राज्यों को मिलने वाली केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों(Central Armed Security Forces) की सुरक्षा महंगी हो गई है. दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सशस्त्र बलों और रेपिड एक्शन फोर्स (Rapid Action Force) के डिप्लॉयमेंट की विकास शुल्क दर तय कर दी है. मंत्रालय ने अगले पांच साल तक के लिए दस प्रतिशत बढोत्तरी के साथ शुल्क तय किया है. बढ़ा हुआ शुल्क इसी महीने से लागू होगा. इस संबंध में राजस्थान (Rajasthan)सहित सभी राज्यों के मुख्य सचिवों(Chief Secretary) को पत्र लिखा जा चुका है.

आपको बता दें कि किसी भी राज्य में कोई भी अप्रिय स्थिति, बड़ा आंदोलन, चुनाव या फिर कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी स्थिति में राज्य पुलिस के सहयोग के लिए समय समय पर केंद्र से सशस्त्र बल कम्पनियां बुलाई जाती है. वहींं, कंपनियों की तैनातगी के लिए राज्य सरकारों को भी निश्चित दर से भुगतान करना होता था. वर्ष 2018-19 तक सशस्त्र बलों की तैनातगी की दरें निश्चित थी. लेकिन पिछले दिनों सशस्त्र बलों के डिप्लोयमेंट चार्जेज को तर्कसंगत बनाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्रालय में समीक्षा की गई. इस समीक्षा के दौरान तय किया गया कि अगले पांच साल तक सशस्त्र बलों की 7 कम्पनियों की बटालियन के विकास शुल्क दर वसूली जाएगी.

हर साल बढ़ेगा करीब दस प्रतिशत शुल्क
केंद्रीय गृह मंत्रालय में समीक्षा के दौरान हर साल करीब 10 प्रतिशत शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया गया है. जिसके तहत एक सीपीएफ बटालियन सामान्य क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 13.70 करोड़, वर्ष 2020-21 में 15.40 करोड़, वर्ष 2021-22 में 17.36 करोड़, वर्ष 2022-23 में 19.65 करोड़ और साल 2023-24 में 22.30 करोड़ होगा. वहीं एक सीपीएफ बटालियन हाईरिस्क क्षेत्र में क्रमश: 34.26 करोड़, 35.96 करोड़, 37.93 करोड़, 40.21 करोड़ और 42.46 करोड़ हो जाएगा. इसी के साथ एक सीपीएफ बटालियन मोडरेट हार्डशिप क्षेत्र में आगामी वित्तीय वर्षों में 25.18 करोड़, 26.88 करोड़, 28.85 करोड़, 31.13 करोड़ और 33.78 करोड़ के क्रम में वृद्धि होगी.

आपके बता दें कि विकास शुल्क दर तय करने के साथ ही सशस्त्र बलों की तैनातगी के लिए अन्य शर्तें भी लगाई गई है. इनमें केंद्र शासित प्रदेशों को विकास शुल्क से छूट दी गई है. वहीं, राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र बल की टुकड़ियों के लिए उपयुक्त और पर्याप्त सुविधाएं जैसे पानी, बिजली की आपूर्ति आदि का खर्च वहन करना होगा. केंद्रीय सशस्त्र बल के जवानों की तैनाती शुल्क राज्य सरकारों से वसूल नहीं किया जाएगा, यदि उन्हें अस्थायी रूप से 10 दिन से अधिक की अवधि के लिए तैनात किया जाएगा. वहीं अगर तैनाती की अवधि 10 दिन से अधिक हो जाती है, तो तैनाती की लागत पहले 10 दिनों की अवधि सहित पूरी अवधि के लिए वसूल की जाएगी. राज्य सरकार संबंधित केंद्रीय सशस्त्र बल के बिलों का भुगतान साल की तिमाही तक करेगा, ऐसा नहीं होने पर ढाई प्रतिशत पेनल्टी चुकानी होगी.

Pooja Sharma, News Desk