शिवसेना ने सामना में लिखा, 'वजनदार विभाग बना मंत्रालय का नया अंधविश्वास'

शिवसेना ने अपनी सरकार के नेताओं पर चुटकी लेते हुए लिखा है कि पहले नेता विधायक या सांसद बनने का सपना देखते हैं, फिर मंत्री बनने का और फिर वजनदार या मलाईदार विभाग मिलने का.

शिवसेना ने सामना में लिखा, 'वजनदार विभाग बना मंत्रालय का नया अंधविश्वास'

मुंबई: महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी सरकार में मंत्रिमंडल का विस्तार हो चुका है. लेकिन वजनदार विभाग को लेकर चल रहे झमेले से सरकार बच नहीं पाई. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में विभागों के बंटवारे को लेकर तंज कसा है. शिवसेना ने अपनी सरकार के नेताओं पर चुटकी लेते हुए लिखा है कि पहले नेता विधायक या सांसद बनने का सपना देखते हैं, फिर मंत्री बनने का और फिर वजनदार या मलाईदार विभाग मिलने का. सामना के संपादक संजय राउत ने एक नेता का नाम लेते यह संदेश देने की कोशिश की है कि ऐसे कितने नेता जिन्होंने शपथ लेने के बाद यह कहा, 'कोई भी विभाग दे दीजिए मैं जिम्मेदारी से निभाऊंगा?' 

शिवसेना ने सामना में लिखा, 'महाराष्ट्र में आखिरकार मंत्रिमंडल का विस्तार हो ही गया परंतु सरकार विभागों के बंटवारे के झमेले से खुद को मुक्त नहीं कर पाई. गुरुवार की शाम तक तो विभागों का बंटवारा नहीं हुआ था. ये  शुक्रवार को होगा, ऐसा अंतत: शरद पवार को कहना पड़ा. हमारे राजनीतिज्ञ पहले विधायक या सांसद बनने का सपना देखते हैं. बाद में उन्हें मंत्री बनना होता है. फिर मंत्री बनने पर विभाग भी ‘वजनदार’ अथवा ‘मलाईदार’ चाहिए होता है.  मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान विधायक बच्चू कडू मिलने आए. उन्होंने कहा मुझे कौन सा भी विभाग दे दीजिए मैं अच्छा उसमे अच्छा काम  करके दिखाऊंगा.  

....बच्चू कडू की तरह कितने मंत्रियों को ऐसा लगता है.'

गृह विभाग
शिवसेना ने गृह मंत्रालय को लेकर लिखा, 'गृह विभाग मतलब सरकार की नाक, कान, आंख, कानून और व्यवस्था बनाए रखने से ज्यादा यह विरोधियों पर अंकुश लगाने के लिए इस्तेमाल होता है, यह घातक है. पिछली सरकार ने पांच वर्षों में इससे अलग कुछ नहीं किया. आर.आर. पाटील जैसा आदर्श स्थापित करने वाला नेता आज किसी भी पार्टी में नहीं है. वर्दीवालों का विभाग गर्दी जुटाने भर के लिए शेष रह गया है.

कृषि विभाग
शरद पवार के बाद केंद्र में जानकार कृषि मंत्री नहीं मिला. महाराष्ट्र में कृषि विभाग के लिए आज भी योग्य व्यक्ति नहीं है. किसानों पर भाषण, चिंता सभी व्यक्त करते हैं लेकिन ‘मुझे कृषि विभाग दो. मैं किसानों में जाकर काम करता हूं.’ ऐसा कहनेवाले नहीं बचे हैं. शरद पवार ने मनमोहन सिंह से मंत्रिमंडल में कृषि विभाग मांगकर लिया था तथा अगले 10 वर्षों में उन्होंने वहां अपनी पहचान कायम की. महाराष्ट्र में ऐसा कोई नहीं करेगा.वित्त और कृषि विभाग एक ही मंत्री के पास रहे तथा इन दोनों विभागों के संयोग से किसानों का हित साधा जाए, ऐसा विचार मैं हमेशा व्यक्त करता हूं.

विरोधियों की अग्नि
भाजपा विरोध की अग्नि से महाराष्ट्र की सरकार पैदा हुई है. मुख्यमंत्री जब लोक नेता होता है तब राजशिष्टाचार, अधिकार, पद की सीमा से परे जाकर काम करता है. वसंददादा पाटील  इसके उदाहरण हैं.  फडणवीस के दौर में मंत्रालय में नायलॉन की जालियां लगवाई गईं. त्रस्त और निराश लोग आत्महत्या का प्रयास करें तो उनकी जान न जाए, ये इसके पीछे का सद्विचार था. उन जालियों को नए मुख्यमंत्री को निकालना चाहिए....

...अपने राज्य में कोई भी मंत्रालय आत्महत्या करने के लिए नहीं आएगा, ऐसा विश्वास सरकार ने निर्माण किया तो ही राज्य में नई ऊर्जा का निर्माण होगा.सरकार बदल गई फिर भी मंत्रालय में दलालों की टोली वही रहती है. मुख्यमंत्री समझदार हैं लेकिन उन्हें सावधान रहना होगा.* *छत्रपति शिवराय के नाम से ये सत्ता आई है.

5 साल सरकार टिकेगी!
महाराष्ट्र सरकार टिकी रहे, ऐसी देश की बहुसंख्य जनता की इच्छा है. *भजपा के साथ शिवसेना नही गई इसीलिए राष्ट्रवादी और कांग्रेस पार्टी को सत्ता मिली, नही तो आनेवाले 25 साल तक वे विपक्ष में बैठे रहते. सत्ता गुड़ की ढेली जैसी होती है.

पवार का धमाका और 602
सत्ता के जरिए जो पार्टी को मजबूत करेगा, वही अगले चुनाव में बाजी मारेगा. कुछ वर्षों से मंत्रियों ने मंत्रालय में आना कम कर दिया. मंत्री मंत्रालय में बैठेंगे नहीं तो लोग अपनी समस्याएं  लेकर जाएंगे कहां? शिवसेना को सबसे ज्यादा ध्यान संगठनात्मक कार्यों पर देना पड़ेगा. 63 से 56 पर पहुंच चुकी शिवसेना के समक्ष चुनौती बड़ी है. मंत्रालय की छठीं मंजिल पर 602 नंबर का रूम फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है. मुख्यमंत्री के कार्यालय से सटे इस कक्ष को कोई भी मंत्री लेने को तैयार नहीं है क्योंकि यह जगह अपशकुनी व मंत्र-तंत्र से अभिशप्त है, ऐसा लोगों का अंधविश्वास है. मंत्रालय की छठीं मंजिल पर सभी को पहुंचना है लेकिन ‘602’ रूम की छाया नहीं पड़नी चाहिए.

अंधविश्वास के विरोध में कानून बनानेवाले महाराष्ट्र की ऐसी  मानसिकता है. ठाकरे परिवार अंधश्रद्धा नहीं मानता है. देवेंद्र फडणवीस ‘602’ नंबर कक्ष में नहीं बैठे थे फिर भी वे चले गए . उद्धव ठाकरे की सरकार 5 साल नहीं टिकेगी, यह विपक्ष का अंधविश्वास है. ‘602’ की अंधश्रद्धा ऐसी ही है. महाराष्ट्र में यह नहीं चलेगा.