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'तरुण भारत' ने संजय राउत-उद्धव की जोड़ी को बताया बिक्रम बेताल, शिवसेना नेता बोले, 'मैं ऐसे अखबार पढ़ता ही नहीं'

अपने संपादकीय में तरुण भारत ने बिना नाम लिए शिवसेना नेता और सामना के सम्पादक संजय राउत को एक जोकर बताया है.

'तरुण भारत' ने संजय राउत-उद्धव की जोड़ी को बताया बिक्रम बेताल, शिवसेना नेता बोले, 'मैं ऐसे अखबार पढ़ता ही नहीं'
फोटो- सोशल मीडिया

मुंबई: महाराष्ट्र में पार्टी समर्थक अखबारों के बीच भी सरकार निर्माण को लेकर युद्ध छिड़ गया है. अब तक शिवसेना की तरफ से सामना (Saamana) अखबार बीजेपी पर हमला बोलता था, अब जवाब में बीजेपी समर्थक अखबार 'तरुण भारत' ने शिवसेना (Shiv Sena) पर हमला बोल दिया है. अपने संपादकीय में तरुण भारत (Tarun Bharat) ने बिना नाम लिए शिवसेना नेता और सामना के सम्पादक संजय राउत (Sanjay Raut) को एक जोकर बताया है. साथ ही बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे और संजय राउत की जोड़ी को विक्रम-बेताल की जोड़ी करार दिया है. 

तरुण भारत के लेख पर संजय राउत ने कहा, 'अगर तरुण भारत मे कुछ आया है, तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है...क्योंकि मैं ऐसे अखबार नहीं पढ़ता और मुख्यमंत्री तो कोई अखबार नहीं पढ़ते हैं.'

अपने संपादकीय में तरुण भारत ने लिख है, 'पुराणों में हमने विक्रम और बेताल की कई कहानियां सुनी हैं. आज महाराष्ट्र, उद्धव और 'बेताल' की कहानी देख-सुन रहा है. लेकिन राज्य में दो-तिहाई किसान प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित हैं और उनका दुख और दर्द अहंकार के घेरे में फंसा हुआ है. महाराष्ट्र कभी भी शिवसेना को माफ नहीं करेगा.ये दावा करते हैं कि भाजपा को 105 सीटें मिलीं, क्योंकि शिवसेना इसके साथ थी. अन्यथा, भाजपा को 70 सीटें मिल जातीं. कल, भाजपा ने कहा कि शिवसेना को 56 सीटें मिलीं, क्योंकि भाजपा उसके साथ थी, अन्यथा उसे 20 भी नहीं मिलते, तो क्या?'

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तरुण भारत ने आगे लिखा, 'आप (शिवसेना) अपमानजनक और असभ्य तरीके से बोलने में सक्षम होने के बावजूद 'झूठ और झूठ' का समर्थन कैसे कर सकते हैं? आप उन लोगों से कैसे उम्मीद करते हैं, जिनके पास रोज़ाना लेख और ट्वीट लिखने, 9 बजे चैनलों को इंटरव्यू देने साक्षात्कार करने और फिर पूरे दिन इंटरव्यू देते रहते हैं, यह 'विदूषक' रोज सुबह उठता है. हिंदी शेरो-शायरी ट्वीट पर करता है, खबरों को प्लांट करता है लेकिन महाराष्ट्र जैसे राज्य चलाने के बीच के फर्क को समझने की इनकी क्षमता नहीं है?...

    ...साथ महाराष्ट्र में सरकार निर्माण के मसले में राम मंदिर को भी घसीट लिया है. भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा राम मंदिर निर्माण आंदोलन में अपना जीवन लगाया गया है और अब कोर्ट का फैसला अपेक्षित है. ऐसे वक्त में राज्य में एक स्थिर सरकार की आवश्यकता होती है.'