FREE कश्मीर पोस्टर पर शिवसेना नेता संजय राउत ने गढ़ी 'अनोखी थ्योरी'

पोस्टर दिखाने वाली लड़की ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो शेयर करते हुए सफाई दी है. महक मिर्जा प्रभु नाम की इस युवती ने खुद को स्टोरीटेलर (Story Teller) बताया है. 

FREE कश्मीर पोस्टर पर शिवसेना नेता संजय राउत ने गढ़ी 'अनोखी थ्योरी'
(फोटो साभार - ANI)

मुंबई: गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway of India) पर जेएनयू हिंसा के विरोध में हो रहे प्रदर्शन में 'फ्री कश्मीर' पोस्टर दिखाए जाने के मामले में शिवसेना नेता संजय राउत ने अलग ही थ्योरी मीडिया के सामने रखी है. संजय राउत ने फ्री कश्मीर का मतलब वहां इंटरनेट, मोबाइल सेवा की बहाली को लेकर बताया है. इसके लिए शिवसेना नेता ने अखबारों का हवाला भी दिया. संजय राउत ने कहा, 'फ्री कश्मीर कहना का मकसद यह नहीं है कि कश्मीर को भारत से अलग करो. जो इस तरह की बात करेगा उसे हम कतई बर्दाश्त नहीं कर सकेंगे.फ्री कश्मीर के पोस्टर देखे गए उन लोगों का कहना यही था कि कश्मीर में काफी दिक्कतें हैं, इंटरनेट और कई जरूरी सहूलियतें बंद हैं, इन दिक्कतों से फ्री करो लोगों का यही कहना था.'

संजय राउत ने आगे कहा, 'शिवसेना आज भी 370 का समर्थन करती है और कश्मीर को भारत का अंग मानती है कोई भी अगर इस बात को कहे कि कश्मीर को भारत से अलग करने की बात हो तो उसे नहीं माना जा सकता इस बात पर हम अडिग हैं कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है..'

उधर इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पोस्टर दिखाने वाली लड़की ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक वीडियो शेयर करते हुए सफाई दी है. महक मिर्जा प्रभु नाम की इस युवती ने खुद को स्टोरीटेलर (Story Teller) बताया है. 

महक ने वीडियो में बताया है कि उन्होंने गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन के दौरान एक पोस्टर उठाया था. यह पोस्टर वहां ही पड़ा था. महक ने कहा, 'मैं मंगलवार 6 जनवरी को लोकतंत्र में विश्वास करने वाले लोगों की तरह ही गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए गई थी. इस दौरान मुझे एक पोस्टर पड़ा मिला. जिसमें फ्री कश्मीर लिखा था. मैंने इसे सिर्फ इसलिए उठाया था क्योंकि मैं कश्मीर में इंटरनेट और मोबाइल सेवा बहाल करने की बात कहना चाह रही थी. वहां लोगों को मूलभूत संवैधानिक अधिकारों से लोगों को वंचित किया जा रहा है...

....मैं कश्मीरी नहीं हूं, मैं मुंबई की रहने वाली हैं, मैं आम भारतीयों की तरह सिर्फ लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाती हूं. मेरा यही उद्देश्य था इससे ज्यादा कुछ नहीं था. मैं स्टोरी टेलर हूं. मैं एक सामान्य इंसान हूं. मैं किसी गैंग का हिस्सा नहीं हूं.'

वहीं बीजेपी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने पुलिस कमिश्नर से शिकायक दर्ज कराई है. बीजेपी सांसद ने मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर विनय चौबे को इसकी शिकायत दी है.  इससे पहले मुंबई में जोन-1 के डीसीपी संग्राम सिंह ने ZEE मीडिया से बात करते हुए कहा, 'गेटवे पर विरोध के दौरान बीती रात दिखाए गए फ्री कश्मीर पोस्टर का हमने गंभीरता से संज्ञान लिया है.' ज़ी मीडिया संवाददाता अंकुर त्यागी ने डीसीपी संग्राम सिंह से जब पूछा गया कि क्या पुलिस इस पूरे मामले की जांच करेगी और उस लड़की की पहचान करेगी जो इस पोस्टर को लेकर वहां खड़ी थी? तो उन्होंने इसके जवाब में कहा, 'जी हां, निश्चित रूप से.'

मंगलवार को पुलिस ने इस संवेदनशील इलाके की सुरक्षा को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को आजाद मैदान शिफ्ट करने का फैसला किया. पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इस इलाके को खाली कर दें. लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने और उन्होंने मुंबई पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया. 

इसके बाद पुलिस ने कहा, 'यहां बहुत सारे टूरिस्ट यहां पर आएंगे, लोगों को अपने काम पर जाना है, प्लीज आप लोग आजाद मैदान चले जाएं' इस पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यहां सबकुछ हमारे कंट्रोल में रहेगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं रहा. अब प्रदर्शनकारियों को पुलिस की गाड़ी में आजाद मैदान शिफ्ट किया जा रहा है. 

दरअसल जेएनयू हिंसा के बाद से मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर छात्र, फिल्मी जगत की हस्तियां और कई लोग प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे. लेकिन सोमवार 5 जनवरी की रात गेटवे ऑफ इंडिया पर एक महिला प्रदर्शनकारी का वीडियो सामने आया था. इस वीडियो में महिला हाथ में फ्री कश्मीर का पोस्टर लिए दिख रही थी. फ्री कश्मीर का मतलब है कि कश्मीर को आजाद करो.

गौरतलब है कि पांच अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया था. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर का विभाजन कर इसे जम्मू कश्मीर और लद्धाख, दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था. इसके अलावा एक और विवादित पोस्टर सामने आया है.

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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में रविवार (5 जनवरी) की रात को हुई हिंसा के मामले में 20 ज्यादा छात्रों के घायल होने की खबर थी. जेएनयू छात्र संघ ने दावा किया था कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने हिंसा को अंजाम दिया है. वहीं, एबीवीपी ने लेफ्ट विंग पर मारपीट करने का आरोप लगाया है. दरअसल जेएनयू परिसर में रविवार को कुछ नकाबपोश लोगों ने घुसकर छात्रों के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ मचाई. नकाबपोश लकड़ी के डंडे और लोहे की छड़ से लैस थे. 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में रविवार की शाम फिर बवाल हुआ था. कुछ नकाबपोश हमलावरों ने विश्वविद्यालय परिसर में घुसकर साबरमती छात्रावास के छात्रों को निशाना बनाया. नकाबपोश पुरुषों और चेहरा ढकी महिलाओं ने छात्रावास के कमरे में तोड़फोड़ की और छात्रों की पिटाई की. रोती हुई एक छात्रा ने हिंसा के इस दृश्य के संबंध में बताया, "मैं कमरे में थी. भगदड़ के बीच मैंने कई लड़कियों को आते देखा. मैंन सबसे अपने-अपने कमरे बंद कर लेने को कहा. मैं जब वीडियो क्लिप लेने की कोशिश कर रही थी तभी उन्होंने मेरे ऊपर पत्थर मारा."