गांधी परिवार से SPG सुरक्षा हटाने पर शिवसेना ने 'सामना' के जरिए उठाए सवाल, 'किसी की जान से मत खेलो'

नेहरू खानदान से गत 5 वर्षों में यह बैर कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है. लेकिन किसी की जान से मत खेलो और सुरक्षा व्यवस्था का मजाक मत बनाओ. ‘गांधी’ परिवार की जगह और कोई होता तो भी हम इससे कुछ अलग नहीं कहते.

गांधी परिवार से SPG सुरक्षा हटाने पर शिवसेना ने 'सामना' के जरिए उठाए सवाल, 'किसी की जान से मत खेलो'

मुंबई: गांधी परिवार (Gandhi family) से एसपीजी सुरक्षा (SPG security) हटाने को लेकर शिवसेना (Shiv Sena) के मुखपत्र में सामना (Saamana) में सवाल उठाए गए हैं. सामना के संपादकीय में मोदी सरकार (Modi governmen) के इस फैसले की आलोचना की गई है.

गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया है कि गांधी परिवार को अब कम खतरा है. गृहमंत्रालय को ऐसा लग रहा है मतलब किसे ऐसा लग रहा है? ये असली सवाल है. इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री थीं, उस समय उनके सुरक्षा रक्षकों ने उनकी हत्या कर दी. 

खालिस्तानी आतंकवादी स्वर्ण मंदिर में घुस गए थे और स्वघोषित संत भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर से देश के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था. भिंडरावाले को पाकिस्तान और चीन का खुला समर्थन प्राप्त था. इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर में फौज भेजकर भिंडरावाले का खात्मा किया था. उसके बदले के रूप में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी. 

राजीव गांधी को तमिल आतंकियों ने मारा. तमिलनाडु की एक प्रचार सभा में इस उम्दा नेता की निर्मम हत्या कर दी गई इसलिए बाद में गांधी परिवार को विशेष सुरक्षा व्यवस्था दी गई. हालांकि अब गांधी परिवार को खतरा नहीं होने का कारण बताकर उनकी सुरक्षा व्यवस्था सरकार ने कम कर दी है. सरकार किसी प्रकार की जानकारी के बिना ऐसे कदम नहीं उठाती. 

नेहरू खानदान से गत 5 वर्षों में यह बैर कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है. लेकिन किसी की जान से मत खेलो और सुरक्षा व्यवस्था का मजाक मत बनाओ. ‘गांधी’ परिवार की जगह और कोई होता तो भी हम इससे कुछ अलग नहीं कहते. इंदिरा गांधी शहीद हैं, उसी प्रकार राजीव गांधी ने भी बलिदान दिया है. राजीव गांधी ने जब श्रीलंका से शांति समझौता किया, उसी समय उनकी जान को खतरा होने की संभावना शिवतीर्थ की एक सभा में शिवसेनाप्रमुख ने जताई थी.

गत 5 सालों में सत्ताधारी दल के प्रमुख नेताओं को उच्च श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था दी गई. विरोधियों की सुरक्षा हटा ली जाती है और सत्ताधारी लोगों की सुरक्षा बढ़ा दी जाती है. जब कोई उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बन जाता है तो उसे सुरक्षा दी जाती है. जब कोई महाराष्ट्र का प्रभारी बनता है तो किसी दूसरे राज्य को जीतने के लिए नियुक्त किए जाने के कारण उसे ‘जेड प्लस’ आदि सीआरपीएफ की विशेष सुरक्षा मुहैया कराई जाती है. ये सत्ता का दुरुपयोग है.

महाराष्ट्र में गत 5 सालों में ऐसे कई लोगों को सुरक्षा देकर सरकारी तिजोरी पर भार बढ़ाया गया है. इसके लिए नियमों को तोड़कर पुलिस अधिकारियों ने राजनीतिक सेवा की है. दिल्ली हो या महाराष्ट्र, माहौल निर्भय होना चाहिए, कानून का खौफ होना चाहिए तथा सार्वजनिक जीवन में निडर होकर काम करने का माहौल पैदा करने की जिम्मेदारी नेताओं की है. वैसी स्थिति और माहौल बन गया होगा तो गांधी परिवार की सुरक्षा हटाने में कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मंत्री और अन्य सत्ताधारी नेता सुरक्षा का ‘पिंजरा’ छोड़ने को तैयार नहीं हैं तथा बुलेटप्रूफ गाड़ियों का महत्व कम नहीं हुआ है. इसका मतलब गांधी परिवार की सुरक्षा को लेकर उठाया गया सवाल है. गांधी परिवार के सुरक्षा काफिले में पुरानी गाड़ियां भेजने की खबर भी चिंताजनक है. खतरे की घंटी बज रही होगी तो प्रधानमंत्री मोदी को इस पर ध्यान देना चाहिए.