अर्थव्यवस्था को लेकर शिवसेना ने साधा निशाना, लिखा- CMIE के आंकड़ों ने खोली केंद्र के दावों की पोल

शिवसेना (Shiv Sena) के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा है कि देश का विकास पिछले15 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है. बेरोजगारी की दर 45 सालों में सबसे ऊपर है. 

अर्थव्यवस्था को लेकर शिवसेना ने साधा निशाना, लिखा- CMIE के आंकड़ों ने खोली केंद्र के दावों की पोल

मुंबई: शिवसेना (Shiv Sena) के मुखपत्र सामना में देश की अर्थव्यवस्था (Economy) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया गया है. शिवसेना ने सीएमआईई (CMIE) द्वारा जारी आकंड़ों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है. 

सामना में लिखा है ‘सीएमआईई’ द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आया है कि देश में बेरोजगारी (Unemployment) का स्तर पिछले दो वर्षों में निचले स्तर पर पहुंच गया है. सरकार रोजगार निर्माण के जो दावे कर रही है, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से नौकरियां निर्माण करने के जो आंकड़े प्रस्तुत कर रही है, यह निष्कर्ष उन दावों की पोल खोलनेवाला है.'

संपादकीय में लिखा गया है कि देश का विकास पिछले15 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है. बेरोजगारी की दर 45 सालों में सबसे ऊपर है. बैंक कर्ज के बोझ से दबे हैं. सार्वजनिक उपक्रम भी सरकारी सहायता के ‘बूस्टर डोज’ मिलने की प्रतीक्षा में हैं.

संपादकीय में कहा गया है, ' देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन सिंह ने दो दिन पहले देश की गिरती हुई अर्थव्यवस्था पर सरकार को चार बातें बताईं लेकिन वित्त राज्यमंत्री कहते हैं कि देश की आर्थिक व्यवस्था अच्छी है. हिंदुस्तान के आर्थिक विकास की दर 7.5 प्रतिशत से और ‘जी-20’ देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है, वे ऐसा भी कह रहे हैं. '

‘सीएमआईई’ जैसी प्रतिष्ठित संस्था ने देश की बेरोजगारी की गंभीर हकीकत बताई है. सरकार अपनी रिपोर्ट में कहती है कि हिंदुस्तानी जनता का ‘उपभोग खर्च’ गत 40 वर्षों में पहली बार घटा है. ‘रोजगार मर चुका है’ ऐसा आक्रोश सरकारी और निजी संस्थाओं के आंकड़े बता रहे हैं. ‘हाथ बांधकर मुंह पर उंगली रखकर’ बैठे लोग क्या अब इस दहकते सच को स्वीकार करेंगे? 

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