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दौसा में सड़क पर खुलेआम घूम रहे यमराज, हर साल बन रहे हैं मौत का कारण

दौसा जिले में हर साल जिले के अलग-अलग थानों में सात सौ से भी अधिक मामले सड़क हादसों के दर्ज होते हैं. इनमें ज्यादातर हादसे की वजह हाईवे पर विचरण करते आवारा पशु भी हैं.

दौसा में सड़क पर खुलेआम घूम रहे यमराज, हर साल बन रहे हैं मौत का कारण
सड़क हादसों में राजस्थान की करीब साढे़ 4% हिस्सेदारी है. (प्रतीकात्मक फोटो साभार: DNA)

लक्ष्मी अवतार शर्मा, दौसा: देश में तकरीबन हर हाल डेढ़ लाख से ज्यादा लोग सड़क हादसे में अपनी जान गंवा देते हैं. यातायात नियमों की उल्लंघन सड़क दुर्घटना की एक बड़ी वजह है, वहीं सड़क पर घूमते आवारा पशु भी सड़क पर होने वाले हादसों के लिए कम जिम्मेवार नहीं हैं.

सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने भारी भरकम जुर्माने वाला नया ट्रैफिक रूल भले ही लागू कर दिया हो, लेकिन सवाल ये हैं, कि आवारा पशु की वजह से होने वाले सड़क हादसों के लिए जिम्मेवार आखिर कौन हैं ?

दौसा जिले में हर साल जिले के अलग-अलग थानों में सात सौ से भी अधिक मामले सड़क हादसों के दर्ज होते हैं. इन सड़क हादसों में प्रतिवर्ष दौसा जिले में तीन सौ से भी अधिक लोग मौत का शिकार हो जाते हैं. इनमें ज्यादातर हादसे की वजह हाईवे पर विचरण करते आवारा पशु भी हैं. 

आवारा पशु बने मौत का कारण
दौसा के मेहंदीपुर बालाजी से दर्शन कर लौट रहे दो युवक आवारा पशुओं से टकराने की वजह से सड़क हादसे का शिकार हो गए और मौत हो गई. जिसके बाद मृतक वैभव और निहाल के घर मातम छाया हुआ है और उनके परिवार वाले सिस्टम को कोस रहे हैं . वैभव के पिता का कहना है कि अगर सड़क पर आवारा पशु नहीं होते तो मेरा बेटा अकारण मौत की नींद नहीं सोता.

गौशाला में नहीं पहुंच पाते आवारा पशु 
दौसा में बाजार, गली और सड़कों पर हर वक्त आवारा पशु घूमते नजर आते हैं. आवारा पशुओं को लेकर दौसा सांसद जसकोर मीणा का कहना हैं, कि दौसा में 17 गौशाला रजिस्टर्ड हैं, उसके बावजूद भी गौशाला में इन आवारा पशुओं को नहीं पहुंचाया जाता. जबकि उनकी परवरिश के लिए अनुदान के रूप में पैसा भी दिया जाता है. 

हाईवे पर यमराजों को हटाने का जारी है निर्देश
एनएचआई के परियोजना अधिकारी वाई बी सिंह के अनुसार हाईवे पर टोल वसूलने वाली कंपनियों को आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए हुए हैं. कंपनियों द्वारा आवारा पशुओं को हटाने के लिए इनको गाड़ी में भरकर गौशाला में पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है. लेकिन गोशाला वाले पशुओं को लेने से मना करने पर बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है.

सड़क हादसों में प्रदेश है पांचवे नंबर पर
आपको बता दें कि राजस्थान सड़क हादसों के मामले में देश में पांचवे नंबर पर है. जहां प्रतिवर्ष करीब 10,000 से अधिक लोग सड़क हादसों में काल का ग्रास बनते हैं. सड़क हादसों में राजस्थान की करीब साढे़ 4% हिस्सेदारी है.
(WRITTEN BY- सुजीत कुमार निरंजन)