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इस स्‍कूल की टूटी है छत, चूता है पानी, छाता पकड़कर बच्‍चे खाते हैं मिड-डे मील, भीगकर करते हैं पढ़ाई

ओडिशा का एक स्‍कूल है, जिसकी छत टूटी है. क्‍लासरूम में बारिश का पानी तेजी से गिरता है. बच्‍चे इस दौरान बारिश के पानी में भीगकर पढ़ाई करते हैं. यही नहीं, वे एक हाथ से छाता पकड़कर दूसरे हाथ से मिड डे मीन खाने को मजबूर हैं. 

इस स्‍कूल की टूटी है छत, चूता है पानी, छाता पकड़कर बच्‍चे खाते हैं मिड-डे मील, भीगकर करते हैं पढ़ाई
ओडिशा के सरकारी स्‍कूल का बुरा है हाल.

आनंदपुर (ओडिशा), नारायण साहू : देश में शिक्षा व्‍यवस्‍था को बेहतर बनाने के भले ही लाखों दावे किए जाते हों, लेकिन अभी भी ऐसे सरकारी स्‍कूल हैं, जहां बच्‍चों को लाख परेशानियों को सामना करके पढ़ाई करनी पड़ती है. जी हां, देश में मॉनसून चरम पर है. ऐसे में ओडिशा का एक स्‍कूल है, जिसकी छत टूटी है. क्‍लासरूम में बारिश का पानी तेजी से गिरता है. बच्‍चे इस दौरान बारिश के पानी में भीगकर पढ़ाई करते हैं. यही नहीं, वे एक हाथ से छाता पकड़कर दूसरे हाथ से मिड डे मीन खाने को मजबूर हैं. 

बारिश में भीगकर पढ़ाई करने और मिड डे मील खाने की यह कहानी है ओडिशा के केउंझर जिले के आनंदपुर ब्‍लॉक मंगलपुर के सरकारी स्‍कूल की. यहां हर तरह से प्रयासों के बावजूद स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है. प्राथमिक स्‍कूलों में पढ़ाई से लेकर मिड डे मील तक की व्‍यवस्‍था बिगड़ी हुई है. 


इस स्‍कूल का हाल बुरा है.

जब बारिश होती है तो इस स्‍कूल के क्‍लासरूम की छत से बारिश का पानी सीधे अंदर आता है. क्‍लासरूम में बारिश के पानी के कारण बच्‍चे भीगकर पढ़ाई करते हैं. उन्‍हें पढ़ाई में भी मुश्किल होती है. यहां स्थिति इतनी खराब है कि बारिश के समय बच्‍चों को एक हाथ में छाता पकड़ना पड़ता है और दूसरे हाथ से भोजन करना पड़ता है.

यहां पढ़ने वाले बच्‍चों का कहना है कि हम लोग बारिश के समय मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. हम पढ़ नहीं पाते हैं. हमारी कॉपी और किताबें भी बारिश में भीग जाते हैं. क्लासरूम में हम भीग जाते हैं और हम भीग के पढ़ते हैं. हम लोग खाते समय छतरी लेकर बैठते हैं ताकि गंदा पानी खाने में न चला जाए.


बच्‍चे ऐसे करते हैं भोजन.

पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक इस स्‍कूल में कुल 45 बच्‍चे पढ़ते हैं. स्‍कूल की छत और अन्‍य हिस्‍से टूट जाने के बाद बच्‍चों के अभिभावकों ने रिपे‍यरिंग की मांग को लेकर धरना भी दिया था. लेकिन हालात अभ तक नहीं सुधरे. मामले में ब्‍लॉक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि समस्या का समाधन जल्‍द किया जाएगा.  


स्‍कूल की छत टूटी है.

स्‍कूल की प्रधान शिक्षिका का कहना है कि बहुत बार बोलने के बावजूद कोई नहीं सुन रहा है. यहां अभिभावकों ने भी धरना दिया था. हम क्या कर सकते हैं अगर कोई हमारी बात नहीं सुनेगा तो. DEO और BEO को बोलने के बावजूद कुछ फायदा नहीं मिला. फोनी चक्रवात के बाद स्‍कूल का हाल और खराब हो गया है.