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सूरत अग्निकांड में 22 बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार कोचिंगों में नियम और मनाक तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट दिशा निर्देश जारी करें.

सूरत अग्निकांड में 22 बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
फाइल फोटो

नई दिल्लीः गुजरात के सूरत में कोचिंग सेंटर में लगी आग से 22 बच्चों की मौत के बाद मामला बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सूरत अग्निकांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर देशभर में  निजी कोचिंग संस्थानों के नियमतीकरण की मांग की है. याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार कोचिंगों में नियम और मनाक तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट दिशा निर्देश जारी करे. सुप्रीम कोर्ट  में वकील पवन पाठक ने दाखिल की याचिका

इस याचिका में मांग की गई है कि छात्रों के मूल अधिकारों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जरूरी सुरक्षा मानक और कोचिग सेंटर के लिए मानक तय करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएं.

बिजली से आग की घटनाओं से बचने के लिये बेहतर गुणवत्तापूर्ण उपकरणों की आपूर्ति जरूरी: अधिकारी
बिजली से आग लगने की बढ़ती घटनाओं के बीच सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि बिजली का सामान बनाने वाली कंपनियों को बेहतर मानक और गुणवत्तापूर्ण उपकरणों का उत्पादन सुनिश्चित करना चाहिये. साथ ही प्राधिकरणों को चाहिये कि वह बेहतर सुरक्षा तथा आग लगने के हादसों से बचने के लिये नियमों को सरल तथा क्रियान्वयन योग्य बनायें. 

हाल में सूरत में आग लगने की घटना पर चिंता जताते हुए बिजली सचिव ए के भल्ला ने कहा कि यह बात सही है कि ग्राहक सामान्य तौर पर सस्ता और कम गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीदता है पर आखिर विनिर्माताओं को खराब गुणवत्ता वाले सामानों की आपूर्ति क्यों करनी चाहिए. इस हादसे में 22 लोगों की जान चली गयी. बिजली संबंधी सुक्षा पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए भल्ला ने कहा, ‘‘सूरत में एक घटना हुई और हम इससे चिंतित हैं. शायद हम उपहार (सिनेमा) हादसे को भूल गये. लेकिन आग, आग है और यह काफी खतरनाक है.’’ 

उल्लेखनीय है कि सूरत में पिछले सप्ताह चार मंजिला वाणिज्यिक परिसर में छात्रों समेत 22 लोगों का निधन हो गया. इमारत में लगे एयरकंडीशनर में स्पार्क से यह आग लगी. वहीं ज्वलनशील पदार्थ फ्लेक्स और टायरों के होने से आग और तेज हो गयी.

भल्ला ने कहा, ‘‘मेरा आईईईएमए जैसे उद्योग संगठनों से भी अनुरोध है. विनिर्माता के रूप में आपको गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं का उत्पादन करना चाहिये जिसकी लागत ग्राहकों से वसूली जानी चाहिये. आखिर आपमें से किसी को खराब गुणवत्ता वाले उत्पाद क्यों बनाने और उसे बाजार में बेचना चाहिए.’’ उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकारी एजेंसियों को नियमन की जटिलता को दूर करना चाहिये और उन्हें सरल तथा अनुपालन योग्य बनाना चाहिये. 

खराब गुणवत्ता वाले तार, स्विच जैसे इलेक्ट्रिक सामान के उत्पादन के बारे में भल्ला ने कहा, ‘‘सरकार मानकों को तय कर सकती है और अनुपालन सुनिश्चित कर सकती है. लेकिन ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिसमें एक प्राधिरण जबरन अनुपालन सुनिश्चित करे. अनुपालन स्वैच्छिक तौर पर होने चाहिए.’’ इंटरनेशनल कॉपर एसोसएिशन आफ इंडिया ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के मुख्य विद्युत निरीक्षणालय विभाग तथा भारतीय मानक ब्यूरो के साथ मिलकर इस कार्यशाला का आयोजन किया था.

कार्यशाला के दौरान सुरक्षा मानक आईएस: 732 (विद्युत वायरिंग के लिये व्यवहार संहिता) पेश किया गया. इसमें आम लोगों के लिये बिजली से सुरक्षा के मामले में क्या करना है और क्या नहीं करना है तथा सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी गई है. 

(इनपुट भाषा से)