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राजस्थान से है स्वामी विवेकानन्द का खास कनेक्शन, पढ़ें खबर

स्वामी जी घनिष्ठता के कारण शिकागो में भी अलवर के लोगों को याद करते थे इसलिए उन्होंने शिकागो से गोविंद सहाय को पत्र भी लिखे थे.

राजस्थान से है स्वामी विवेकानन्द का खास कनेक्शन, पढ़ें खबर
1891 से 1897 के बीच विवेकानंद ने करीब 11 चिट्ठी अलवर के लोगों को लिखी हैं.

जुगल किशोर, अलवर: 127 साल पहले शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदुस्तान का परचम फैला कर सनातन धर्म के प्रति विश्व में चेतना जगाने वाले स्वामी विवेकान्द ने देश की जनता को अपने पत्रों और संदेशों से भी जगाने का काम किया है. विवेकानंद का जिक्र जब कभी भी आएगा तो उनका यादगार भाषण की चर्चा जरुरी की जाती है. 

स्वामी विवेकानन्द ने धर्म सभाओं के अलावा हजारों की संख्या में पत्रों के जरिए धर्म का ज्ञान, जीवन में हार नहीं मानने, लक्ष्य नहीं मिलने तक लगे रहने और सच्चा बनना और बर्ताव करने में ही समग्र धर्म निहित होने जैसे समाज में अलख जगाने वाले खूब संदेश दिए हैं. राजस्थान के अलवर से भी स्वामीजी का गहरा लगाव रहा है. 

वर्ष 1891 से 1897 के बीच उन्होंने करीब 11 चिट्ठी यहां के लोगों को लिखी हैं. वो तीन बार अलवर आए हैं. कई जगह धर्म सभाएं की हैं. दस-दस दिन तक एक छोटे से कमरे में बिताए हैं. पहली बार स्वामी जी 7 फरवरी 1891 को अलवर आए थे. इस दौरान वो सरकारी अस्पताल के प्रमुख डॉ. गुरुचरण के आवास में ठहरे थे. 

यह वह स्थान है, जहां स्वामी जी का स्मारक बनाया गया है. इस प्रवास में स्वामी जी की दीवान रामचंद्र की हवेली, मंगलसर रेजीमेंट के हेड क्लर्क लाला गोविंद सहाय विजयवर्गीय, पंडित शंभूनाथ इंजीनियर सहित अन्य से घनिष्ठता हुई. वो अशोका टॉकीज के पास स्थित गोविंद सहाय के निवास पर भी कुछ दिन रुके थे. 

स्वामी जी घनिष्ठता के कारण शिकागो में भी अलवर के लोगों को याद करते थे इसलिए उन्होंने शिकागो से गोविंद सहाय को पत्र भी लिखे थे. इसी प्रवास के दौरान उन्होंने मालाखेड़ा गेट के पास स्थित एक टीले पर प्रवचन भी दिया था. इसी टीले पर विवेकानंद चौक है, जहां स्वामीजी की प्रतिमा स्थापित है.

31 मार्च 1891 को स्वामी जी अलवर से रवाना हो गए थे. इस दौरान मूर्ति पूजा को लेकर उनकी महाराज मंगलसिंह से भी मुलाकात हुई थी एक मौलवी साहब से भी उनकी चर्चा हुई थी. दूसरी बार अलवर आने पर अलवर के लोगों ने उन्हें विशेष सम्मान दिया था. उन्हें राजमहल में ठहराया गया था. 

यूआईटी की ओर से बनवाए गए विवेकानंद स्मारक पर कुल 42 लाख रुपए की राशि खर्च हुई है. उस कमरे को विशेष रूप से सजाया गया है, जिसमें स्वामीजी ठहरे और साधना करते थे. इस कमरे के ऊपर बनी छतरी जहां ध्यान करने के लिए स्वामीजी बैठते थे, उस पर रंग रोगन किया गया है. कमरे के साथ में बैठने के लिए विशेष बरामदा बनाया है. इसमें स्वामी की धातु से बनी प्रतिमा लगाई है.