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झालावाड़: जलमग्न इलाकों में फैली मौसमी बिमारियों की दहशत, पहुंची डॉक्टरों की टीम

बाढ़ ग्रस्त इलाकों में मौसमी बिमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम आकिया, परमार और पीपाखेड़ी जैसे गांव में पहुंच चुकी है. 

झालावाड़: जलमग्न इलाकों में फैली मौसमी बिमारियों की दहशत, पहुंची डॉक्टरों की टीम
स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन गांवो में फोगिंग स्प्रे भी करवाई गई है.

महेश परिहार/झालावाड़: राजस्थान में भारी बारिश के कारण सभी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. जिसके कारण नदियों के आस-पास के इलाके और निचले क्षेत्रों के कस्बे जलमग्न हो गए हैं.  ऐसी ही हालात झालावाड़ जिले के गंगधार तहसील क्षेत्र में है, जहां के आधा दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के कारण जलमग्न हो गए हैं. वहीं, बाढ के कारण जलमग्न इलाकों में मौसमी बिमारियों की आसंका भी बड़ गई है. 

हालांकि, बाढ़ ग्रस्त इलाकों में मौसमी बिमारियों के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम आकिया, परमार और पीपाखेड़ी जैसे गांव में पहुंच चुकी है. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचते ही सैकड़ों लोगों का उपचार युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है. अधिकतर मरीज वायरल से पीड़ित हैं. यहां तक कि डॉक्टरों की टीम के मुताबिक कई लोगों के पैर लगातार पानी मे रहने से गल गए, उनका उपचार भी किया जा रहा है.  

वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन गांवो में फोगिंग स्प्रे करवाई गई है. हल्का पटवारी शांता कंवर ने बताया कि बाढ के पश्चात जिन लोगों का नुकसान हुआ है उनका डोर-टू-डोर सर्वे किया जा रहा है, निर्धारित प्रारूप के तहत प्रपत्र भरवाकर सहायता के लिए उच्च अधिकारियों को भेजा रहा है,

मालुम हो कि राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. एक अधिकारी ने कहा, 'राजस्थान के कोटा, झालावाड़, धौलपुर और सवाई माधोपुर जिलों में राहत अभियान चलाया जा रहा है'.

वहीं कोटा की बात करें तो यहां भी हालात बाढ़ से बेहाल है. कोटा की कई बस्तियां जलमग्न हो गई है. चंबल नदी का उफान भी कम होने का नाम नहीं ले रहा है. वहीं अब तक की जानकारी के अनुसार 5000 से ज़्यादा लोगों को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है. 25 हजार से ज्यादा घर पानी में डूब चुके है. हज़ारों दुकानों में पानी घुस गया है.