हैदराबाद पहुंची राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम, एनकाउंटर स्‍पॉट और महबूबनगर अस्‍पताल भी जाएगी

आयोग का दल पहले एनकाउंटर वाली जगह पर पहुंचेगा और इसके बाद महबूबनगर जाएगा. यहां चारों आरोपियों के शवों को रखा गया है.

हैदराबाद पहुंची राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम, एनकाउंटर स्‍पॉट और महबूबनगर अस्‍पताल भी जाएगी
फोटो- ANI

नई दिल्‍ली/हैदराबाद : तेलंगाना (Telangana) की राजधानी में एक पशु चिकित्सक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) और हत्या की वारदात के 10 दिन बाद पुलिस ने शुक्रवार को रंगारेड्डी जिले में शादनगर के पास मुठभेड़ में चारों आरोपियों को मार गिराया. पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने पुलिस से हथियार छीन लिए और उनपर फायरिंग करने लगे, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में चारों को मार गिराया गया. इस मुठभेड़ के बाद जहां ज्‍यादातर लोगों ने इसका समर्थन किया है, वहीं कुछ लोग इस पर सवाल भी उठा रहे हैं. इसके बाद राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम आज सुबह हैदराबाद पहुंची. आयोग का दल पहले एनकाउंटर वाली जगह पर पहुंचेगा और इसके बाद महबूबनगर जाएगा. यहां चारों आरोपियों के शवों को रखा गया है.

वहीं, शुक्रवार देर शाम आपात सुनवाई के दौरान तेलंगाना हाईकोर्ट ने अधिकारियों को आरोपियों के शवों को नौ दिसंबर तक संरक्षित करने का निर्देश दिया है. 9 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश आर. एस. चौहान विभिन्न संगठनों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे. इन याचिकाओं में पुलिस के हाथों हुई 'न्यायेतर हत्या' की जांच की मांग की गई है.

उल्‍लेखनीय है कि तेलंगाना पुलिस (Telangana Police) ने हैदराबाद से 50 किलोमीटर दूर शादनगर शहर के चाटनपेल्ली में तड़के चारों आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया था. आरोपियों को उसी स्थान पर ढेर कर दिया गया, जहां उन लोगों ने 27 नवंबर की रात हैदराबाद के बाहरी इलाके में शमशाबाद टोल प्लाजा के पास डॉक्टर युवती को सामूहिक दुष्कर्म का शिकार बनाने के बाद हत्या कर शव को पेट्रोल छिड़ककर जलाने का प्रयास किया था.

साइबराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने पत्रकारों से कहा कि 10 सदस्यीय पुलिस टीम द्वारा आरोपियों को सुबह 5.45 बजे मौके पर ले जाया गया था. पुलिस टीम इन आरोपियों को यहां पीड़िता के शव को जलाने के बाद उनके द्वारा छिपाए गए मोबाइल और अन्य सामग्रियों को खोजने आई थी.

 

 

उन्होंने कहा कि आरोपियों ने पुलिस पर पत्थरों, छड़ी और अन्य धारदार सामग्रियों से हमला किया. इनमें से दो आरोपियों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीन लिए और फायरिंग की. उन्होंने कहा, "इसके बाद भी पुलिस ने धर्य बरता और उन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन उन्होंने गोलीबारी जारी रखी. पुलिस ने गोलीबारी का जवाब दिया और पाया कि चारों की मौत हो चुकी है." पुलिस प्रमुख ने कहा कि पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ और चौथे आरोपी चेन्नाकेशवुलु के हाथ में हथियार पाया. उन्होंने कहा कि दो पुलिस अधिकारियों के सिर में चोट लगी, हालांकि दोनों को गोली नहीं लगी.

सवालों की झरी के बीच, अधिकारी ने कहा कि आरोपियों द्वारा पुलिस से छीने गए हथियार अनलॉक्ड थे. उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों के हाथों में हथकड़ी नहीं लगी थी. पुलिस पर यह आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया है, जिस पर सज्जनार ने कहा, "मैं इतना ही कह सकता हूं कि कानून ने अपना काम किया है." उन्होंने मुठभेड़ पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से रिपोर्ट मांगे जाने के सवाल पर कहा, "हम सभी पहलुओं पर रिपोर्ट दाखिल करेंगे." मुठभेड़ में मारे गए चार अभियुक्तों की पहचान लॉरी चालक मोहम्मद आरिफ (26) और चिंताकुंटा चेन्नाकेशवुलु (20) और लॉरी क्लीनर जोलू शिवा (20) और जोलू नवीन (20) के रूप में हुई है. सभी तेलंगाना के नारायणपेट जिले के रहने वाले थे.

जैसे ही 'मुठभेड़' की खबर फैली, लोग हैदराबाद-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर घटनास्थल के पास जुट गए. इन चारों को पुलिस ने 29 नवंबर को गिरफ्तार किया था और अगले दिन शादनगर की एक अदालत ने उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. बाद में उन्हें हैदराबाद की चेरलापल्ली जेल भेज दिया गया. अदालत ने 2 दिसंबर को आरोपियों को 10 दिनों की पुलिस की हिरासत में भेज दिया था. पुलिस आयुक्त ने कहा कि पुलिस ने 4 और 5 दिसंबर को आरोपियों से पूछताछ की थी.

30 नवंबर को शादनगर पुलिस स्टेशन के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन किया गया, जब आरोपियों को अदालत में ले जाया जा रहा था. सैकड़ों लोगों ने मांग की कि आरोपियों को उन्हें सौंप दिया जाए.

अपराधियों को तत्काल मौत की सजा देने की मांग के साथ निर्मम दुष्कर्म और हत्या को लेकर देशभर में विरोध की लहर देखने को मिली थी. पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. कई लोगों ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने की मांग की थी. तेलंगाना सरकार ने 4 दिसंबर को जल्द सुनवाई के लिए महबूबनगर में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की थी.