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राजस्थान के बिजयनगर में हर साल 'महिषासुर' का जलता है पुतला, जानिए क्यों

राजस्थान के बिजयनगर के पास स्थित बाड़ी माताजी मंदिर के स्थान पर आसोज नवरात्र में महिषासुर का दहन किया जाता है. 

राजस्थान के बिजयनगर में हर साल 'महिषासुर' का जलता है पुतला, जानिए क्यों
आज 6 अक्टूबर को मंदिर परिसर में मां भगवती मर्दिनी 41 फीट के महिषासुर के पुतले का दहन करेंगी.

मनवीर सिंह, अजमेर: राजस्थान के बिजयनगर के पास स्थित बाड़ी माताजी मंदिर के स्थान पर आसोज नवरात्र में महिषासुर का दहन किया जाता है. शायद प्रदेश में एक मात्र स्थान होगा जहां महिषासुर का दहन होता है. 

जहां एक ओर सम्पूर्ण देश व प्रदेश में बुराई के प्रतिक रावण का दहन किया जाता है. वहीं बाड़ी माताजी में विगत 18 वर्षो से महिषासुर के पुतले का दहन किया जा रहा है. आज 6 अक्टूबर को मंदिर परिसर में मां भगवती मर्दिनी 41 फीट के महिषासूर के पुतले का दहन करेंगी.

बाड़ी माताजी मंदिर उपासक कृष्णा टांक ने बताया की महिषासुर एक राक्षस था. जिसका वध करने के लिए ब्रह्नमा विष्णु महेश के तेज पुज से व देवी देवताओं ने अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित कर मां भगवती को शक्ति प्रदान की और मां भगवती ने सिंह पर सवार हो अपना विकराल रूप धारण कर महिषासुर का वध किया.

उन्होंने बताया कि बाड़ी माता भी एक मां का ही रूप है इसी लिए यहां पर महिषासुर के पुतले का दहन किया जाता है. बाड़ी माताजी मंदिर में महिषासुर के दहन का कोई विशेष कारण नही बताया जा रहा है. बस वर्षो पहले माताजी के परम भक्त चुन्नी लाल टांक ने ये परंपरा शुरू की थी. जिसने अब एक विशाल रूप ले लिया है. 

इस दौरानम भव्य झांकियों के आयोजन के अलावा शानदार आतिशबाजी भी होगी. इस दौरान आसपास के हजारो की संख्या में लोग मेले में भाग लेगें. जिसके लिए प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई है.