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माउंट आबू में होटल इंडस्ट्री हुआ बदहाल, व्यवसायियों ने कहा...

माउंट आबू शहर के सारी सड़कें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. हालात ये है कि यहां आने वाले सैलानी यहां की हालत देखकर मायूस होकर के लौट जाते हैं.

माउंट आबू में होटल इंडस्ट्री हुआ बदहाल, व्यवसायियों ने कहा...
यहां की बदहाल सड़कें इस शहर की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही.

माउंट आबू: वर्तमान में सिरोही जिले में स्थित राजस्थान के एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू व्यवसाय की सबसे बड़ी धूरी मानी जाने वाली होटल इंडस्ट्रीज इन दिनों अपनी संक्रमण काल से गुजर रही है. यहां पर होटल व्यवसायियों को अपने होटल के रेनोवेशन से लेकर के रंगाई पुताई सहित अन्य मेनटेनेंस के कामों में एड़ी से चोटी तक का जोर लगाना पड़ता है. वहीं, शहर के बिगड़े हुए वह बदहाल हालात इस शहर की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे.

बता दें कि शहर के सारी सड़कें अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. हालात ये है कि यहां आने वाले सैलानी यहां की हालत देखकर मायूस होकर के लौट जाते हैं. यहां तक कि कई सैलानी इन बदहाल सड़कों की वजह से तो चोटिल भी हो गए. सड़कों के हालात ऐसे है कि दो पहिया वाहन तो अक्सर ही हादसे के शिकार हो जाते हैं. 

वहीं, माउंट आबू में प्रशासन बिना अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारे या सड़कों को ठीक करने की बजाय सिर्फ एक की ओर सोच रहा है. लोगों के मुताबिक प्रशासन के सिर्फ यहां से आने वाली आय और उसमे कैसे इजाफा कैसे किया जाए. इसी कारण प्रशासन ने यात्री के ऊपर प्रति वाहन के 200 से लेकर 500 रुपए तक का शुल्क लगा दिया है. हालांकि तब सरकार ने यह वादा किया था कि शहर के पार्किंग सारे फ्री होंगे लेकिन अब प्रशासन ने खुद ही निविदाएं निकालकर शहर के सारे पार्किंग ठेके पर देने क्या ठान ली है.

हाल ही में होटल एसोसिएशन माउंट आबू की एक बैठक आयोजित हुई थी बैठक में व्यवसायियों ने खुलकर के उनके साथ घटने वाले घटनाक्रम की भड़ास जमकर निकाली. सभी होटल व्यवसायियों ने यह तय किया कि वह समन्वित रूप से होटल इंडस्ट्रीज की सारी समस्याओं का ज्ञापन उपखंड अधिकारी समेत सूबे के मुख्यमंत्री तक को दी जाएगी. ताकि सरकार शहर की ओर ध्यान दे और शहर का सैलालियों के हिसाब से विकास किया जा सके.  

हालांकि यहां के लोगों के मुताबिक उससे भी बड़ी समस्या यह है कि यहां की नगर पालिका शहर के होटल व्यवसाय के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण 1 साल के लिए करना चाहती है. वह भी कई तरह की जटिल प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद, जबकि होटल व्यवसाई यह मांग कर रहे हैं कि उनकी होटल के लाइसेंस का नवीनीकरण 10 साल के लिए किया जाए. जिससे उन्हें साल में चार-पांच महीनों तक पालिका कार्यालय में जाकर के चक्कर नहीं लगाने पड़े और ना ही अधिकारियों से प्रताड़ित होना पड़े. अब देखना ये हैं कि प्रशासन इस मामले पर कब तक सुनवाई करती है.