close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

राजस्थान सहकारी उपभोक्ता भंडार पर दवाओं की किल्लत ने बढ़ाई बुर्जुगों की टेंशन

बुर्जुग पेंशनधारियों ने यह कभी सोचा नहीं होगा कि सहकारी उपभोक्ता भंडार इतना लाचार हो जाएगा. 

राजस्थान सहकारी उपभोक्ता भंडार पर दवाओं की किल्लत ने बढ़ाई बुर्जुगों की टेंशन
बुजुर्ग ललगातार इन दुकानों पर दवाएं लेने आ रहे हैं लेकिन उन्हें दवाएं नहीं मिल रही है.

जयपुर: राजस्थान में पेंशनधारियों की टेंशन लगातार बढ़ती जा रही है. खबर के मुताबिक सहकारी उपभोक्ता भंडारों पर गंभीर बीमारियों की दवा मिल ही नहीं रही है. इस कारण बुढ़ापे में पेंशनधारी मरीज दवा के लिए भी जिंदगी से जंग लड़ रहे है. शायद बुर्जुग पेंशनधारियों ने कभी सोचा नहीं होगा कि सहकारी उपभोक्ता भंडार इतना लाचार हो जाएगा. लेकिन सच यही है जो भी बुर्जुग इन स्टोर्स पर आते हैं उनका दर्द और बढ़ जाता है. 

जब जी मीडिया ने इसकी पड़ताल की तो ऐसे कई मामले सामने आए, जहां बुजुर्गों का उनकी दवा नहीं मिल पा रही है. 75 साल के रामकिशोर भी उन्हीं मे से एक हैं, जिन्हे दिल की गंभीर बीमारी है. वह सहकारी बाजार की मेडिकल दुकानों पर इसी उम्मीद के साथ आए हैं कि इन्हे यहां दवा मिल जाएगी, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल पाई. रामकिशोर जी ने बताया कि उनके साथ ऐसा पिछले 6 महीने से हो रहा है. रामकिशोर की मानें तो उन्हें 6 महीने से दवा नहीं मिल रही है. हर दुकान का कुछ ऐसा ही हाल है.

ऐसी ही हालत 65 साल के भौरीलाल की भी है. उन्हें तो 8 दुकानों में से एक भी दवा नहीं मिली और ना ही चार महीनें से उन्हें एनएसी की राशि मिली है. भौरीलाल को शुगर है, लेकिन अब फिर से उन्हे ये दवा निजी दुकानों से खरीदनी पड़ रही है.

 

भौरीलाल के मुताबिक वह लगातार इन दुकानों पर दवाएं लेने आ रहे हैं लेकिन उन्हें दवाएं नहीं मिल रही है. वह दवा की दुकान पर आते हैं लाइन में लगते हैं लेकिन जब वह खिड़की तक पहुंचते तो उन्हें बताया जाता है कि दवाइयां नहीं है. 

बता दें कि राजस्थान के लाखों पेंशनधारियों के 175 करोड़ रूपए का बकाया चल रहा है. जबकि एनएसी क्लेम के 8 करोड़ से ज्यादा का बकाया चल रहा है. वहीं, सहकारी उपभोक्ता भंडारों में ऐसी मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने के लिए दो महीने पहले 50 करोड़ रूपए की राशि को स्वीकृत किया गया था, लेकिन अभी तक वित्त विभाग से राशि जारी नहीं हुई. ऐसे में बकाया राशि लगातार बढ़ने से विभाग पर भार भी बढ़ता जा रहा है. जिसके कारण पेंशनधारियों की टेंशन भी लगातार बढ़ रही है. 

साथ ही, विभाग के रजिस्ट्रार नीरज के पवन का कहना है कि दो महीने पहले राशि जारी होनी थी, लेकिन अब हमे उम्मीद है कि जल्द राशि प्राप्त होगी. ऐसे में सरकारी दवा का दर्द और कितने जख्म देगा, ये बड़ा सवाल है, लेकिन ये जरूर कह सकते है कि ये दर्द कम समय में खत्म नहीं हो सकेगा.