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डीडवाना: फ्लाइंग प्रतियोगिता में भाग लेते हैं ये ट्रेंड कबूतर, जानिए पूरा मामला...

राजस्थान में भी कबूतर फ्लाइंग प्रतियोगिता की पांच से 6 प्रतियोगिता हो चुकी है. इसके लिए यह कबूतर खूब मेहनत भी कर रहे हैं. 

डीडवाना: फ्लाइंग प्रतियोगिता में भाग लेते हैं ये ट्रेंड कबूतर, जानिए पूरा मामला...
प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कबूतरों को खाना भी स्पेशल दिया जाता है.

हनुमान तंवर/डीडवाना: दुनिया भर में कबूतर की पहचान शांति दूत के रूप में होती है. कभी कबूतर संदेश पहुंचाने का बड़ा जरिया भी हुआ करता था, लेकिन क्या आपको पता है कबूतर फ्लाइंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर लोगों का भरपूर मनोरंजन करते हैं. डीडवाना में पेशे से शिक्षक फ़ैज अहमद उस्मानी के एक शौक ने जब जुनून का रूप लिया तो इस जुनून ने इनको बना दिया देश का सबसे नामी कबूतर बाज. 

डीडवाना के रहने वाले फैज अहमद उस्मानी के पालतू कबूतर केवल पालतू ही नहीं बल्कि खिलाड़ी भी हैं, जो प्रदेश और देश में होने वाली फ्लाइंग प्रतियोगिताओं में अक्सर भाग लेते हैं. राजस्थान में भी कबूतर फ्लाइंग प्रतियोगिता की पांच से 6 प्रतियोगिता हो चुकी है. फैज उस्मान अभी दो तीन साल से जुड़े हैं. फैज उस्मान फिलहाल नवंबर में होने वाली कबूतरों की राष्ट्रीय फ्लाइंग प्रतियोगिता की तैयारी करवा रहे है. इसके लिए यह अपने कबूतरों पर खूब मेहनत भी कर रहे हैं. 

खबर के मुताबिक फिलहाल देशी-विदेशी अलग-अलग नस्ल के सैकड़ों विशेष प्रशिक्षित कबूतर फैज के पास हैं. जिनको आने वाली प्रतियोगिता के लिए तैयार करने के लिए फैज अ लसुबह 5:00 बजे ही उठ जाते हैं. 6:00 बजे से कबूतरों की फ्लाइंग की क्लास शुरु हो जाती है. फैज़ के अनुसार देश में दो तरह की फ्लाइंग प्रतियोगिताएं होती है. जिसमें एक है हाई फ्लाइंग और एक है लो फ्लाइंग. 

 

प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कबूतरों को खाना भी स्पेशल दिया जाता है. उनको ड्राई फ्रूट्स और स्पेशल दाना दिया जाता है, ताकि उनकी फ्लाइंग कैपेसिटी बेहतर हो सके. शुरुआत में जब इनको फ्लाइंग सिखाई जाती है तो उनकी शुरुआत महज 1 घंटे से होती है. लेकिन प्रतियोगिता के लिए औसतन एक कबूतर 15-15 घंटे तक की फ्लाइंग करता है. 

फैज के अनुसार इस प्रतियोगिता में प्रत्येक प्रतियोगिता अपने 15 प्रशिक्षित कबूतरों को फ्लाई करवाता है. सबसे खास बात यह हैं, कि 6 घंटे फ्लाइंग करने के बाद इनकी फ्लाई काउंट होती है. 6 घंटे से कम अगर किसी कबूतर ने फ्लाइंग की है तो वह जीरो मानी जाती है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती कबूतर को ज्यादा से ज्यादा समय तक आसमान में उड़ने के लिए तैयार करना है. प्रतियोगिता में वहीं चैंपियन होता है जिसकी 15 कबूतरों की सबसे ज्यादा फ्लाइंग होती है.

साथ ही फैज का यह कहना है कि यह बड़ा मेहनत का काम है इसके अंदर सुबह 5 बजे उठकर कबूतरों के पीछे लगना पड़ता है. सुबह 6 बजे कबूतर उड़ा देने पड़ते हैं. लगातार दो से ढाई महीने आपको यह करना पड़ता है. यह बहुत ही मेहनत का काम है. अमूमन कबूतर जो हैं ये अपने यूपी इलाके के हैं या अपने राजस्थान के जैसे टोंक है, जयपुर है, और हमारे सबसे पास में शहर मकराना है,इनकी अच्छी उड़ान अच्छी मानी जाती है.