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बारां का यह आदिवासी इलाका अभी तक मूलभूत सुविधाओं से अछूता, सरकार बेखबर

लोग उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग बेखबर बनकर बैठा है. बीते सात दिनों में दो बच्चों से अधिक की मौत हो गई, लेकिन प्रशासन को जानकारी तक नहीं है.

बारां का यह आदिवासी इलाका अभी तक मूलभूत सुविधाओं से अछूता, सरकार बेखबर
यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है.

राम मेहता/बारां: राजस्थान के बारां जिलें के आदिवासी क्षेत्र शाहाबाद-किशनगंज में आजादी के 72 साल बाद भी लोग बदहाली का जीवन जीने को मजबूर हैं. प्रदेश का यह इलाका मूलभूत सुविधाओं से कोसो दूर है. यहां तक कि उपचार के अभाव में बच्चें तोड रहे हैं.

बता दें कि बारां जिले के शाहाबाद-किशनगंज विधान सभा क्षेत्र में कभी भूख से मौत तो कभी कुपोषण के कारण बच्चों की मौत की चर्चा पुरानी बात है. हालांकि, इन सभी समस्याओं को लेकर प्रदेश की सभी सरकारों ने कई वादे किए लेकिन यहां कि स्थिति आज भी वैसी ही बनी हुई है. आज भी यहां उपचार के अभाव में बच्चों और बीमार लोगों की मौत हो जाती है., लेकिन न तो लिजला प्रशासन और न ही प्रदेश की सरका को इन लोगों के लिए कोई कदम उठाती है. 

वहीं, जी मीडिया की टीम ने बारां जिला मुख्यालय से 150 किलोमीटर दूर जाकर मध्यप्रदेश की सीमा के पास स्थित आधा दर्जन गांवों के हालत का जायजा लिया. वहां स्थिति भयावह देखने को मिली. लोग उपचार के अभाव में दम तोड़ रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग बेखबर बनकर बैठा है. बीते सात दिनों में दो बच्चों से अधिक की मौत हो गई, लेकिन प्रशासन को जानकारी तक नहीं है.

मासूम बच्चों के चेहरों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि यहां के बच्चे कई दिन से भूखे बैठे हैं. यहां तक कि इन क्षेत्र में कई माह से आदिवासियों को मिलने वाला गेंहु, तेल, घी, दाल भी नहीं पहुंचे है. साथ ही बरसात के कारण नरेगा का काम बंद होने के रोजगार नहीं मिल रहा है. हालत भूखों मरने जैसी हो गई है.

वहीं, शाहाबाद-किशनगंज सहरिया क्षेत्र कच्चे व खराब रास्ते, टूटी सड़क के कारण यहां पहुंचना मुश्किल भरा है. लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है. बारिश होते ही नदियां उफान पर होने से गांवों का संपर्क कट जाता है. चिकित्सा के इंतजाम नहीं है. अधिकारी विभागीय तालमेल का हवाला देकर मॉनिटरिंग को प्रभावी करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आती है. 

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में उपचार आदि की व्यवस्था नही उपचार के लिए मध्यप्रदेश के झोलाछापों के पास जाना पड़ता है. गांव में लोगों को कई माह से राशन सामग्री नहीं मिली है ऐसें में लोगों की हालत खराब है और लोग भूखें मरने की स्थिति में है. वहीं, जिला कलेक्टर इन्द्र सिंह राव का कहना है कि जिले में बरसात के कारण कई जगह पर दिक्कत आई लेकिन कई जगह डिमाड आई वहां पर पूरा राशन सामग्री का किट भेजा है.