भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए पहुंची तृप्ति देसाई, बोलीं- 'संविधान दिवस पर जाएंगे सबरीमाला मंदिर'
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भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए पहुंची तृप्ति देसाई, बोलीं- 'संविधान दिवस पर जाएंगे सबरीमाला मंदिर'

​पिछले साल इन दिनों ही ये सबरीमाला मंदिर सुर्खियों में तब आ गया था, जब पुणे की रहने वाली तृप्ति  देसाई ने पिछले साल नवंबर में ही मंदिर में दर्शन करने का एक असफल प्रयास किया था. 

भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए पहुंची तृप्ति देसाई, बोलीं- 'संविधान दिवस पर जाएंगे सबरीमाला मंदिर'

कोच्चि: सबरीमाला मंदिर (Sabarimala temple) में दर्शन करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई (Trupti Desai) मंगलवार (26 नवंबर) को कोच्चि पहुंची. इस दौरान उन्होंने कहा कि हम आज (26 नवंबर) संविधान दिवस (Constitution Day) पर सबरीमाला मंदिर जाएंगे. उन्होंने दो टूक कहा कि मंदिर जाने से न तो राज्य सरकार और न ही पुलिस हमें रोक सकती है.  तृप्ति देसाई ने कहा कि चाहे हमें सुरक्षा मिले या नहीं, हम आज मंदिर जाएंगे. 

 

पिछले साल इन दिनों ही ये सबरीमाला मंदिर सुर्खियों में तब आ गया था, जब पुणे की रहने वाली तृप्ति  देसाई ने पिछले साल नवंबर में ही मंदिर में दर्शन करने का एक असफल प्रयास किया था. 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर और अन्य धार्मिक स्थानों पर महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे को सात सदस्यीय पीठ के पास भेजने का आदेश दिया है. कोर्ट ने हालांकि 28 सितंबर, 2018 को दिए गए निर्णय पर रोक नहीं लगाई है, जिसमें 10 से 50 साल आयुवर्ग के बीच की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया था.

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर अचानक से लोगों को ध्यान तब गया जब साल 2006 में मंदिर के मुख्य ज्योतिषि परप्पनगडी उन्नीकृष्णन ने कहा कि मंदिर में स्थापित अयप्पा अपनी ताकत खो रहे हैं और वह इसलिए नाराज हैं, क्योंकि मंदिर में किसी युवा महिला ने प्रवेश किया. इसके बाद ही कन्नड़ एक्टर प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने दावा किया था कि उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ और उनकी वजह से अयप्पा नाराज हुए.

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दो पक्षों के अपने-अपने विचार हैं. एक पक्ष का कहना है कि महिलाओं को बराबरी का हक मिलना चाहिए और उनकी एंट्री मंदिर में होनी चाहिए. क्योंकि ईश्वर सभी के लिए हैं और इसलिए पूजा का हक भी सभी को मिलना चाहिए. वहीं, दूसरा पक्ष का कहना है कि सालों से जो परंपरा चली आ रही है उसके साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए. 

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