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नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हुई दो शेरनी की मौत, वन विभाग में मचा हड़कंप

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एशियाटिक बाघिन सुजैन की मौत के बाद आईवीआरआई के चिकित्सकों ने उसके विसरा में केनाइन डिस्टेंपर वायरस पॉजिटिव पाया था.

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हुई दो शेरनी की मौत, वन विभाग में मचा हड़कंप
बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे दर्जनों वन्यजीवों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है.

रौशन शर्मा/जयपुर: नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 2 दिन में दो मौत हो जाने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है. 2 दिन पहले एशियाटिक शेरनी सुजैन की मौत हुई और आज अचानक 10 महीने की भाग्य रिद्धि ने दम तोड़ दिया. सुजैन के विसरा में केनाइन डिस्टेंपर वायरस पॉजिटिव आने के बाद इस बात की आशंका है खड़ी हो गई है कि कहीं रिद्धि की मौत भी इसी वायरस की वजह से तो नहीं हुई. अगर ऐसा है तो बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे दर्जनों वन्यजीवों  के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है.

बता दें कि नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में एशियाटिक बाघिन सुजैन की मौत के बाद आईवीआरआई के चिकित्सकों ने उसके विसरा में केनाइन डिस्टेंपर वायरस पॉजिटिव पाया था. अब सुजैन की मौत के बाद उसके विसरा सैंपल को एक बार फिर आईवीआरआई और अन्य लैबोरेट्रीज में भेजा गया है. इसी बीच आज 10 माह के बाघिन रिद्धि की अचानक मौत हो गई. रिद्धि का पोस्टमार्टम किया गया है और उसके विसरा सैंपल भी आईवीआरआई और अन्य लैबोरेट्रीज में भेजे जा रहे हैं. 

वन विभाग के मुताबिक आशंका इस बात की है कि रिद्धि के विसरा में भी कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पाया गया तो यह बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे दर्जनों वन्यजीवों के लिए बहुत बड़े खतरे का संकेत हैं. दरअसल, कुत्तों से फैला कैनाइन डिस्टेंपर वायरस शेर और बाघ के लिए खतरा बना गया है.  यह वायरस कभी भी उनपर कहर बरपा सकता है. अभी तक इसके संक्रमण से जूझ रहे शेर-बाघों को बचाने वाली कोई वैक्सीन तक नहीं है. ऐसे में कुत्तों के लिए बनी वैक्सीन के शेर और बाघ पर टेस्ट की अनुमति लेने की तैयारी चल रही है. इसके लिए आईवीआरआई ने मिनिस्ट्री ऑफ इंनवार्यन्मेंट और सेंट्रल जू अथॉरिटी को पत्र भेजा भी भेजा था. 

वहीं, इटावा लायन सफारी के शेर कुबेर में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के संक्रमण की पुष्टि के बाद वैक्सीन का मुद्दा गरमा गया है. दरअसल इस बीमारी को फैलाने वाले कुत्तों के लिए जरूर वैक्सीन बनाई गई है पर वैज्ञानिक इसे शेर-बाघों पर टेस्ट करने से घबरा रहे हैं.आईवीआरआई वाइल्ड लाइफ सेंटर के हेड प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया था कि वैक्सीन दो तरह से बनती है. एक वायरस को मारकर और दूसरा वायरस को अपंग बनाकर. कुत्तों के लिए बनाई गई कैनाइन डिस्टेंपर वैक्सीन लाइव एटीन्यूटेड वैक्सीन है. इसमें वायरस जिंदा रहता है पर इसमें बीमारी फैलाने की क्षमता खत्म कर दी जाती है. 

साथ ही, इस वायरस को लेकर शेर या बाघ खतरे में पड़ी प्रजातियों में सूचीबद्ध है, ऐसे में इनमें लाइव वैक्सीन की सेफ्टी टेस्टिंग में समस्या आ रही है. वैक्सीन की सेफ्टी टेस्टिंग शेर और बाघ पर नहीं हो पा रही है.  सेफ्टी टेस्टिंग के बाद ही इसको शेर-बाघ में लगाने की अनुमति मिलेगी. उधर, आईवीआरआई वैज्ञानिकों ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका के सेरेंगेटी और मसाई मारा में इस वायरस की वजह से आउटब्रेक आ चुका है.  वहां 20 प्रतिशत शेरों की मौत हो गई थी. 

वैज्ञानिकों का कहना है कि वाइरस इतना खतरनाक है कि अगर इसका संक्रमण फैल जाए तो काफी नुकसान हो सकता है. तीन वर्ष में सात से अधिक जानवरों की मौत पिछले तीन वर्षों के दौरान जंगली जानवरों में कैनाइन डिस्टेम्पर संक्रमण के सात से अधिक मामले आए हैं. आईवीआरआई में पिछले तीन वर्ष के दौरान देशभर से आए जानवरों के सैंपल में से दो रेड पांडा, दो शेर, दो तेंदुए और एक बाघ में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मिला था. इसमें बाघ पीलीभीत से था और रेडपांडा पश्चिम बंगाल से आया था. अब इटावा लायन सफारी जैसी सुरक्षित स्थान में रहने वाले कुबरे में यह वायरस पाया जाने से साफ हो गया है कि शेर वाकई इस वायरस के कारण खतरे में हैं. 

उधर, आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कैनाइन डिस्टेंपर वायरस कुत्तों में पाया जाता है. शेर या बाघ जंगल से निकलकर आबादी में कुत्तों को मार देते हैं तो संक्रमण हो जाता है. कुत्ते तेंदुए का आहार है और तेंदुओं को शेर-बाघ में आमना सामना होने पर मार देते हैं. ऐसे में यह संक्रमण हो जाता है, इसका इलाज भी बेहद मुश्किल है, क्योंकि यह सीधे नर्वस सिस्टम पर असर डालता है. अब 2 दिन में बायोलॉजिकल पार्क में 2 मौत हो जाने के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. वन विभाग के पास फिलहाल केनाइन डिस्टेंपर वायरस से लड़ने की कोई वैक्सीन या दवा मौजूद नहीं है. ऐसे में जल्द ही ठोस उपाय नहीं हुए तो नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वन्यजीवों का संकट जीवन खतरे में पड़ जाएगा.