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सीकर में कोचिंग कर रहे दो छात्रों ने की आत्महत्या, पुलिस ने किया मामला दर्ज

प्रशासन को इस सवाल को सकते में ड़ाल दिया है कि ऐसी कोौन सी समस्याएं बच्चों को परेशान कर रही है जिससे बच्‍चे आत्‍महत्‍या करने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

सीकर में कोचिंग कर रहे दो छात्रों ने की आत्महत्या, पुलिस ने किया मामला दर्ज
मनोचिकित्‍सकों का कहना है कि यह तनाव के कारण हो रहा है.

सीकर: राजस्थान के सीकर जिले में एक लाख से अधिक बच्‍चे सीकर जिले में कोचिंग संस्‍थाअनों में अपना भविष्‍य बनाने के लिए कोचिंग सेंटर में पढ़ाई कर रहे हैं. वहीं, छात्रों में पढ़ाई को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण पिछले दिनों दो बच्‍चों ने आत्‍महत्‍या कर ली. इस घटना ने पूरे प्रदेश को एक बार फिर झकढोर कर रख दिया. 

वहीं इस घटना ने कोचिंग सेंटर व प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं. प्रशासन को इस सवाल को सकते में ड़ाल दिया है कि ऐसी कोौन सी समस्याएं बच्चों को परेशान कर रही है जिससे बच्‍चे आत्‍महत्‍या करने के लिए मजबूर हो रहे हैं. खभर के मुताबिक सीकर के नालंदा छात्रावास में ग्‍यारहवी कक्षा के छात्र ने आत्‍महत्‍य कर ली. वहीं दो दिन पहले मैटिक्‍स कांचिंग सस्‍थान के छात्र ने भी आत्‍महत्‍या कर ली थी.

वहीं, मनोचिकित्‍सकों का कहना है कि यह तनाव के कारण हो रहा है. मनोचिकित्सकों की मानें तो अभिभावक बच्चों पर अपनी इच्‍छाएं थोप रहे हैं जिसके कारण लगातार बच्चे तनाव में आ रहे हैं. यही कारण है कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा तनाव हो रहा है और वह आत्‍महत्‍या की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं.

हालांकि, प्रशासन ने भी इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए इस पर कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रशासन का कहना है कि जल्‍द ही स्‍कूल व छात्रावास संचालकों की बैठक कर स्‍ट्रेस कम करने के लिए कहा जाएगा. साथ ही अन्‍य गति‍विधियों में भी बच्‍चों को इन्‍वॉल्‍व करने के लिए कहा जाएगा. स्कूलों में काउंसलिंग की भी व्यवस्था की जाएगी. साथ ही प्रशासन ने यह भी कहा है कि अब सभी कोंचिंग सेंटर में भी यह आदेश दिया जाएगा छात्रों को तनाव से दूर रखने के लिए काउंसलिंग सेशन दिया जाए. 

इस मामले में बाल कल्‍याण समिति के पदाधिकारियों कमलकांत शर्मा का कहना है कि समिति की ओर से जल्‍द ही स्‍कूल संचाकलों व छात्रावासों के संचालकों से मीटिंग करेगी. भयमुक्‍त व तनावमुक्‍त कैसे पढाई की जाए इस बारे में बताएगी ताकि आत्‍महत्‍या की घटनाओं पर अंकुश लग सके.

वहीं, मनोवैज्ञानिक के मुताबिक वर्तमान में देखा जा रहा है कि संस्‍थानों में बच्‍चों में तनाव महसूस किया जा रहा है. रैंकिंग के चक्‍कर में तनाव में आ रहे है. वहीं यह घटनाएं कोटा के साथ सीकर में भी देखने को मिल रही है. सभी संसथानों के संचालकों के साथ मीटिंग की जाएगी और और उन्‍हें बताया जाएगा कि बच्चों को तनाव से दूर रखने के लिए मोटिवेशन सेशन रखा जाए.