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उदयपुर: बेसहारा महिला को सरकार की मदद की दरकार, दर दर की ठोकरें खाने को है मजबूर

अनाथ महिला के पिता का प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 2017-18 में मकान जरूर पास हुआ था. जिसकी पहली किस्त 30,000 रुपए मिले थे.

उदयपुर: बेसहारा महिला को सरकार की मदद की दरकार, दर दर की ठोकरें खाने को है मजबूर
इस महिला के पास न रहने को मकान है न खाना खाने को खाना है.

उदयपुर: जिले के कोटड़ा इलाके की एक महिला आज भी टकटकी की निगाहों से सरकारी योजना के लाभ का इंतजार करती उम्मीद लगाए बैठी हैं लेकिन सरकारी योजना का लाभ उस महिला तक नहीं पहुंच पाने का सबसे बड़ा लापरवाही का कारण सामने आया है. सरकार द्वारा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में गरीब जनता के उत्थान के लिए कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजर इस महिला की पीड़ा पर अब तक नहीं पड़ी है. 

जिसका खामियाजा यह महिला दर-दर की ठोकरें खाकर भुगत रही है. आपको बता दें कि इस महिला के पास न रहने को मकान है न खाना खाने को खाना है. कई बार तो महिला को खुले में सोना और भूखा सोना भी एक मजबूरी सा बन गया है. गांव वालों की माने तो महिला की हालत को देख आस पास पड़ोसी इस महिला की देखभाल में जरूर जुट गए हैं. जो महिला को रात्रि में विश्राम के लिए अपने घर में पनाह देते हैं.

वहीं इस भूखे पेट की भूख मिटाने के लिए खाने की व्यवस्था भी आस-पड़ोस के लोग करते हैं लेकिन सरकार द्वारा इस महिला को किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिलना सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना के दावे करने वाले अफसरशाही की पोल खोलता नजर आ रहा है. आपको बता दें कि कोटड़ा तहसील के महाडी पंचायत के होली फला गांव में यह शरीर से कम विकसित  महिला लखी पिता होना बंबोरिया आज भी पेंशन, राशन, मकान, सहित सरकार की सभी योजनाओं से वंचित है. 

अनाथ महिला के पिता का प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 2017-18 में मकान जरूर पास हुआ था. जिसकी पहली किस्त 30,000 रुपए मिले थे. जिससे कुछ कार्य होने के दौरान ही अस्थमा जैसी बीमारी से ग्रस्त इस महिला के पिता का देहांत हो गया. वहीं माता भूखी देवी की लकवा ग्रस्त बीमारी के चलते मौत हो गई. इसके बाद लकी नाम की महिला पूरे परिवार में एक अकेली से रह गई. 

शारीरिक रुप से दिव्यांग कमजोर लखी आज रहने को मकान और खाने को अनाज की मोहताज हो रही है. अब देखने वाली बात तो यह है कि इस महिला की पीड़ा को सुन सरकार के नुमाइंदे कब तक इस महिला की पीड़ा को दूर कर पाएंगे. शारीरिक रूप से विकसित नहीं होने से महिला की शादी नहीं हो पाई है. इस कारण ये महिला आज भी अनाथ बन सरकारी योजना के लाभ का इंतजार कर रही है.