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उदयपुर: सरकारी घोषणा के पांच साल बाद भी नहीं बने आईटीआई के भवन, छात्र परेशान

प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने वर्ष 2014-15 में डूंगरपुर जिले में 7 सरकारी आईटीआई की घोषणा की थी.

उदयपुर: सरकारी घोषणा के पांच साल बाद भी नहीं बने आईटीआई के भवन, छात्र परेशान
बिछीवाड़ा में आईटीआई का काम 10 प्रतिशत केवल ही हुआ है.

अखिलेश शर्मा/डूंगरपुर: प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में तकनिकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भले ही हर ब्लॉक में आईटीआई खोल दी है, लेकिन इसे लेकर सरकार और उसके नुमाइंदे गंभीर नजर नहीं आ रहे है. यही वजह है कि सरकार की ओर से 2014 से लेकर 2018 तक जिले में 8 सरकारी आईटीआई की घोषणा की गई लेकिन अभी तक एक भी आईटीआई का काम पूरा नहीं हुआ है. इतना ही नहीं सरकार ने वाहवाही बटोरने के लिए बिना भवन के ही आईटीआई में एडमिशन भी दे दिए जिसके चलते तकनीकी शिक्षा के सपने देख रहे बच्चों को डूंगरपुर और सागवाड़ा में पढ़ाई करने के लिए दौड़ लगानी पड़ रही है. 

प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले में युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए तत्कालीन राज्य सरकार ने वर्ष 2014-15 में डूंगरपुर जिले में 7 सरकारी आईटीआई की घोषणा की. इसमें झोथरी, सीमलवाड़ा, चिखली, गलियाकोट, बिछीवाड़ा, दोवड़ा, आसपुर में आईटीआई को मंजूरी दी गई. इसके बाद वर्ष 2017-18 में एक और साबला आईटीआई की घोषणा की गई. सरकार ने इन आईटीआई के भवन निर्माण और उपकरण के लिए प्रत्येक आईटीआई के लिए 9-9 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा भी की गई. इसके बाद सरकार के आदेशों की पालना में जिले में इन आईटीआई का काम शुरू कर दिया गया, लेकिन 5 साल बीत जाने के बाद भी जिले में 8 में से एक भी आईटीआई का काम पूरा नहीं हो सका है. सभी आईटीआई में काम आधे अधूरे ही हो सके है. 

जिले में आईटीआई के निर्माण कार्यो पर नजर डाले तो सभी के काम आधे अधूरे पड़े है. झोथरी आईटीआई का काम 80 प्रतिशत, सीमलवाड़ा का 50 प्रतिशत, चिखली, गलियाकोट का 80-80 प्रतिशत, आसपुर में 90 प्रतिशत, दोवड़ा में 25, साबला में 20 प्रतिशत काम ही हुआ है. जबकि बिछीवाड़ा में आईटीआई का काम 10 प्रतिशत केवल ही हुआ है. 

आईटीआई की घोषणा से लेकर सरकार ने शुरू करने तक सरकार वाहवाही बटोरती रही, लेकिन इससे अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ गई. सरकार ने बिना किसी तैयारी के ही जिले में 8 में से 7 आईटीआई में 2017-2018 में तकनीकी शिक्षा के लिए अभ्यर्थियों के एडमिशन कर लिए. हर आईटीआई में एक-एक यूनिट शुरू की गई जिसमें 21-21 विद्यार्थियों को एडमिशन दिए गए, जबकि एक भी भवन तैयार नहीं हुआ था. 

ऐसे में सरकार ने उन आईटीआई के बच्चों को एडमिशन देने के बाद पढ़ाई के लिए डूंगरपुर ओर सागवाड़ा आईटीआई शिफ्ट कर दिया. झोथरी, सीमलवाड़ा, बिछीवाड़ा, दोवड़ा ओर आसपुर आईटीआई के अभ्यर्थियों को डूंगरपुर आईटीआई में शिफ्ट किया गया, जबकि गलियाकोट व चिखली आईटीआई के विद्यार्थियों को सागवाड़ा में पढ़ाई के लिए शिफ्ट कर दिया. ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है और आर्थिक नुकसान भी हो रहा है.

बहरहाल, सरकार ने तकनीकी शिक्षा को आदिवासी क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए आईटीआई खोल तो दी लेकिन समय पर भवनों के तैयार नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खैर अब देखना होगा की सरकार इन अधूरे पड़े भवनों के काम को कब तक पूरा करवाकर इन विद्यार्थियों के सपने को पूरा कर पाती है.