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जवाहर कला केंद्र में बरसा संगीत का अनोखा रस, लोककला और शास्त्रीय संगीत में डूबे श्रोता

जयपुर के जवाहर कला केंद्र में विभिन्न लोक संगीत के सम्मेलन को देखकर सभागार में मौजूद लोग भी झूम उठे. लोकरंग कार्यक्रम का समापन अतिरिक्त ‘स्वर लहरी‘ की प्रस्तुति के साथ होगा.

जवाहर कला केंद्र में बरसा संगीत का अनोखा रस, लोककला और शास्त्रीय संगीत में डूबे श्रोता
जयपुर के जवाहर कला केंद्र के कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार.

जयपुर: जवाहर कला केंद्र(Jawahar Kala Kendra) में चल रहे 'लोकरंग' में लोकनृत्य(Lok Nritya) और शास्त्रीय संगीत से जुड़ी प्रस्तुतियों में किए गए नवाचारों ने कलाप्रेमियों मंत्र मुग्ध कर दिया.

मध्यवर्ती में दिल्ली के पंडित हरीश गंगानी और उनके ग्रुप की प्रस्तुति ‘विलय (लय-विलय)‘ कार्यक्रम में महाराष्ट्र(Maharashtra) का लावणी और जयपुर घराने के कथक नृत्य के फ्यूजन ने दर्शकों पर गजब का जादू चलाया. दर्शक हर प्रस्तुति पर सम्मोहित होते चले गये. कार्यक्रम में लावणी और कथक की जुगलबंदी देखते ही बन रही थी. हर कलाप्रेमी कार्यक्रम का दिल खोलकर लुत्फ ले रहा था. जयपुर घराने के शुद्ध कथक की शिवपरण, परणे एवं चक्कर के अतिरिक्त शुद्ध लावणी लोकनृत्य का शानदार मिलन देखने को मिला. 

इसके बाद कलाकारों ने ‘धरती धोरा री‘ गीत पर कथक के भाव पक्ष का सुन्दर प्रदर्शन किया. मुख्य आकर्षणों में छत्तीसगढ का पंथी लोकनृत्य था, तो वहीं कर्नाटक के पूजा कुनिथा ने लोकरंग की शोभा बढ़ाई.

कर्नाटक से आए लिंगाईथारू समुदाय के लोक कलाकारों ने शक्ति मां को समर्पित करते हुए ‘पूजा कुनिथा नृत्य‘ पेश कर सभी को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया. इसके अतिरिक्त ‘लोकरंग‘ में राजस्थान का घूमर, लाल अंगी गैर नृत्य एवं भपंग प्रस्तुति के अलावा मध्यप्रदेश का बधाई, ओडिशा का गोटी पुआ, पंजाब का भांगडा, मणिपुर का पुंग चोलम और गुजरात के सिद्धि धमाल नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियां दी गयीं. 

लोकरंग कार्यक्रम का समापन अतिरिक्त ‘स्वर लहरी‘ की प्रस्तुति के साथ होगा. महानिदेशक (तकनीकी), फुरकान खान के निर्देशन में आयोजित इस प्रस्तुति में 40 से अधिक लोक वाद्य यंत्रों के समवेत स्वर सभी को आनंदित करेंगे.

Ashish Chaubey, News Desk