close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए इस शिक्षक ने की अनूठी पहल

इनकी पहल से राजस्थान के 29 जिलों में 1000 से अधिक विद्यालयों में कन्या पूजन के कार्यक्रम हुए.

मासूम बेटियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए इस शिक्षक ने की अनूठी पहल
संदीप जोशी के शैक्षिक नवाचारों ने उनको देशभर में एक अलग पहचान दी है. (फोटो साभार: Facebook)

जालौर: सरकारी शिक्षक (Government teacher) संदीप जोशी के शैक्षिक नवाचारों ने उनको देशभर में एक अलग पहचान दी है. कभी बच्चों के बस्ते का बोझ कम करना, तो कभी कन्या पूजन को मनोवैज्ञानिक शिक्षा पद्धति के फार्मूले को कई स्कूलों में लागू किया गया. साथ ही शैक्षिक स्तर (Level of Education) में सुधार के केंद्र व राज्य सरकारों (State Government)को अब तक दिए गए सुझाव भी लागू किए गए हैं.

हाल के दिनों में मासूम बेटियों के साथ हो रही दुष्कर्म की घटनाओं को रोकने के लिए भी उन्होंने अभिनव पहल की है. जालौर जिले के संदीप जोशी ने कन्या पूजन प्रोग्राम शुरू किया. यह अभियान पिछले 4 वर्षों से चल रहा है. इस बार पांचवा वर्ष है. पिछले वर्ष राजस्थान के 29 जिलों में 1000 से अधिक विद्यालयों में कन्या पूजन के कार्यक्रम हुए. जिसमें लगभग दो लाख विद्यार्थी और 15 हजार शिक्षक इसमें सम्मिलित हुए. 

स्वयं प्रेरणा से चल रहा कार्यक्रम
यह अभियान शिक्षकों द्वारा स्वयं प्रेरणा से चलने वाला कार्यक्रम है. इसके लिए ना कोई संगठन, ना कोई बैनर, ना कोई सरकारी बजट है. विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा परिवार और कर्तव्य भाव के साथ यह आयोजन हो रहा है.

नारी सम्मान का संस्कार देने की पहल
प्रदेश में बढ़ते दुष्कर्म और बलात्कार के विरुद्ध एक जंग के तहत शिक्षकों ने बच्चों को बचपन से नारी सम्मान का संस्कार देने के लिए यह पहल की है. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि हम शिक्षक जिन विद्यालयो में पढ़ा रहे हैं कम से कम वहां का छात्र अपने जीवन मे कभी छेड़छाड और दुष्कर्म के बारे में कभी नहीं सोचे.

होता है सार्वजनिक पूजन सम्मान अभिनंदन 
इस अभियान के अंतर्गत बिना किसी भेदभाव के विद्यालय में पढ़ने वाली कक्षा 1 से 5 तक की सभी छात्राओं का पूरा विद्यालय परिवार सारे शिक्षक और सारे बालक मिलकर सार्वजनिक पूजन सम्मान अभिनंदन करते हैं. उनकी चरण वंदना करते हैं और उन्हें शैक्षणिक सामग्री भेंट करते हैं. 

नारी सम्मान सिखाने का है प्रायोगिक तरीका
उनका मानना है कि कन्या पूजन कोई धार्मिक आयोजन नहीं होकर नारी सम्मान सिखाने का प्रायोगिक तरीका है. यत्रनार्यस्तु पूज्यंते एक सिद्धांत (Theory) है. कन्या पूजन उसका प्रैक्टिकल स्वरूप हैं. जो बालक अपने छात्र जीवन में आठ-दस बार सार्वजनिक और सामूहिक रूप से कन्या पूजन कर लेगा तो वह अपने जीवन में इन बुराइयों से दूर रहेगा.