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खुला लिफाफा और गायब मिला 1 करोड़ से ज्यादा का स्टांप, जयपुर ट्रेजरी में मची हलचल

स्टांप(Stamp) की किल्लत से जूझ रहे स्टांप वेंडरों(Stamp Vendor) और उपभोक्ताओं (Customer) के जयपुर कोषालय में 1 अरब 70 करोड के स्टांप पेपर पहुंची. लेकिन स्टांप पेपर लेकर पहुंचे ट्रेजरी के अधिकारी और कर्मचारियों की नींद 1 करोड 28 लाख के एक लिफाफे ने उड़ा दी. 

खुला लिफाफा और गायब मिला 1 करोड़ से ज्यादा का स्टांप, जयपुर ट्रेजरी में मची हलचल
कलक्ट्रेट स्थित कोषाकार कार्यालय से 500 रुपए के स्टांप का एक बंडल गुम था.

जयपुर: स्टांप(Stamp) की किल्लत से जूझ रहे स्टांप वेंडरों (Stamp Vendor) और उपभोक्ताओं (Customer) के जयपुर कोषालय में 1 अरब 70 करोड के स्टांप पेपर पहुंची. लेकिन स्टांप पेपर लेकर पहुंचे ट्रेजरी के अधिकारी और कर्मचारियों की नींद 1 करोड 28 लाख के एक लिफाफे ने उड़ा दी. 

अजमेर से देर रात करीब 170 करोड के स्टांप पेपर के लिफाफे लेकर जब ट्रेजरी के अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे तो उनके होश उड गए. जब काउंटिंग की गई तो उनमें से पांच-पांच सौ रूपए के 1 करोड 28 लाख रूपए का लिफाफा गायब मिला. नए स्टांप पेपर आने की खुशी एक समय काफूर हो गई थी जब एक करोड 28 लाख का रूपए की कीमत के स्टांप का एक बंडल रिकॉर्ड से गायब मिला. 

बंडल गुम देख कर्मचारियों के उड़े होश
कलक्ट्रेट स्थित कोषाकार कार्यालय से 500 रुपए के स्टांप का एक बंडल गुम हो गया. स्टाम्प की गिनती करते समय जैसे ही कर्मचारियों को इस बात की खबर लगी तो सभी के होश उड़ गए. क्योंकि 500 रुपए के एक ही बंडल की कीमत डेढ़ करोड़ रुपए है.

छान मारा पूरा दफ्तर
इसके बाद कर्मचारियों ने पूरे कार्यालय को छान मारा, लेकिन बंडल नहीं मिला. इसकी सूचना कर्मचारियों ने अधिकारियों को दी. डेढ़ करोड़ के स्टाम्प गुम होने की खबर सुनकर ही अधिकारियों के होश उड़ गए. 

और जानिए कहां छूपा था स्टांप
देर रात तीन घंटे तक कलक्ट्रेट परिसर और कार्यालय में बंडल की छानबीन की गई. इस दौरान जिस वाहन में स्टाम्प आए, उसके चालक को फोन किया तो मोबाइल बंद आया. ऐसे में कर्मचारी -अधिकारी और परेशान हो गए. अंत में अधिकारियों ने कर्मचारियों को एफआईआर कराने तक की सलाह दे डाली. इसके बाद ट्रेजरी विभाग के कर्मचारियों ने वाहन के बारे में पता कि वह कलक्ट्रेट परिसर स्थित जिला पूल में ही मिल गया. वाहन में जाकर छानबीन की तो बंडल सीट के पीछे पड़ा मिला. बंडल मिलने के अधिकारी और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली.

भूल जाने या अनजाने में और परिणाम
दरअसल जयपुर में पिछले छह महीने से स्टाम्प की किल्लत चल रही है. इस बीच ट्रेजरी कार्यालय में एक दिन पहले ही अजमेर से 1 अरब 70 करोड़ के स्टाम्प आए हैं. जिस वाहन से स्टाम्प उतारे गए. उसी वाहन में भूलवश कर्मचारियों से एक बंडल रह गया. इसके बाद चालक वाहन को जिला पूल में खड़ा कर चला गया.

स्टांप की कमी हुई दूर
उधर पिछले छह महीने से जयपुर में चल रही स्टाम्प की किल्लत अब छह माह के लिए दूर हो गई है. वेंडर अगर किल्लत का नाम लेकर ज्यादा वसूले तो आप सावधान रहना. जयपुर में हाल ही 170 करोड़ के स्टाम्प आए हैं. अब आगामी छह महीने तक स्टाम्प की कोई किल्लत नहीं होगी.

दरअसल, जयपुर में 500, 100 और 50 के स्टाम्प की खपत ज्यादा है. पिछले छह महीने से तीनों तरह के स्टाम्प कम आ रहे हैं. ऐसे में वेंडर्स जनता से स्टाम्प की कीमत से ज्यादा रुपए ले रहे थे. अब स्टाम्प आने के बाद किल्लत खत्म हो गई है.

कोषालयों के अफसर यह कहकर स्टांप विक्रेताओं को टरका रहे हैं कि आगे से ही स्टांप नहीं आ रहे. स्टापों की कालाबाजारी की शिकायतें उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग हरकत में आया और विभिन्न दरों के स्टांपों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुट गए.

सरकार से मिली फटकार के बाद विभाग ने स्टांप की आपूर्ति तो करवा दी लेकिन यह आपूर्ति नियमित हो. इसके लिए ठोस कदम उठाने के मामले में विभाग यह कहकर आश्वस्त कर रहा है कि अब आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं आएगी.

बहरहाल, स्टांप पेपर की खेप आने की खुशी तो उन लोगों के लिए हैं जो की 100 रूपए के स्टांप के 200 रूपए तक चुका रहे हैं. लेकिन अजमेर से जयपुर आया स्टांप पेपर का 1 करोड 28 लाख का बंडल नहीं मिलता तो जयपुर ट्रेजरी के कर्मचारियों को चुकाना महंगा पड जाता. कर्मचारी तो स्टांप पेपर आने की खुशी से ज्यादा बंडल मिलने की खुशी मना रहे हैं. वो तो अफसरों को सिर्फ ये ही कह रहे हैं साहब हमारा घर भी बिक जाता तो हम नहीं चुका पाते.