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मुंबई की प्यास बुझाने वाले तालाबों में सिर्फ 6% पानी बचा

तालाबों में फिलहाल सिर्फ 6% पानी बचा है, जो कि अगले 23 दिन की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त है. इसके बाद रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मुंबई को 31 जुलाई तक जलापूर्ति की जा सकती है. मुंबई को रोजाना तकरीबन 3800 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई किया जाता है.

मुंबई की प्यास बुझाने वाले तालाबों में सिर्फ 6% पानी बचा

मुंबई: मायानगरी मुंबई जलसंकट से जूझ रही है. मुंबई को जल आपूर्ति करने वाले तालाबों में फिलहाल सिर्फ 6% पानी बचा है, जो कि अगले 23 दिन की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त है. इसके बाद रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मुंबई को 31 जुलाई तक जलापूर्ति की जा सकती है. मुंबई को रोजाना तकरीबन 3800 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई किया जाता है.

मुंबई से सटे पालघर के ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर कुएं, नदी, तालाब सूख गए हैं. यहां आदिवासी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. पालघर जिले में जव्हार, मोखाडा, वाडा, तलासरी, दहाणू, विक्रमगड, कासा आदि क्षेत्रों में भीषण गर्मी से कुएं, तालाब, नदी, झरने सब सूख गए हैं. इससे यहां के लोगों को पानी की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अप्रैल में ही पानी की किल्लत शुरू हो गई थी. यहां की महिलाओं को सुबह उठकर दो से तीन किमी दूर जाकर पानी लाना पड़ता है. भीषण गर्मी व उमस की वजह से खेती को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है.

मुंबई से सटे वसई-विरार मनपा के सामने भी जलापूर्ति एक बड़ी समस्या के रूप में देखी जा रही है. नालासोपारा (पूर्व) के धानिव बाग, वाकनपाडा, नवजीवन, सातीवली, भोयदापाडा, वसई फाटा, कामण, चिंचोटी, विरार (पूर्व) के चन्दनसार, कातकरी पाडा, भाटपाडा, विरार फाटा, हाइवे आदि इलाकों में कुएं और बोरिंग का पानी सूख गया है.

मुंबई के गोरेगांव इलाके में रहने वाले समीर शितप वैसे तो पहले एक बाल्टी पानी से अपनी कार को धोया करते थे, लेकिन अब पानी की किल्लत को चलते उन्होंने एक नायाब तरीका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. उन्होंने एक स्कूल खरीदा है जिसकी मदद से अब महज एक बोतल पानी से ही वे अपनी कार को धोकर गुजारा कर लेते हैं.