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राजस्थान: लोगों के लिए हथियार रखना बना स्टेटस सिंबल, जयपुर में बने 638 लाइसेंस

साल 2013 से 2019 तक जिलेवार नए लाइसेंस जारी करने की रिपोर्ट पेश में पिछले सात साल में प्रदेश में सबसे ज्यादा हथियारों के लाइसेंस जयपुर में जारी किए गए हैं.

राजस्थान: लोगों के लिए हथियार रखना बना स्टेटस सिंबल, जयपुर में बने 638 लाइसेंस
लोग आत्मरक्षा का कारण बताकर लाइसेंस प्राप्त कर महंगे हथियार खरीदने लगे हैं.

जयपुर: सुरक्षा, हथियार, हथियारों का लाइसेंस, बॉडीगार्ड ये सब कायदे से इंसानी जान की हिफाजत के लिए है. मगर कई बार हिफ़ाज़त की ये जरूरी चीजें, शौक और जलवे में तब्दील हो जाती हैं. पिछले कुछ सालों में महंगी गाड़ी, फोन के साथ ही लाइसेंसी हथियार रखना भी स्टेटस सिंबल माना जाने लगा है. लोग आत्मरक्षा का कारण बताकर लाइसेंस प्राप्त कर महंगे हथियार खरीदने लगे हैं.

खबर के मुताबिक, राजधानी जयपुर के लोगों में हथियार रखने का शौक बढ़ने लगा है. पिछले सात साल में प्रदेश में सबसे ज्यादा हथियारों के लाइसेंस जयपुर में जारी किए गए हैं. साल 2013 से 2019 तक जिलेवार नए लाइसेंस जारी करने की एक रिपोर्ट पेश की गई है. इसका विश्लेषण करने पर पाया कि पिछले सात साल में प्रदेश में सबसे ज्यादा हथियारों के लाइसेंस जयपुर में जारी किए गए. सात साल में जयपुर पुलिस आयुक्त और जिला प्रशासन की ओर से 638 हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए. हथियार लाइसेंस मामले में चर्चित रहे श्रीगंगानगर प्रदेश में दूसरे पायदान पर आता है. पिछले सात साल में यहां 467 हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए हैं. 

वहीं, तीसरे नम्बर पर जोधपुर जिले का आता है जहां 358 लाइसेंस जारी दिए गए हैं. पिछले सात साल में सबसे कम लाइसेंस अलवर में जारी किए गए हैं. यहां सिर्फ 19 लाइसेंस जारी किए गए. कोटा संभाग की बात करें तो सात साल में सबसे ज्यादा हथियारों के लाइसेंस बारां जिले में जारी किए गए. यहां 198 लाइसेंस जारी किए गए. जबकि कोटा मुख्यालय पर 188 लाइसेंस जारी किए गए हैं. वहीं बूंदी में 34 और झालावाड़ में 69 लाइसेंस जारी किए गए हैं.

आज-कल लोग की आत्मरक्षा के लिए नहीं बल्कि स्टेट सिंबल के लिए लाइसेंस लेने में लगे हैं. वैसे तो प्रशासन द्वारा हथियार का लाइसेंस उसे दिया जाता है जिसे किसी से जान का खतरा हो या फिर कोई बड़ा उद्योगपति हो, लेकिन भेड़चाल के चलते आज कल छोटा मोटा दुकानदार भी हथियार रखने का शौक पाल रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजस्थान में हथियार लाइसेंस के आंकडों से जबकि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों का तो कोई हिसाब ही नहीं है. जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक लाइसेंस के लिए लंबी प्रक्रिया है. 2013 से 2019 तक प्रदेश में नये हथियारों के 3620 लाइसेंस जारी हुए. इनमें जयपुर जिले में सबसे ज्यादा जयपुर जिले में 638 हथियारों के लाइसेंस जारी किए गए. वहीं, करीब 100 से ज्यादा पेडिंग चल रहे हैं.

हालांकि, प्रशासन हथियार लाइसेंस देने में सख्ती की बात कहता है लेकिन फिर भी हथियार लाइसेंस जारी करने में जयपुर जिले का पहला नंबर है. जयपुर एडीएम दक्षिण धारा सिंह मीना ने बताया की विरासत, व्यापारी, उद्यमी, बैंक संस्थागत, वित्तीय संस्थान, विभिन्न विभागों के ऐसे कर्मी जो प्रवर्तन में कार्यरत हैं. सैनिक, अर्द्धसैनिक, पुलिसकर्मी, एमएलए, एमपी, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाज आदि को वरियता दी जाती है. साथ ही, जरूरतमंद लोगों को ही शस्त्र लाइसेंस में प्राथमिकता दी जा रही है. जयपुर जिला सबसे बडा जिला है तो इनकी संख्या भी ज्यादा है.

वहीं, ऐसा कई बार हुआ है जब लोगों द्वारा इस तरह अंधाधुंध हथियार लाइसेसं लेने का खामियाजा कई बार आम लोगों को भी भुगतना पड़ता है. विवाह शादियों के दौरान पैलेसों में लोग अपने हथियारों से अकसर फायर करते हैं, जिस कारण शराबी आदमी के हाथ से चली गोली विवाह में शामिल होने आए किसी को भी लग सकती है. ऐसा कई बार हो भी चुका है तथा कई लोग अपनी जान भी गवां चुके हैं.