ZEE जानकारी: जानें फिरोज गांधी की कहानी

आज हम भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार... यानी गांधी परिवार के एक भुला दिए गए गांधी के बारे में बताएंगे. और इस गुमनाम गाँधी का नाम है फिरोज़ जहांगीर गांधी.

ZEE जानकारी: जानें फिरोज गांधी की कहानी

हमारे शास्त्र कहते हैं कि पिता आकाश से ऊंचा होता है और मां धरती से बड़ी. लेकिन सत्ता का लालच लोगों को अंधा बना देता है और हमारे देश की राजनीति में, कई बार सत्ता की कुर्सी, मां और पिता से भी बड़ी हो जाती है. और इसी सत्ता के लिए नेता, कई बार अपना DNA पहचानने से भी इनकार कर देते हैं. 

आज हम भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक परिवार... यानी गांधी परिवार के एक गुमनाम गांधी का DNA टेस्ट करेंगे. और इस गुमनाम गाँधी का नाम है फिरोज़ जहांगीर गांधी. ये नाम शायद आपने सुना होगा.

हम उन्हीं फिरोज़ गांधी की बात कर रहे हैं जो भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के दामाद, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पिता, और कांग्रेस पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी के दादा थे. लेकिन इन सभी लोगों ने फिरोज़ गांधी को अपने जीवन से चुपचाप Delete कर दिया. भारत में लोग अपने पूर्वजों पर गर्व करते हैं लेकिन ये बड़े आश्चर्य की बात है कि गांधी परिवार फ़िरोज़ गांधी को भूल गया. 

आपने फिरोज़ गाँधी के समाधि स्थल के बारे में नहीं सुना होगा. क्योंकि गांधी परिवार का कोई सदस्य हर साल वहां नहीं जाता. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी..... जवाहर लाल नेहरू के समाधि स्थल शांति वन जाते हैं, महात्मा गाँधी के समाधि स्थल राज घाट जाते हैं. इंदिरा गांधी की समाधि, शक्ति स्थल जाते हैं, और राजीव गांधी के समाधि स्थल वीर भूमि भी जाते हैं. ये सारे समाधि स्थल दिल्ली में है. लेकिन फिरोज़ गांधी के समाधि स्थल पर कोई नहीं जाता. ऐसे बहुत कम मौके आए हैं जब गांधी परिवार का कोई सदस्य फिरोज़ गांधी की समाधि पर गया हो.

ये राजघाट और शांतिवन वाली राजनीति है.. जिसने फिरोज़ गांधी को तन्हा और अकेला छोड़ दिया.
आपको ढूंढने पर भी फिरोज़ गांधी के नाम पर कोई डाक टिकट नहीं मिलेगा. उनकी पुण्यतिथि पर अखबारों में विज्ञापन नहीं छपते. उनके नाम पर सरकारी योजनाओं के नाम नहीं रखे गये. ऐसा लगता है जैसे हर कोई ये चाहता था कि फिरोज़ गांधी हमेशा चर्चाओं और हेडलाइन्स से दूर रहें.

आखिर इसकी वजह क्या है ? ये जानने के लिए Zee News की Team ने प्रयागराज का दौरा किया . प्रयागराज ही वो जगह है जहां गांधी परिवार की पुश्तैनी हवेली है... जिसे आनंद भवन कहा जाता है . देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी प्रयागराज में ही पैदा हुए थे . 

लेकिन गांधी वंश, पंडित जवाहर लाल नेहरू से शुरू नहीं होता. राहुल गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, संजय गांधी और इंदिरा गांधी को गांधी Surname, पंडित नेहरू से नहीं बल्कि फिरोज़ जहांगीर गांधी से मिला है . 

फिरोज़ जहांगीर गांधी, ही गांधी परिवार के Founding Father यानी संस्थापक हैं . फिरोज़ जहांगीर गांधी का DNA ही गांधी परिवार का असली DNA है . लेकिन गांधी परिवार और कांग्रेस ने कभी भी फिरोज़ गांधी को वो सम्मान नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए था. आज हम ये समझने की कोशिश करेंगे कि गांधी परिवार ने ऐसा क्यों किया ? 

फिरोज गांधी की पूरी ज़िंदगी को आप एक वाक्य में बयां कर सकते हैं. फिरोज़ गांधी देश के सबसे भाग्यशाली और सबसे गुमनाम नेता थे . 
क्या आप दुनिया के किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जानते हैं जिसके ससुर किसी देश के पहले प्रधानमंत्री हों . जिसकी पत्नी भी प्रधानमंत्री हों और जिसका बेटा भी भविष्य में प्रधानमंत्री बना हो और जिसका पोता अब 2019 में प्रधानमंत्री पद का दावेदार हो. 

फिरोज़ गांधी के ससुर, पंडित जवाहर लाल नेहरू 17 वर्षों तक देश के प्रधानमंत्री रहे . उनकी पत्नी इंदिरा गांधी करीब 16 वर्षों तक देश की प्रधानमंत्री रहीं . उनके पुत्र राजीव गांधी 5 वर्ष तक देश के प्रधानमंत्री रहे, उनकी पुत्रवधु सोनिया गांधी, 10 वर्षों तक Super Prime Minister की तरह रिमोट कंट्रोल से देश को चलाती रहीं . और आज फिरोज गांधी के पौत्र राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं. अगर देखा जाए तो आज़ादी के बाद 71 वर्षों में से 48 वर्षों तक फिरोज़ गांधी के ससुर या उनके परिवार ने ही देश पर राज किया . ये बहुत बड़ी बात है . लेकिन इसके बाद भी फिरोज़ गांधी.. एक गुमनाम गांधी बन गये.

फिरोज़ गांधी की गुमनामी तलाश करते हुए हम प्रयागराज के पारसी कब्रिस्तान तक पहुंचे. यहां 100 से ज़्यादा कब्रें मौजूद हैं . और इन्हीं में से एक कब्र है... फिरोज़ गांधी की . इससे पहले आपने कभी भी किसी News Channel पर गांधी वंश के संस्थापक फिरोज़ गांधी की कब्र नहीं देखी होगी . 

इन तस्वीरों को देखकर आज पूरे देश के मन में ये सवाल आया होगा कि राहुल गांधी खुद को दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताते हैं तो फिर उनके दादा की कब्र कैसे हो सकती है ?

लेकिन यहां इलाहाबाद नगर निगम का शिलालेख लगा हुआ है जिस पर लिखा है पारसी कब्रिस्तान . 

हमने ये पता लगाया कि ये शिलालेख कब लगवाया गया था? तो हमें ये जानकारी मिली कि वर्ष 2008-09 में इस क़ब्रिस्तान के जीर्ण उद्धार का काम...कांग्रेस के तत्कालीन मेयर जितेन्द्रनाथ सिंह ने करवाया था. पारसी कब्रिस्तान वाला ये शिलालेख भी उन्होंने ही लगवाया था . 

हिंदू धर्म के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के मरने पर उसका अंतिम संस्कार होता है . यानी मृत्यु के बाद शव को अग्नि के सुपुर्द कर दिया जाता है . लेकिन आप इस वक्त अपनी TV Screen पर कांग्रेस के अध्यक्ष, दत्तात्रेय गोत्र के ब्राह्मण और जनेऊधारी हिंदू.. राहुल गांधी के दादा की कब्र देख रहे हैं . 

आज इन तस्वीरों को देखकर आप आश्चर्य चकित हो रहे होंगे . आपके लिए ये समझना मुश्किल होगा कि आखिर किसी जनेऊधारी हिंदू के दादा की कब्र कैसे हो सकती है ? हम DNA में आपको इन सभी सवालों का जवाब देंगे . हमारे पास फिरोज़ जहांगीर गांधी का Birth Certificate भी है . हमने प्रयागराज में गांधी परिवार के पुरोहित से भी बात की है . हम राहुल गांधी के गोत्र का भी विस्तार से DNA टेस्ट करेंगे. लेकिन आज हम फिरोज़ गांधी की कब्र का विश्लेषण करेंगे . आज हमारा फोकस इस बात पर है कि फिरोज़ गांधी, एक गुमनाम गांधी कैसे बन गये ?
 

देश में फिरोज़ जहांगीर गांधी के धर्म को लेकर बहुत सारे दावे किए जाते हैं . लेकिन आज तक जो प्रमाण मिले हैं उनसे ये पता चलता है कि फिरोज़ गांधी एक पारसी थे . उनका जन्म 12 सितंबर 1912 को एक पारसी परिवार में मुंबई में हुआ था . उनका बचपन प्रयागराज में बीता . आज़ादी के पहले वो एक कांग्रेस कार्यकर्ता के रूप में काम करते थे . 

वर्ष 1942 में आनंद भवन में इंदिरा नेहरू और फिरोज़ गांधी की शादी हुई थी . हिंदू धर्म और पारसी धर्म के मुताबिक शादी के बाद पति के धर्म को ही पत्नी का धर्म मना जाता है . इंदिरा नेहरू ने, फिरोज़ गांधी के Surname गांधी को स्वीकार कर लिया था . लेकिन कांग्रेस के नेता गांधी परिवार को पारसी नहीं मानते हैं

8 सितंबर 1960 को दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से फिरोज़ गांधी का निधन हो गया था . दिल्ली के निगम बोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था . उनकी अस्थियों को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संगम पर प्रवाहित किया था . लेकिन उनके कुछ प्रतीकों को, प्रयागराज के पारसी कब्रिस्तान में भी दफनाया गया था . इसी आधार पर कांग्रेस ये दावा करती है कि फिरोज़ गांधी की कब्र नहीं है.. बल्कि समाधि है. क्योंकि कब्र में पूरा शरीर दफ़नाया जाता है जबकि समाधि में किसी प्रतीक को गाड़ा जाता है.

दिल्ली के निगम बोध घाट पर फिरोज़ गांधी का कोई स्मारक नहीं है . प्रयागराज में फिरोज़ गांधी की कब्र है लेकिन फिरोज़ गांधी की जयंती या पुण्यतिथि पर गांधी परिवार का कोई सदस्य फिरोज़ गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए नहीं आता है . फिरोज़ गांधी की कब्र के पास गंदगी फैली हुई है, शराब की बातलें पड़ी हैं और इसकी देखरेख भी सही तरीके से नहीं हो रही है . इस पारसी कब्रिस्तान की पीढ़ियों से देखरेख करने वाले कर्मचारी कहते हैं कि राहुल गांधी सिर्फ एक या दो बार अपने दादा की कब्र पर आए हैं . कुछ स्थानीय लोग कहते हैं कि सोनिया गांधी सिर्फ एक बार अपने ससुर फिरोज़ जहांगीर गांधी के दर्शन के लिए गई हैं . प्रयागराज में गांधी परिवार के करीबियों का कहना है कि इंदिरा गांधी एक बार भी फिरोज़ गांधी की कब्र पर नहीं आई थी. गांधी परिवार के सदस्य, फिरोज़ गांधी की कब्र पर इतनी कम बार आए हैं कि लोगों को इसके बारे में कुछ याद ही नहीं है . 

आपने देखा होगा... देश में जब भी इंदिरा गांधी या राजीव गांधी की जयंती या पुण्यतिथि का मौका आता है . तो गांधी परिवार और कांग्रेस के बड़े बड़े नेता, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समाधि स्थल पर जाकर फूल चढ़ाते हैं और उन्हें याद करते हैं . अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन छापे जाते हैं . करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं . लेकिन फिरोज़ गांधी की कब्र दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर प्रयागराज में है. वहां कोई स्मारक नहीं है . फिरोज़ गांधी की कब्र पर फूल चढ़ाने के लिए कांग्रेस के नेताओं की कतारें नहीं लगती हैं. प्रयागराज के इस पारसी कब्रिस्तान में हर कब्र पर हर वर्ष किसी ना किसी परिवार का सदस्य आकर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करता है . लेकिन फिरोज़ गांधी की कब्र को गुमनामी के अंधेरे ने ढक लिया है . 
 
भारत की सत्ता पर 48 वर्षों तक गांधी-नेहरू परिवार का राज रहा .

इन 48 वर्षों में गांधी परिवार के सदस्यों और उनके करीबियों के डाक टिकट जारी हुए . लेकिन हमारी जानकारी के मुताबिक अब तक फिरोज़ गांधी के नाम पर कोई डाक टिकट जारी नहीं हुआ है . हमने इस संबंध में काफी Research किया, हमें पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और संजय गांधी के भी डाक टिकट मिले लेकिन फिरोज़ गांधी का कोई डाक टिकट नहीं मिला . 

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जब हमने Research किया तो हमें ये पता चला कि कांग्रेस की सरकारों ने पंडित नेहरू के पिता - मोती लाल नेहरू, पत्नी - कमला नेहरू और बहन - विजय लक्ष्मी पंडित के नाम पर भी डाक टिकट जारी किए हैं . यहां तक कि फिरोज़ गांधी के दोस्त, रफी अहमद किदवई, गोविंद वल्लभ पंत और सुभद्रा जोशी के नाम पर भी डाक टिकट जारी हुए हैं . लेकिन फिरोज़ गांधी के नाम पर हमें कोई डाक टिकट नहीं मिला . 

एक RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, गांधी नेहरू परिवार के सदस्यों के नाम, 450 योजनाओं, और संस्थाओं में इस्तेमाल हुए हैं. लेकिन फिरोज़ गांधी के नाम पर हमें Research करने के बाद भी किसी योजना का नाम नहीं मिला . 
 
आज हमने अपनी तरफ से कोई बात नहीं कही है . हमने आज देश के सामने सिर्फ और सिर्फ तथ्य रखे हैं . हमें लगता है कि देश को अपने नेताओं के बारे में जानना चाहिए . और जिस गांधी-नेहरू परिवार ने 48 वर्षों तक देश पर राज किया है, उनके बारे में तो देश को अवश्य जानना चाहिए .