ZEE जानकारीः क्या हम लोग केवल चालान से बचने के लिए हेलमेट पहनते हैं?

बच्चों के हेलमेट ना पहनने पर चालान नहीं होता, इसलिए लोग बच्चों को हेलमेट नहीं पहनाते. 

ZEE जानकारीः क्या हम लोग केवल चालान से बचने के लिए हेलमेट पहनते हैं?

आप ट्रैफिक के नियमों का पालन अपनी जान बचाने के लिए करते हैं, या फिर चालान से बचने के लिए करते हैं ? ये सवाल सुनकर आपमें से बहुत सारे लोग मन ही मन ये स्वीकार कर लेंगे कि वो चालान से बचने के लिए नियमों का पालन करते हैं. आपकी इस सोच को बदलने के लिए अब हम आपको एक वीडियो दिखाएंगे. 

बैंगलुरु की ये तस्वीरें 19 अगस्त की हैं. वीडियो में आप देख सकते हैं, कि एक बाइक, किस तरह सड़क पर आगे चल रही बाइक से टकरा गई. ये टक्कर होते ही बाइक पर सवार पति और पत्नी नीचे गिर गये लेकिन उनका 5 साल का बच्चा बाइक के पेट्रोल टैंक पर बैठा रह गया. टक्कर के बावजूद इस बाइक ने अपना संतुलन नहीं खोया. ये बाइक करीब 300 मीटर तक सड़क पर चलती रही और रफ्तार धीमी होने पर सड़क के किनारे डिवाइडर के पास जाकर गिर गई. 

इस बच्चे की किस्मत अच्छी थी, कि ट्रक के करीब से गुज़रने के बावजूद, बाइक उससे नहीं टकराई. इस दुर्घटना में ना तो बच्चे को चोट आई और ना ही उसके माता-पिता ज़ख्मी हुए. जब बच्चा डिवाइडर पर गिर गया तो आसपास के लोगों ने तुरंत बच्चे को उठा लिया और उसके मां-बाप को सौंप दिया. 

इस बच्चे की किस्मत अच्छी थी. और किस्मत हर बार साथ नहीं देती. इस बच्चे की सुरक्षा के लिए उसे हेलमेट पहनाया जाना चाहिए था. लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया. हमारे देश में हेलमेट पहनना शान के खिलाफ समझा जाता है, और लोग सिर्फ चालान के डर से ही हेलमेट पहनते हैं. अगर चालान ना हो, तो ज़्यादातर लोग हेलमेट पहनना बंद कर देंगे. बच्चों के हेलमेट ना पहनने पर चालान नहीं होता, इसलिए लोग बच्चों को हेलमेट नहीं पहनाते. 
इसका सीधा सा मतलब ये है कि लोगों को ना तो अपनी फिक्र है, ना अपने बच्चे की फिक्र है, उन्हें सिर्फ चालान की फिक्र है.

वर्ष 2016 में सड़क हादसों में करीब 1 लाख 50 हज़ार लोगों की मौत हुई थी. और इनमें से करीब 46 प्रतिशत यानी करीब 70 हज़ार लोग 18 से 35 वर्ष की आय़ु के थे. इस तरह मरने वाले युवाओं में बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जो या तो हेलमेट पहनते ही नहीं हैं, और अगर पहनते भी हैं, तो वो बिना ISI मार्क वाला हेलमेट होता है. लोगों को लगता है कि हेलमेट पहनना सिर्फ इसलिए ज़रूरी है, ताकि चालान से बचा जा सके. लेकिन वो ये बात नहीं समझना चाहते कि हेलमेट उनकी ज़िंदगी की हिफाज़त कर सकता है. इसलिए हमारी अपील है, कि आप अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर हो जाइए. क्योंकि, जान है, तो जहान है.