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ZEE जानकारीः किसी बेजुबान पर गोली चलाकर उसकी जान ले लेना, आखिर कहां की बहादुरी है?

अवनि नामक इस बाघिन ने कथित तौर पर 13 से ज़्यादा लोगों की जान ली थी और ये आदमखोर बन चुकी थी. 

ZEE जानकारीः किसी बेजुबान पर गोली चलाकर उसकी जान ले लेना, आखिर कहां की बहादुरी है?

दुश्मन का विनाश करने वाले INS अरिहंत के बाद अब हम उस समाज की बात करेंगे, जो जानवरों का विनाश कर रहा है. इसी समाज ने महाराष्ट्र के यवतमाल में एक Tigress यानी बाघिन की हत्या कर दी. वो भी सिर्फ आदमखोर होने के शक़ के आधार पर.

अवनि नामक इस बाघिन ने कथित तौर पर 13 से ज़्यादा लोगों की जान ली थी और ये आदमखोर बन चुकी थी. आदमखोर हो जाने की स्थिति में जानवर अक्सर इंसान के मांस के लिए शिकार पर निकलता है. क्योंकि उसके मुंह में इंसान का खून लग चुका होता है. पिछले दो वर्षों से महाराष्ट्र के जंगलों में इस 6 साल की बाघिन की तलाश की जा रही थी. इसे पकड़ने के लिए 200 लोगों की टीम लगाई गई थी. ये एक बड़ा ऑपरेशन था. इसलिए Camera, Drone, खोजी कुत्तों, पैराग्लाइडर्स...यहां तक कि शार्पशूटर्स की मदद भी ली गई. लेकिन जिस प्रकार की Reports आ रही हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है, कि इस बाघिन का Encounter किया गया. 

शुरुआत में इस पूरे ऑपरेशन का मकसद, इस बाघिन की हत्या करना नहीं बल्कि उसे बेहोशी का इंजेक्शन देकर पकड़ना था. आधिकारिक बयान के मुताबिक, पहले बाघिन पर नशीली दवाओं वाले इंजेक्शन से हमला किया गया. लेकिन, इंजेक्शन लगते ही बाघिन हमलावर हो गई और वो गश्त करने वाली Team की तरफ दौड़ी. इस दौरान 8 से 10 मीटर की दूरी पर पहुंचते ही, उसे गोली मार दी गई. हालांकि, कुछ Reports में ये दावा भी किया जा रहा है, कि अवनि को बेहोश करने की कोशिश ही नहीं की गई. और रात के अंधेरे में जानबूझकर उसे गोली मार दी गई. 

ध्यान देने वाली बात ये है, कि National Tiger Conservation Authority के Protocol के तहत कोई शिकारी, सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले जानवरों का शिकार नहीं कर सकता. लेकिन ऐसा लग रहा है, कि इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया.

ये इंसान और जानवर के बीच का संघर्ष है... जिसमें जानवर मासूम लगते हैं, जबकि इंसान बहुत क्रूर और पत्थरदिल नज़र आते हैं. अंग्रेज़ी में एक कहावत है. Until The Lion Learn To Write, Every Story Will Glorify The Hunter....यानी जब तक शेर लिखना नहीं सीख लेता, शिकार की हर कहानी शिकारी का ही महिमामंडन करेगी. अवनि नामक बाघिन की हत्या पर ये कहावत बिल्कुल फिट बैठती है. क्योंकि वो अब ये बताने के लिए जीवित नहीं है, कि उसका पक्ष क्या था? क्या सच में ही शिकारी बहुत बहादुर था या फिर इस बाघिन की किस्मत खराब थी ? सवाल ये है, कि छिपकर, घात लगाकर, आधुनिक बंदूक के साथ खुद को सुरक्षित करके किसी बेजुबान पर गोली चलाकर उसकी जान ले लेना, आखिर कहां की बहादुरी है?

इस समय दुनिया में 3 हज़ार 900 बाघ ही बचे हैं. और इनमें से सबसे ज्यादा यानी 2 हज़ार 226 बाघ भारत में हैं. दुनिया में बाघों की आबादी की बात करें, तो भारत में दुनिया के 60 प्रतिशत बाघ रहते हैं. इनमें भी 200 से ज़्यादा महाराष्ट्र में हैं. वर्ष 2006 में भारत में 1 हज़ार 411 बाघ थे. और 2014 आते-आते ये संख्या बढ़कर 2 हज़ार 226 हो गई. लेकिन पिछले कुछ समय में बाघों पर हमले बहुत तेज़ी से बढ़े हैं. 

सिर्फ बाघ ही नहीं, अन्य जानवरों की स्थिति भी दयनीय है. World Wildlife Fund की नई रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1971 से 2014 के दौरान 43 वर्षों में, दुनिया में सभी प्रजातियों के 60 प्रतिशत जीव-जन्तु विलुप्त हो चुके हैं. और ये सब कुछ इंसानों की वजह से हुआ है. अपनी ज़रूरतों को पूरा करने की वजह से लोगों ने दूसरे जीवों का मार दिया . और प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया. जो जानवर विलुप्त हुए हैं उनमें पहला नाम है एशिया में पाए जाने वाले चीते का . पूरी दुनिया में इस प्रजाति के चीते की संख्या 50 से भी कम है . अगर इनके शिकार को नहीं रोका गया तो ये चीता आपको इंटरनेट पर दिखाई देगा. 

इसके अलावा जंगल कम होने की वजह से अफ्रीकन प्रजाति के हाथियों की संख्या बहुत कम हो चुकी है . वर्तमान में इनकी संख्या 50 हज़ार से भी कम है जबकि 200 वर्ष पहले तक ये 2 करोड़ से ज़्यादा थे . जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फीले इलाकों में पाये जाने वाला Polar Bear अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है. अब इनकी संख्या सिर्फ़ 24 हज़ार रह गई है . North American Breeding Bird Survey के मुताबिक पिछले 50 वर्षों में गौरैया की संख्या 82 प्रतिशत तक कम हो चुकी है .गौरैया एक प्रकार की चिड़िया होती है, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों में आमतौर पर देखी जाती है.

नदियों और समुद्र में प्रदूषण की वजह से पानी में रहने वाले करीब 83 प्रतिशत जीव ख़त्म हो चुके हैं . ये प्रदूषण सबसे ज़्यादा प्लास्टिक की वजह से फैल रहा है . कई लोग ये भी सोच रहे होंगे कि जानवर मर रहे हैं तो मरें, इसमें उनका क्या जाता है. लेकिन सच ये है कि इसका असर आपकी ज़िंदगी पर भी पड़ेगा. क्योंकि प्रकृति में हर जीव की अपनी भूमिका है. अगर कोई जीव विलुप्त होता है, तो उसकी वजह से प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है. 

इस संतुलन को और क़रीब से समझने के लिए हमने शेरों के बीच जाने का फैसला किया. आप इसे Walk With Lions भी कह सकते हैं. आम तौर पर शेरों की दुनिया को आपने TV पर ही देखा होगा. लेकिन शेर के इतने करीब जाना अपने आप में एक दुलर्भ अनुभव था. पृथ्वी पर सबका अधिकार है.. और शेरों के इतना करीब जाकर मुझे ये महसूस हुआ जैसे शेर ये कह रहे हों कि पृथ्वी को हमसे छीनिए नहीं.. बल्कि हमारे साथ शेयर कीजिए. शेर के साथ ये Sharing आसान नहीं है. Walk With Lions के लिए आपकी Height 150 सेंटीमीटर यानी 4.9 फीट से ज़्यादा होनी चाहिए. इसके लिए आपको मानसिक और शारीरिक तौर पर मज़बूत होना होगा.

शेरों के साथ Walk करने वाले इंसान को सुनने और देखने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. शेर काफी Unpredictable होते हैं, वो अगले ही पल क्या कर देंगे, इसका भरोसा नहीं होता. इसके बावजूद, अपने अनुभव के आधार पर हम ये कह सकते हैं, कि शेरों के साथ दोस्ती की जा सकती है. बशर्ते, आप उनके साथ दोस्तों जैसा व्यवहार करें. शेरों वाली इस Evening Walk को मैंने अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया है. इस रिपोर्ट से आपके और शेरों के बीच की दूरिया कम हो जाएंगी.